भूदेव|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

ललितशूरदेव के पश्चात उसका पुत्र भूदेव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। वह कत्यूरी वंश के महत्वपूर्ण शासकों में माना जाता है। उसके शासनकाल से संबंधित बागेश्वर शिलालेख विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। भूदेव की धार्मिक नीति उसके पूर्ववर्ती शासकों की अपेक्षा अधिक रूढ़िवादी मानी जाती है। वह ब्राह्मण धर्म का दृढ़ अनुयायी था तथा बौद्ध धर्म के प्रति विरोधी दृष्टिकोण रखता था। उसकी राजकीय एवं धार्मिक उपाधियाँ उसके व्यक्तित्व और शासन की विशेषताओं पर प्रकाश डालती हैं।

मुख्य तथ्य

  • ललितशूरदेव के पश्चात भूदेव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा।
  • भूदेव ने ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की थी, जो उसकी उच्च राजकीय स्थिति एवं प्रभुत्व को दर्शाती है।
  • उसे ‘परम ब्राह्मण भक्त’ की उपाधि से भी विभूषित किया गया था, जिससे उसके ब्राह्मण धर्म के प्रति दृढ़ विश्वास का पता चलता है।
  • भूदेव को ‘बुद्ध श्रमण शत्रु’ की उपाधि भी प्राप्त थी। यह उपाधि उसके बौद्ध धर्म एवं बौद्ध श्रमणों के प्रति विरोधी दृष्टिकोण को दर्शाती है।
  • भूदेव कट्टर ब्राह्मण धर्मावलंबी था और उसके शासनकाल में ब्राह्मण धार्मिक परंपराओं को विशेष संरक्षण प्राप्त होने के संकेत मिलते हैं।
  • भूदेव ने बागेश्वर में एक शिलालेख उत्कीर्ण करवाया था, जो उसके शासनकाल एवं तत्कालीन परिस्थितियों की जानकारी का महत्वपूर्ण स्रोत है।
  • भूदेव के समय धार्मिक गतिविधियों एवं मंदिर निर्माण को संरक्षण प्राप्त हुआ, जिससे उसके धार्मिक झुकाव का पता चलता है।
  • बैजनाथ मंदिर के निर्माण का श्रेय भूदेव को दिया जाता है। यह उसके स्थापत्य एवं धार्मिक संरक्षण का महत्वपूर्ण उदाहरण है।
  • भूदेव की उपाधियों से उसके शासन की राजकीय शक्ति और धार्मिक विचारधारा, दोनों की जानकारी मिलती है। विशेष रूप से ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ उसकी राजनीतिक प्रतिष्ठा को दर्शाती है।
  • भूदेव के शासनकाल में ब्राह्मण धर्म का प्रभाव मजबूत हुआ, जबकि बौद्ध धर्म के प्रति उसका विरोध उसकी धार्मिक नीति की प्रमुख विशेषता के रूप में सामने आता है।

निष्कर्ष

भूदेव कत्यूरी वंश का ऐसा शासक था जिसके शासन में राजकीय प्रतिष्ठा के साथ धार्मिक रूढ़िवादिता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उसकी ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ उपाधि उसकी राजनीतिक शक्ति का संकेत देती है, जबकि ‘परम ब्राह्मण भक्त’ और ‘बुद्ध श्रमण शत्रु’ जैसी उपाधियाँ उसकी धार्मिक विचारधारा को स्पष्ट करती हैं। बागेश्वर शिलालेख उसके शासन का महत्वपूर्ण अभिलेखीय प्रमाण है। बैजनाथ मंदिर के निर्माण से उसके स्थापत्य संरक्षण का भी पता चलता है। इस प्रकार भूदेव को ब्राह्मण धर्म के दृढ़ समर्थक और कत्यूरी स्थापत्य परंपरा के संरक्षक के रूप में देखा जाता है।

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