राजा सोमचंद |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
कुमाऊँ के चंद वंश के संस्थापक के रूप में राजा सोमचंद का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। चंद वंश की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है तथा इसके प्रारंभिक इतिहास में किंवदंतियों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। सामान्यतः माना जाता है कि कत्यूरी शासन के अवसान के आसपास कुमाऊँ में चंद शक्ति का उदय हुआ। एटकिंसन एवं बद्रीदत्त पांडे जैसे विद्वान सोमचंद को चंद वंश का संस्थापक मानते हैं। परंपरा के अनुसार सोमचंद ने चंपावत को अपना राजनीतिक केंद्र बनाया तथा राजबुंगा किले से अपनी सत्ता को संगठित किया। उसके शासन से संबंधित परंपराओं में राज्य-विस्तार, स्थानीय शक्तियों पर नियंत्रण, प्रशासनिक व्यवस्था तथा धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का उल्लेख मिलता है।
प्रमुख बिंदु
- एटकिंसन एवं बद्रीदत्त पांडे सोमचंद को चंद वंश का संस्थापक मानते हैं। हालांकि चंद वंश की स्थापना की तिथि एवं प्रारंभिक इतिहास को लेकर इतिहासकारों में मतभेद हैं।
- अनुमानतः कत्यूरी शासन के अवसान के समय कुमाऊँ में चंद शक्ति का उदय हुआ।
- किंवदंती के अनुसार सोमचंद ने ब्रह्मदेव/वीरदेव की पुत्री चंपा से विवाह किया तथा विवाह के बाद उसे चंपावत क्षेत्र प्राप्त हुआ।
- बद्रीदत्त पांडे के अनुसार सोमचंद 27 व्यक्तियों के साथ श्री बदरीनाथ की यात्रा पर आया था। इसी दौरान काली कुमाऊँ के सूर्यवंशी शासक ब्रह्मदेव द्वारा उसे भूमि दिए जाने की परंपरा मिलती है।
- सोमचंद ने चंपावती देवी के नाम से जुड़े चंपावत को अपना राजनीतिक केंद्र बनाया और यहीं से राज्य-विस्तार प्रारंभ किया।
- परंपरा के अनुसार सोमचंद ने चंपावत में राजबुंगा किले का निर्माण कराया और इसी किले को चंद सत्ता के प्रारंभिक केंद्र के रूप में माना जाता है।
- स्थानीय भाषा में ‘बुंगा’ का अर्थ किला माना जाता है।
- राजबुंगा किले को परंपरा के अनुसार अंडाकार पद्धति में निर्मित माना जाता है।
- सोमचंद ने राजबुंगा किले में कार्की, बोरा, तड़ागी एवं चौधरी नामक चार किलेदार नियुक्त किए। इन्हें मूलतः नेपाल से संबंधित माना जाता है तथा इस व्यवस्था को चाराल/चारआल व्यवस्था कहा जाता है।
- सोमचंद की प्रथम विजय के रूप में दोनकोट (दोणकोट) के रावत राजा को पराजित करने का उल्लेख मिलता है।
- कालू तड़ागी को सोमचंद का वीर सेनापति माना जाता है।
- सोमचंद ने महरा एवं फर्त्याल दलों पर नियंत्रण स्थापित किया तथा उन्हें महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया। परंपरा के अनुसार राज्य की रणनीतिक गतिविधियों में इन दोनों दलों का विशेष प्रभाव था।
- परंपरा के अनुसार महरा लोग कटोलगढ़ तथा फर्त्याल लोग डुंगरी में रहते थे।
- सोमचंद ने ध्यानीरौ, चौमौसी, सालम एवं रंगोड़ पट्टियों को अपने राज्य में सम्मिलित कर राज्य का विस्तार किया।
- प्रारंभिक चंद सत्ता को अपेक्षाकृत छोटी मांडलिक सत्ता के रूप में वर्णित किया जाता है तथा परंपरा में सोमचंद द्वारा डोटी के राजा को कर दिए जाने का उल्लेख मिलता है।
- डोटी के शासक मल्लवंशी थे, जिन्हें रैका राजा कहा जाता था।
- परंपरा के अनुसार सोमचंद के समय जयदेव मल्ल डोटी अथवा रैका क्षेत्र का शासक था।
- परंपरा में वामदेव को मल्ल वंश का प्रथम राजा बताया गया है, जिसकी राजधानी चंपा थी। चंपा नाम को उसकी इष्टदेवी चंपावती से जोड़ा जाता है।
- सोमचंद द्वारा पंचायती राज व्यवस्था चलाए जाने की परंपरा मिलती है। इसी आधार पर उसे कुमाऊँ की प्रारंभिक पंचायती व्यवस्था से जोड़ा जाता है।
- सोमचंद ने गाँवों में बूढ़ा एवं सयानों की नियुक्ति की। ये स्थानीय स्तर पर व्यवस्था बनाए रखने तथा प्रशासनिक कार्यों में सहयोग करते थे।
- बूढ़ा एवं सयाने गाँवों से लगान वसूल कर राजा तक पहुँचाने का कार्य भी करते थे।
- उपर्युक्त परंपरा के आधार पर सोमचंद को कुमाऊँ में पंचायती राज व्यवस्था का जनक माना जाता है।
- परंपरा के अनुसार सोमचंद ने तत्कालीन समाज को आठ वर्गों में विभाजित किया था।
- सोमचंद द्वारा चौथानी ब्राह्मणों की नियुक्ति किए जाने का उल्लेख मिलता है।
- चौथानी ब्राह्मणों के अंतर्गत जोशी, सिमाल्टिया, बिष्ट एवं पांडे को माना जाता है।