राजा वीणाचंद |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
राजा वीणाचंद को चंद वंश के प्रारंभिक शासकों में उल्लेखित किया जाता है। उपलब्ध परंपरागत विवरणों में उसे एक विलासी शासक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उसके शासनकाल में राजकीय शक्ति कमजोर होने के कारण आसपास के खस शासकों को अपनी शक्ति बढ़ाने का अवसर मिला। परंपरा के अनुसार वीणाचंद की मृत्यु के बाद खसों ने कुमाऊँ पर आक्रमण किया और चंदों को पराजित कर दिया। इसके पश्चात लंबे समय तक कुमाऊँ में खस सत्ता के प्रभाव का उल्लेख मिलता है। इस काल को परंपरागत रूप से ‘खसिया राज’ कहा गया है तथा इससे संबंधित विवरणों में खस शासकों के नाम बिजड़, जीजड़ और जाजड़ आदि मिलते हैं।
प्रमुख बिंदु
- वीणाचंद को एक विलासी राजा के रूप में वर्णित किया गया है।
- उसके विलासी स्वभाव के कारण राजकीय शक्ति कमजोर होने की बात परंपरागत विवरणों में मिलती है।
- वीणाचंद के शासनकाल में आसपास के खस राजाओं को अपनी शक्ति बढ़ाने का अवसर मिला।
- परंपरा के अनुसार वीणाचंद की मृत्यु के बाद खसों ने कुमाऊँ पर आक्रमण किया।
- खसों ने इस संघर्ष में चंद सत्ता को पराजित कर कुमाऊँ में अपना प्रभुत्व स्थापित किया।
- परंपरागत विवरणों के अनुसार वीणाचंद की मृत्यु के बाद लगभग 200 वर्षों तक खस शासकों का शासन रहा।
- खसों के प्रारंभिक शासक के रूप में बिजड़ का नाम मिलता है।
- बिजड़, जीजड़ एवं जाजड़ को प्रमुख खस शासकों के रूप में वर्णित किया जाता है।
- खसों के शासनकाल को ‘खसिया राज’ कहा जाता था।
- परंपरा के अनुसार खसों का शासन लोकप्रिय नहीं था और उनके द्वारा जनता के उत्पीड़न का उल्लेख मिलता है।
- खसिया राज के दौरान जनता पर अत्याचार एवं उत्पीड़न किए जाने की बात परंपरागत विवरणों में कही गई है।
- दूसरी ओर, कुमाऊँ की कला के विकास की दृष्टि से खसिया राज को महत्वपूर्ण एवं उन्नत काल माना जाता है।
निष्कर्ष
राजा वीणाचंद के शासन से संबंधित विवरण मुख्यतः परंपरागत स्रोतों में प्राप्त होते हैं। उसे एक विलासी शासक के रूप में चित्रित किया गया है, जिसके शासनकाल में चंद सत्ता कमजोर हुई और आसपास के खस शासकों को अपनी शक्ति बढ़ाने का अवसर मिला। परंपरा के अनुसार वीणाचंद की मृत्यु के बाद खसों ने कुमाऊँ पर आक्रमण कर चंदों को पराजित किया और लगभग 200 वर्षों तक खसिया राज स्थापित रहा। बिजड़, जीजड़ और जाजड़ जैसे शासकों का उल्लेख इस काल से जोड़ा जाता है। खस शासन को राजनीतिक एवं सामाजिक दृष्टि से अलोकप्रिय तथा जनता के उत्पीड़न से जुड़ा बताया गया है। हालांकि कुमाऊँ की कला एवं सांस्कृतिक विकास की दृष्टि से इसी काल को अपेक्षाकृत उन्नत बताया जाता है। अतः वीणाचंद का काल चंद सत्ता के पतन और खस प्रभुत्व के उदय से जुड़ा महत्वपूर्ण चरण माना जाता है