पाली-द्वाराहाट-लखनपुर शाखा|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
परवर्ती कात्यूरी काल में पाली-द्वाराहाट-लखनपुर शाखा कुमाऊँ की महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शाखाओं में से एक थी। इस शाखा का प्रभाव मुख्यतः रामगंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहा। द्वाराहाट और लखनपुर इसके प्रमुख राजनीतिक केंद्र माने जाते हैं। इस शाखा के शासकों की जानकारी मुख्यतः अभिलेखीय स्रोतों से प्राप्त होती है। अभिलेखों में प्राप्त शासकों के नाम पाली-पछाऊँ की वंशावली से भिन्न हैं, जो इस शाखा के इतिहास को समझने में विशेष महत्व रखता है।
प्रमुख तथ्य
- द्वाराहाट में 12वीं से 14वीं शताब्दी ई. के दौरान कात्यूरियों की पाली-पछाऊँ शाखा के शासन का उल्लेख मिलता है।
- इस शाखा का शासित प्रदेश मुख्यतः रामगंगा नदी के तटों तक विस्तृत था।
- द्वाराहाट इस शाखा का प्रमुख राजनीतिक केंद्र था, जबकि लखनपुर भी इसके महत्वपूर्ण केंद्रों में शामिल था।
- इस शाखा के शासकों के नाम मुख्यतः अभिलेखों से ज्ञात होते हैं।
- अभिलेखों में गुर्जरदेव, सुधारदेव, मानदेव, सोमदेव तथा विजयदेव जैसे शासकों के नाम मिलते हैं।
- विशेष रूप से ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि इन शासकों के नाम पाली-पछाऊँ वंशावली में नहीं मिलते।
- इससे स्पष्ट होता है कि अभिलेखीय प्रमाण और बाद की वंशावलियाँ इस शाखा के इतिहास के संबंध में अलग-अलग जानकारी प्रस्तुत करती हैं।
निष्कर्ष
पाली-द्वाराहाट-लखनपुर शाखा परवर्ती कात्यूरी सत्ता के महत्वपूर्ण क्षेत्रीय केंद्रों में से थी। रामगंगा क्षेत्र में इसके शासन तथा गुर्जरदेव, सुधारदेव, मानदेव, सोमदेव और विजयदेव जैसे शासकों के नाम अभिलेखों से प्राप्त होना इसके ऐतिहासिक महत्व को स्पष्ट करता है। अभिलेखों और पाली-पछाऊँ वंशावली में शासकों के नामों का अंतर इस शाखा के अध्ययन की प्रमुख विशेषता है।