Similar Posts
UTTRAKHAND HISTORY LANGUAGE PREFERENCE
LANGUAGE PREFERENCE 1. ENGLISH 2. HINDI
UTTRAKHAND HISTORY MCQ TOPIC IN ENGLISH
UTTRAKHAND HISTORY TOPIC IN ENGLISH Ancient History of Uttarakhand 1. Prehistoric HistoryStone Age Tools (Palaeoliths)Cave Paintings 2. Protohistoric PeriodMegalithic Cup-MarksCopper Hoard CultureMegalithic BurialsPainted Grey Ware (PGW) Culture 3. Uttarakhand in the Vedic and Puranic Period 4. Kuninda Period 5. Shaka Rule in Uttarakhand 6. Kushana Rule in Uttarakhand 7. Post-Kushana PeriodYaudheya RepublicVarshaganya Gotriya Dynasty of…
कत्यूरी वंश के शासक|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय कत्यूरी वंश के इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखों का विशेष महत्व है। कत्यूरी शासकों के नाम मुख्यतः पाण्डुकेश्वर, बागेश्वर, बैजनाथ आदि से प्राप्त अभिलेखों से ज्ञात होते हैं। उपलब्ध अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर कत्यूरी वंश के तीन परिवारों के 14 शासकों का उल्लेख मिलता है, जबकि इतिहासकार यशवंत कठोच ने कत्यूरी वंश में…
कत्यूरी वंश का संस्थापक |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय कत्यूरी वंश के संस्थापक के संबंध में इतिहासकारों में विभिन्न मत पाए जाते हैं। कत्यूरी परंपरा में वासुदेव को संस्थापक मानने की जनश्रुति मिलती है, जबकि अभिलेखीय साक्ष्य इस मत का स्पष्ट समर्थन नहीं करते। बागेश्वर से प्राप्त शिलालेख तथा कार्तिकेयपुर राजवंश से संबंधित अन्य अभिलेखों के अध्ययन से वसन्तदेव/बसन्तदेव का नाम प्रमुखता से…
वसन्तदेव/बसन्तदेव |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय वसन्तदेव को उपलब्ध अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर कत्यूरी वंश का संस्थापक माना जाता है। प्रारम्भ में वह स्वतंत्र शासक न होकर उत्तराखण्ड क्षेत्र में एक सामन्त अथवा रक्षक के रूप में कार्य करता था। कन्नौज के शासक यशोवर्मन की शक्ति कमजोर होने के बाद उसने स्वतंत्र सत्ता स्थापित की तथा जोशीमठ के निकट…
पौरव वंश : शासनकाल एवं राज्य सीमा |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय पौरव अथवा पर्वताकार वंश उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास में एक महत्वपूर्ण राजवंश था, जिसका प्रमुख केंद्र ब्रह्मपुर माना जाता है। इस वंश के शासनकाल और राज्य-विस्तार के संबंध में प्रत्यक्ष प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इतिहासकारों ने तालेश्वर ताम्रपत्रों, समकालीन राजनीतिक घटनाओं तथा ह्वेनसांग के विवरण के आधार पर इसके काल एवं सीमा का निर्धारण…