कप मार्क्स| Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

उत्तराखंड का प्राचीन इतिहास केवल साहित्यिक एवं ऐतिहासिक स्रोतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ उपलब्ध विभिन्न पुरातात्विक अवशेष भी इस क्षेत्र में मानव की प्राचीन गतिविधियों, सांस्कृतिक विकास तथा धार्मिक-सामाजिक मान्यताओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं पुरातात्विक साक्ष्यों में कप मार्क्स (Cup Marks) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। विशाल शिलाखंडों अथवा चट्टानों की सतह पर बने ओखलीनुमा, गोल एवं उथले गड्ढों को सामान्यतः कप मार्क्स कहा जाता है। उत्तराखंड में इनके अध्ययन का संबंध मुख्यतः महापाषाणीय संस्कृति से जोड़ा गया है। कुमाऊँ और गढ़वाल के विभिन्न क्षेत्रों में इनकी उपस्थिति इस बात का संकेत देती है कि प्राचीन मानव ने प्राकृतिक चट्टानों को भी अपनी सांस्कृतिक एवं संभवतः धार्मिक गतिविधियों का माध्यम बनाया। इनके व्यवस्थित अध्ययन से उत्तराखंड की प्रागैतिहासिक एवं आद्य ऐतिहासिक सांस्कृतिक परंपराओं की प्रकृति को समझने में सहायता मिलती है।

प्रमुख विशेषताए एवं तथ्य

  • विशाल शिलाखंडो व चट्टानों पर बने ओखली आकर के उथले गोल गड्ढे पुरातत्व विज्ञान में कप मार्क्स कहे जाते हैं।
  • इन्हें महापाषानीय संस्कृति के पुरावशेष मानते है।
  • उत्तराखंड में पुरातत्व का जनक हेनवुड को माना जाता है, 1856 में सर्वप्रथम इनके द्वारा वर्तमान चंपावत जनपद के देवीधुरा स्थान पर प्राप्त ऐसे कप मार्क्स का विवरण प्रकाशित किया, इन्हे महापाषानीय संस्कृति से जोड़ा गया।
  • 1877 मे रिवेट कारनक द्वारा द्वाराहाट के शैल चित्रों पर प्रकाश डाला गया और इसकी तुलना यूरोप के शैल चित्रों से की गई।
  • रिवेट कारनक को द्वाराहाट के चंद्रेश्वर मंदिर के दक्षिण में महाश्म-संस्कृति से संबंधित लगभग 200 कप मार्क्स 12 समानांतर पंक्तियों में खुद ही मिले।
  • रामगंगा घाटी के नौलाग्राम, अल्मोड़ा में कब मार्क्स (ओखली) की खोज यशोधर मठपाल ने की, यहां पर लगभग 72 कप मार्क्स प्राप्त हुए |
  • नौगांव, मुनिया की ढाई तथा जोयो ग्राम, अल्मोड़ा मे कप मार्क्स की खोज यशोधर मठपाल द्वारा की गई।
  • गोपेश्वर के समीप मंडल तथा पश्चिमी नयार घाटी में ग्वाड आदि स्थानों पर कब मार्क्स की खोज डॉ यशवंत काठोच ने की।
  • माहेश्वर प्रसाद जोशी द्वारा कुमाऊँ के ही खैखन, जसकोट, देवीधुरा आदि स्थानों मे कप मार्क्स खोजे।
  • एमपी जोशी ने कुमाऊं से प्राप्त महाश्म कालीन कप मार्क्स को 7 भागों में विभाजित किया है|

निष्कर्ष

उत्तराखंड में प्राप्त कप मार्क्स राज्य की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत के महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य हैं। देवीधुरा से प्रारंभ होकर द्वाराहाट, नौलाग्राम, नौगाँव, मुनिया की ढाई, जोयो, मंडल, पश्चिमी नयार घाटी, ग्वाड, खैखन और जसकोट जैसे अनेक स्थलों तक इनकी उपस्थिति इनके व्यापक भौगोलिक विस्तार को दर्शाती है। हेनवुड, रिवेट कारनक, यशोधर मठपाल, यशवंत काठोच तथा एम.पी. जोशी जैसे विद्वानों के प्रयासों ने उत्तराखंड के कप मार्क्स के अध्ययन को महत्वपूर्ण आधार प्रदान किया। विशेष रूप से एम.पी. जोशी द्वारा कुमाऊँ से प्राप्त कप मार्क्स का वर्गीकरण इनके वैज्ञानिक अध्ययन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। यद्यपि कप मार्क्स के वास्तविक उद्देश्य एवं अर्थ को लेकर विद्वानों में पूर्ण सहमति नहीं है, फिर भी ये अवशेष उत्तराखंड में प्राचीन मानव की तकनीकी क्षमता, सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और संभावित धार्मिक-सामाजिक चेतना को समझने के लिए अत्यंत उपयोगी पुरातात्विक सामग्री प्रस्तुत करते हैं।

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