निम्बर देव|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
त्रिभुवनराज के पश्चात कार्तिकेयपुर राज्य की सत्ता निम्बर के हाथों में आई। उसे कार्तिकेयपुर राज्य के द्वितीय राजपरिवार का संस्थापक माना जाता है। निम्बर के संबंध में बागेश्वर शिलालेख तथा पाण्डुकेश्वर ताम्राभिलेख से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। वह एक शक्तिशाली एवं युद्ध-कुशल शासक था। उसके शासनकाल में राज्य के राजनीतिक संबंधों में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए। वह शैव मत का अनुयायी था तथा उसने धार्मिक एवं स्थापत्य कार्यों को भी संरक्षण दिया। उसके समय पाल शासकों के साथ राजनीतिक संबंध स्थापित होने के संकेत मिलते हैं।
निम्बर देव प्रमुख तथ्य
- त्रिभुवनराज के पश्चात निम्बर ने कार्तिकेयपुर राज्य की सत्ता संभाली। उसे कार्तिकेयपुर के द्वितीय राजपरिवार का संस्थापक माना जाता है।
- बागेश्वर शिलालेख में उसका नाम ‘निंबर्त’ तथा पाण्डुकेश्वर ताम्राभिलेख में ‘श्री निम्वरम’ मिलता है। ललितसूर देव के ताम्राभिलेख में उसकी प्रशंसा की गई है।
- त्रिभुवनराज की भाँति निम्बर की भी कोई विशिष्ट राजकीय उपाधि उपलब्ध अभिलेखों में अंकित नहीं है।
- निम्बर की रानी का नाम दाशू या नाथू देवी बताया गया है। उनसे उत्पन्न पुत्र इष्टगण देव था, जो निम्बर के पश्चात राजगद्दी पर बैठा।
- निम्बर ने पाल शासकों के साथ संधि की थी। इससे तत्कालीन राजनीतिक परिस्थितियों में उसकी कूटनीतिक भूमिका का पता चलता है।
- निम्बर शैव मत का अनुयायी था। उसके शासनकाल में शैव धार्मिक परंपरा को संरक्षण प्राप्त हुआ।
- निम्बर ने जागेश्वर में विमानों का निर्माण करवाया था। इससे उसके धार्मिक एवं स्थापत्य संरक्षण का पता चलता है।
- अभिलेखीय प्रशस्तियों में निम्बर को ‘शत्रुहंता’ तथा युद्ध-कुशल बताया गया है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता एवं वीरता का संकेत मिलता है।
- नालंदा अभिलेख से ज्ञात होता है कि पाल शासक धर्मपाल ने गढ़वाल क्षेत्र पर आक्रमण किया था। संभवतः इसी राजनीतिक परिस्थिति के दौरान खर्परदेव वंश के स्थान पर निम्बर के वंश की स्थापना हुई होगी।
निष्कर्ष
निम्बर कार्तिकेयपुर राज्य के इतिहास में राजवंशीय परिवर्तन और राजनीतिक पुनर्गठन का महत्वपूर्ण शासक था। उसके द्वारा स्थापित द्वितीय राजपरिवार ने आगे चलकर कत्यूरी सत्ता को निरंतरता प्रदान की। उसकी सैन्य दक्षता, शत्रुओं पर विजय, पालों के साथ राजनीतिक संबंध तथा शैव धर्म के प्रति संरक्षण उसके शासन की प्रमुख विशेषताएँ थीं। जागेश्वर में निर्माण कार्य करवाकर उसने धार्मिक एवं स्थापत्य क्षेत्र में भी योगदान दिया। इस प्रकार निम्बर को कार्तिकेयपुर राज्य में द्वितीय राजपरिवार की स्थापना करने वाला शक्तिशाली एवं प्रभावशाली शासक माना जा सकता है।