बालो कल्याण चंद|Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
बालो कल्याण चंद चंद वंश के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी शासक थे। वे भीष्मचंद के दत्तक पुत्र और उत्तराधिकारी बने। उनके शासनकाल की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि 1563 ई. में खगमराकोट के पर्वत पर अल्मोड़ा नगर की स्थापना तथा उसे चंद राज्य की राजधानी बनाना थी। उन्होंने चंद राज्य के विस्तार की नीति को आगे बढ़ाते हुए गंगोलीहाट, सोर और दानपुर जैसे क्षेत्रों को अपने राज्य में सम्मिलित किया। साथ ही उन्होंने अल्मोड़ा में महत्वपूर्ण दुर्गों का निर्माण कराया और प्रशासन को सुदृढ़ किया। उन्हें एक महत्वाकांक्षी, कुशल राजनीतिज्ञ तथा प्रजाहितैषी शासक के रूप में भी याद किया जाता है।
बालो कल्याण चंद प्रमुख तथ्य
- बालो कल्याण चंद को कुछ परंपराओं में राजा ताराचंद का पुत्र बताया गया है। ताराचंद के संबंध में विशेष ऐतिहासिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
- भीष्मचंद की कोई संतान नहीं थी, इसलिए उन्होंने कल्याण चंद को गोद लिया था। उन्हें प्यार से ‘बालो’ कहा जाता था, जिसके कारण वे आगे चलकर बालो कल्याण चंद के नाम से प्रसिद्ध हुए।
- भीष्मचंद की मृत्यु के बाद बालो कल्याण चंद उनके उत्तराधिकारी बने।
- भीष्मचंद चंद राज्य की राजधानी चंपावत से खगमराकोट ले जाना चाहते थे, क्योंकि चंपावत राज्य के एक किनारे पर स्थित था और राज्य का विस्तार हो चुका था।
- भीष्मचंद की योजना पूरी होने से पहले रायगढ़ के सरदार श्री गजुवाठिगा ने धोखे से उनकी हत्या कर दी और खगमराकोट पर अधिकार कर स्वयं को स्वतंत्र शासक घोषित कर दिया।
- पिता की हत्या के समय बालो कल्याण चंद डोटी के विद्रोह को दबाने गए हुए थे। पिता की मृत्यु का समाचार मिलने पर उन्होंने डोटी से समझौता किया और वापस आकर श्री गजुवाठिगा का वध कर दिया।
- बालो कल्याण चंद ने अपने पिता की राजधानी स्थानांतरित करने की योजना को पूरा किया और 1563 ई. में खगमराकोट के पर्वत पर अल्मोड़ा नगर बसाकर उसे चंद राज्य की राजधानी बनाया।
- अल्मोड़ा चंद वंश के पतन तक उसकी राजधानी बना रहा।
- उन्होंने अल्मोड़ा में जोशी, महरा आदि विभिन्न जातियों के लोगों को जागीर देकर बसाया।
- एक मान्यता के अनुसार, ‘चल्मोड़ा’ नामक वनस्पति की अधिकता के कारण नगर का नाम अल्मोड़ा पड़ा। कई ताम्रपत्रों में अल्मोड़ा को ‘राजापुर’ भी कहा गया है।
- बालो कल्याण चंद की महत्वपूर्ण विजय गंगोलीहाट पर थी। गंगोलीहाट सरयू और रामगंगा के मध्य स्थित था तथा इसका मुख्यालय मणकोट था।
- गंगोलीहाट के शासक मणकोटी राजा कहलाते थे। बालो कल्याण चंद के समय वहाँ नारायण चंद का शासन था।
- राजधानी के अल्मोड़ा स्थानांतरित होने के समय गंगोलीहाट की राजनीतिक व्यवस्था कमजोर हुई। इसका लाभ उठाकर बालो कल्याण चंद ने गंगोलीहाट पर अधिकार कर लिया।
- गंगोलीहाट का शासक नारायण चंद भागकर डोटी चला गया और वहाँ के राजा हरिमल्ल की शरण में गया।
- बालो कल्याण चंद ने मणकोटी क्षेत्र के उप्रेती और पंतों को अल्मोड़ा में राज्य कर्मचारी नियुक्त किया।
- बालो कल्याण चंद महत्वाकांक्षी शासक थे और वे अपने राज्य का विस्तार काली नदी तक करना चाहते थे।
- इस उद्देश्य से उन्होंने सीरा पर अधिकार करने की योजना बनाई। उस समय सीरा डोटी के रैका के अधीन था।
- कल्याण चंद ने कूटनीति का सहारा लिया। उनकी रानी डोटी के रैका की बहन थी। उन्होंने अपनी रानी के माध्यम से सीरा को दहेज में माँगने का प्रयास किया।
- डोटी के रैका हरिमल्ल ने सीरा देने से इंकार करते हुए कहा कि “सीरा मेरा सर है, चाहे तो सोर ले लो।”
- हरिमल्ल ने अपनी बहन को सोर क्षेत्र दहेज में दे दिया, जिसके परिणामस्वरूप सोर चंद राज्य में सम्मिलित हो गया।
- सोर प्राप्त करने के बाद बालो कल्याण चंद ने दानपुर क्षेत्र की ओर ध्यान दिया।
- उस समय दानपुर में अनेक स्वतंत्र सरदार थे, जो आपसी संघर्ष और द्वेष में लगे रहते थे। बालो कल्याण चंद ने इस स्थिति का लाभ उठाकर दानपुर पर आक्रमण कर उसे अपने अधिकार में कर लिया।
- दानपुर (बागेश्वर क्षेत्र) पर अधिकार होने के बाद चंद राज्य की सीमा भोटान्तिक राज्य की सीमा तक पहुँच गई।
- बालो कल्याण चंद ने अल्मोड़ा में लालमंडी किले का निर्माण करवाया।
- उन्होंने अल्मोड़ा में नेलपोखर किले का निर्माण भी करवाया।