कल्याणराजदेव|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
कल्याणराजदेव कत्यूरी वंश के प्रारम्भिक शासकों में से एक था। वह खर्परदेव का पुत्र था और उसके बाद कत्यूरी राजसिंहासन पर आसीन हुआ। उसके शासनकाल की जानकारी मुख्यतः बागेश्वर शिलालेख से प्राप्त होती है। उसके द्वारा धारण की गई उच्च राजकीय उपाधि से इस काल में कत्यूरी शासकों की राजकीय प्रतिष्ठा एवं संप्रभु स्थिति का संकेत मिलता है।
कल्याणराजदेव प्रमुख तथ्य
- खर्परदेव के पश्चात उसका पुत्र कल्याणराजदेव कत्यूरी राजगद्दी पर आसीन हुआ।
- उसने अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज’ की उपाधि धारण की
- उसके शासन से कत्यूरी वंश में वंशानुगत उत्तराधिकार की परंपरा का पता चलता है।
- बागेश्वर शिलालेख में उसकी पत्नी का नाम लद्धा देवी उत्कीर्ण मिलता है।
- उसके शासनकाल से संबंधित विस्तृत राजनीतिक एवं प्रशासनिक जानकारी उपलब्ध नहीं है, फिर भी अभिलेखीय उल्लेख उसके ऐतिहासिक महत्व को प्रमाणित करता है।
निष्कर्ष
कल्याणराजदेव का शासन कत्यूरी वंश की राजकीय निरंतरता एवं वंशानुगत परंपरा का महत्वपूर्ण चरण था। यद्यपि उसके शासन के बारे में सीमित जानकारी उपलब्ध है, लेकिन उसकी राजकीय उपाधि और बागेश्वर शिलालेख में उसकी पत्नी का उल्लेख कत्यूरी इतिहास के पुनर्निर्माण में महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रदान करता है।