सुवर्णगोत्र देश |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
सुवर्णगोत्र देश उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास में उल्लिखित उन क्षेत्रों में माना जाता है, जो तत्कालीन प्रमुख राज्यों की राजनीतिक सीमाओं से बाहर अपनी स्वतंत्र पहचान रखते थे। उपलब्ध साहित्यिक एवं ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर इसे ब्रह्मपुर राज्य के उत्तर में स्थित माना गया है। हर्षवर्धन के समय यह उसके साम्राज्य का प्रत्यक्ष भाग नहीं था। कुछ विद्वानों ने इसकी स्थिति हिमालय के पार भोट क्षेत्र में मानी है। सुवर्णगोत्र को पूर्वी स्त्रीराज्य के नाम से भी संबोधित किया गया है। इसके संबंध में बृहत्संहिता तथा कश्मीर के राजाओं के अभियानों से जुड़े उल्लेख महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
सुवर्णगोत्र देश प्रमुख तथ्य
- सुवर्णगोत्र देश ब्रह्मपुर राज्य के उत्तर में स्थित था और हर्षवर्धन के साम्राज्य से बाहर एक स्वतंत्र देश माना जाता था।
- सुवर्णगोत्र को पूर्वी स्त्रीराज्य के नाम से भी जाना जाता था।
- प्रसिद्ध विद्वान विल्सन ने सुवर्णगोत्र की स्थिति भोट (तिब्बत) क्षेत्र में बताई है।
- बृहत्संहिता में स्त्रीराज्य का उल्लेख पश्चिमोत्तर दिशावर्ती देशों के संदर्भ में मिलता है।
- सुवर्णगोत्र की स्थिति के कारण इसका संबंध हिमालयी एवं भोट क्षेत्र से जोड़ा जाता है।
- कश्मीर के शासक ललितादित्य मुक्तापीड द्वारा विस्तृत स्त्रीराज्य को जीतने का उल्लेख मिलता है।
- कश्मीर के शासक जयापीड़ द्वारा भी स्त्रीराज्य पर विजय प्राप्त करने का उल्लेख मिलता है।
- स्त्रीराज्य से संबंधित ये उल्लेख उस क्षेत्र के राजनीतिक महत्व की ओर संकेत करते हैं।
- सुवर्णगोत्र की वास्तविक स्थिति एवं स्त्रीराज्य के साथ इसके संबंध को लेकर विद्वानों में मतभेद पाए जाते हैं
- सुवर्णगोत्र का उल्लेख प्राचीन हिमालयी राजनीतिक भूगोल को समझने में महत्वपूर्ण माना जाता है।
निष्कर्ष
सुवर्णगोत्र देश उत्तराखण्ड एवं मध्य हिमालय के प्राचीन राजनीतिक भूगोल को समझने में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इसे ब्रह्मपुर के उत्तर में स्थित तथा हर्षवर्धन के साम्राज्य से बाहर एक स्वतंत्र देश के रूप में माना गया है। विल्सन द्वारा इसकी स्थिति भोट में बताना तथा बृहत्संहिता में स्त्रीराज्य का उल्लेख इसके हिमालयी संबंधों की ओर संकेत करता है। कश्मीर के ललितादित्य मुक्तापीड और जयापीड़ के अभियानों में स्त्रीराज्य की विजय का उल्लेख इसके राजनीतिक महत्व को दर्शाता है। यद्यपि इसकी वास्तविक सीमा एवं स्त्रीराज्य के साथ इसके संबंध को लेकर विद्वानों में मतभेद हैं, फिर भी सुवर्णगोत्र प्राचीन हिमालयी राज्यों और उत्तराखण्ड के राजनीतिक इतिहास की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।