गोविषाण राज्य |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

गोविषाण राज्य उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाला एक प्राचीन राज्य था। इसका प्रमुख क्षेत्र वर्तमान काशीपुर तथा उससे लगे तराई-मैदानी भू-भाग में माना जाता है। गोविषाण का उल्लेख चीनी यात्री ह्वेनसांग (युवान च्वांग) के यात्रा-वृत्तांत में मिलता है। इसके भौगोलिक विस्तार एवं पहचान के संबंध में कनिंघम का मत विशेष महत्वपूर्ण है। गोविषाण को प्राचीन कान्यकुब्ज राज्य के तीसरे भाग के रूप में भी वर्णित किया गया है। इसकी स्थिति गंगा-यमुना के मैदान और हिमालय की तराई के बीच होने के कारण यह क्षेत्र प्राचीन काल में राजनीतिक एवं व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा होगा।

गोविषाण राज्य – प्रमुख तथ्य

  • कान्यकुब्ज राज्य का तीसरा भाग गोविषाण राज्य में टूटा था।
  • गोविषाण का प्रमुख क्षेत्र वर्तमान काशीपुर एवं उसके आसपास का तराई क्षेत्र माना जाता है।
  • कनिंघम के अनुसार गोविषाण राज्य में वर्तमान काशीपुर के साथ रामपुर एवं पीलीभीत के क्षेत्र भी सम्मिलित थे।
  • गोविषाण का विस्तार पश्चिम में रामगंगा नदी से पूर्व में शारदा नदी तक माना गया है।
  • इस प्रकार इसका क्षेत्र मुख्यतः कुमाऊँ की तराई एवं उससे लगे उत्तर भारतीय मैदानी भागों में विस्तृत था
  • कनिंघम ने काशीपुर के उज्जैन में स्थित प्राचीन दुर्ग/किले को गोविषाण राज्य से संबंधित माना है।
  • गोविषाण की पहचान एवं सीमा-निर्धारण में ह्वेनसांग का यात्रा-वृत्तांत महत्वपूर्ण स्रोत है।
  • ह्वेनसांग (युवान च्वांग) ने अपने यात्रा-वृत्तांत में स्त्रुघ्न, ब्रह्मपुर और गोविषाण—तीनों राज्यों का उल्लेख किया है।
  • गोविषाण की भौगोलिक स्थिति इसे हिमालयी क्षेत्र और मैदानी भारत के बीच संपर्क क्षेत्र बनाती थी।
  • काशीपुर क्षेत्र से प्राप्त प्राचीन पुरातात्विक अवशेष इस क्षेत्र की प्राचीन नगरीय एवं राजनीतिक महत्ता को समझने में सहायक हैं।

निष्कर्ष

गोविषाण राज्य प्राचीन उत्तराखण्ड के तराई क्षेत्र की महत्वपूर्ण राजनीतिक इकाई था। ह्वेनसांग के यात्रा-वृत्तांत में इसका उल्लेख तथा कनिंघम द्वारा इसकी पहचान से इसके ऐतिहासिक महत्व का पता चलता है। रामगंगा से शारदा नदी तक इसका विस्तृत क्षेत्र माना गया है, जिसमें काशीपुर के साथ रामपुर और पीलीभीत के कुछ भाग सम्मिलित थे। काशीपुर के उज्जैन स्थित प्राचीन दुर्ग को भी इससे जोड़कर देखा गया है। इस प्रकार गोविषाण राज्य हिमालय की तराई और उत्तर भारतीय मैदानी क्षेत्रों के बीच राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं व्यापारिक संपर्क की महत्वपूर्ण कड़ी था।

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