पाषाणयुगीन उपकरण(Palaeoliths) | Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | UKPSC/UKSSSC

परिचय

पत्थर को तराशकर, काटकर या तोड़कर बनाए गए वे उपकरण, जिनका उपयोग प्रागैतिहासिक मानव द्वारा शिकार, काटने, खुरचने, छेदने, चीरने तथा अन्य दैनिक कार्यों के लिए किया जाता था, पाषाणयुगीन उपकरण (Palaeoliths) कहलाते हैं। ये उपकरण प्रागैतिहासिक मानव की जीवन-शैली, आजीविका, शिकार की तकनीक तथा तकनीकी विकास को समझने के महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक प्रमाण हैं। उत्तराखण्ड के प्रागैतिहासिक इतिहास के अध्ययन में इनका विशेष महत्व है, क्योंकि राज्य की विभिन्न नदी-घाटियों एवं पुरास्थलों से प्राप्त प्रस्तर उपकरण इस क्षेत्र में प्राचीन मानव की उपस्थिति तथा उसके तकनीकी विकास के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं।

प्रमुख तथ्य

  • मानव के रहन-सहन तथा उसके द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले सामग्री, उपकरण, बर्तनों आदि के विकास क्रम के आधार पर प्रागैतिहासिक काल का अध्ययन पुरापाषाण, मध्यपाषाण, महापाषाण और धातु आदि कालों में बाँटकर किया जाता है
  • पाषाणकालीन मानव शिकार तथा फलों और कंदों का संग्रह करके अपनी उदर-पूर्ति करता था और इन कार्यों के लिए पत्थर से निर्मित उपकरण/औजारों का प्रयोग करता था
  • पाषाणयुगीन उपकरण (Palaeoliths) यमुना-घाटी में कालसी के समीप, अलकनन्दा-घाटी में डांग तथा स्वीत, अल्मोड़ा जनपद की पश्चामी रामगंगा-घाटी तथा नैनीताल जनपद में खुटानी-नाला से पाषाणयुगीन उपकरण प्राप्त हुए हैं।
  • पाषाण कालीन मानव द्वारा निर्मित ये उपकरण (artefacts) हस्त-कुठार (hand-axe), क्षुर (choppers), खुरचनी (scrapers), छिद्रक (borers), चीरक (cleavers), छेनी (burins), अनी (points) के रूप में मिलते हैं। उन्हें इनके अध्ययनों ने पूरा-पाषाणयुग से नव-पाषाणयुग तक के पुरावशेष माना है।
  • उक्त स्थलों के अतिरिक्त, उत्तरकाशी जनपद में डरख्याटी गाँव के टटाऊँ महादेव तथा चमोली जनपद में भेत एवं ह्यूँण गाँवों से भी क्रमशः अण्डाकार तथा चपटे प्रस्तर-उपकरण मिलने की सूचना मिली है जिनकी प्रामाणिकता अभी सिद्ध नहीं हो पायी है।
  • निम्न पुरापाषाण काल का प्रमुख उपकरण मुष्टि कुठार (Hand Axe) था। उत्तराखण्ड में इसके साक्ष्य कालसी के पास यमुना तट, श्रीनगर के पास अलकनंदा तट, नैनीताल में खुटानी नाला के पास तथा अल्मोड़ा मे रामगंगा घाटी आदि से मिले हैं।
  • मध्य पुरापाषाण काल के प्रमुख उपकरण शल्क (Flakes) और खुरचिनियाँ (Scrapers) थे। उत्तराखण्ड में इस काल के कुछ साक्ष्य श्रीनगर के निकट मिले हैं।
  • उच्च पुरापाषाण काल के प्रमुख उपकरण चमकदार फलक (Blades) और तक्षणियाँ (Burins) थे। उत्तराखण्ड में इस काल के उपकरण अभी तक नहीं मिले हैं।
  • मध्यपाषाण काल पुरापाषाण काल के बाद शुरू हुआ। इस काल के उपकरण छोटे और तीक्ष्ण होते थे, इसलिए इन्हें सूक्ष्माश्म (Microliths) कहा जाता है। उत्तराखण्ड में इस काल के कुछ उपकरण जसकोट से मिले हैं।
  • पाषाणयुगीन मानव गुफाओं या शैलाश्रयों में निवास करता था। उत्तराखण्ड में ऐसी गुफाएँ अधिकांश चमोली और अल्मोड़ा जिलों में मिलती हैं।कुछ प्रमुख गुफाओ का उल्लेख अगले अध्याय किया गया है.

निष्कर्ष


उत्तराखण्ड में प्राप्त पाषाणयुगीन उपकरण प्रागैतिहासिक मानव के जीवन, आजीविका और तकनीकी विकास को समझने के महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक स्रोत हैं। यमुना, अलकनन्दा और रामगंगा जैसी नदी-घाटियों से प्राप्त उपकरणों से स्पष्ट होता है कि उत्तराखण्ड में प्रारम्भिक मानव की गतिविधियाँ व्यापक क्षेत्र में फैली थीं। मुष्टि-कुठार से सूक्ष्माश्म तक उपकरणों का विकास मानव की बढ़ती आवश्यकताओं और तकनीकी दक्षता को दर्शाता है।

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Q1. उत्तराखण्ड में निम्न पुरापाषाण काल के मुष्टि कुठार (Hand Axe) के साक्ष्य निम्नलिखित में से किस स्थान से प्राप्त हुए हैं?
Explanation: निम्न पुरापाषाण काल का प्रमुख उपकरण मुष्टि कुठार (Hand Axe) था। उत्तराखण्ड में इसके साक्ष्य कालसी के पास यमुना तट, श्रीनगर के निकट अलकनंदा तट, नैनीताल के खुटानी नाला क्षेत्र तथा अल्मोड़ा की रामगंगा घाटी से प्राप्त हुए हैं।
Q2. निम्नलिखित में से किसे मध्य पुरापाषाण काल के प्रमुख उपकरणों के रूप में जाना जाता है?
Explanation: मध्य पुरापाषाण काल में शल्क (Flakes) और खुरचिनियाँ (Scrapers) प्रमुख उपकरण थे। उत्तराखण्ड में इस काल के कुछ उपकरण श्रीनगर के निकट पाए गए हैं। यह उपकरण-परंपरा निम्न पुरापाषाण काल के मुष्टि कुठार से अलग थी।
Q3. उच्च पुरापाषाण काल के प्रमुख उपकरणों के संबंध में सही युग्म कौन-सा है?
Explanation: उच्च पुरापाषाण काल के प्रमुख उपकरण चमकदार फलक (Blades) और तक्षणियाँ (Burins) माने गए हैं। दिए गए तथ्यों के अनुसार उत्तराखण्ड में उच्च पुरापाषाण काल के उपकरण अभी तक प्राप्त नहीं हुए हैं।
Q4. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

1. मध्यपाषाण काल के उपकरण छोटे और तीक्ष्ण होते थे।
2. ऐसे उपकरणों को सूक्ष्माश्म (Microliths) कहा जाता है।

सही उत्तर चुनिए—
Explanation: मध्यपाषाण काल, पुरापाषाण काल के बाद आया। इस काल में छोटे तथा तीक्ष्ण पत्थर के उपकरणों का प्रयोग हुआ, जिन्हें सूक्ष्माश्म या Microliths कहा जाता है। उत्तराखण्ड में इस काल के कुछ सूक्ष्माश्म उपकरण जसकोट से प्राप्त हुए हैं।
Q5. उत्तराखण्ड में मध्यपाषाण काल के कुछ सूक्ष्माश्म उपकरण किस स्थान से प्राप्त हुए हैं?
Explanation: उत्तराखण्ड में मध्यपाषाण काल के कुछ उपकरण जसकोट से प्राप्त हुए हैं। मध्यपाषाण काल के उपकरण सामान्यतः छोटे और तीक्ष्ण होते थे तथा इन्हें सूक्ष्माश्म (Microliths) कहा जाता है। इस तथ्य के आधार पर जसकोट का संबंध मध्यपाषाणकालीन उपकरणों से जोड़ा जाता है।
Q6. निम्न में से किस स्थान का संबंध उत्तराखण्ड में निम्न पुरापाषाण काल के मुष्टि कुठार के साक्ष्य से नहीं है?
Explanation: मुष्टि कुठार के साक्ष्य उत्तराखण्ड में कालसी के पास यमुना तट, श्रीनगर के पास अलकनंदा तट, नैनीताल के खुटानी नाला क्षेत्र और अल्मोड़ा की रामगंगा घाटी से मिले हैं। जसकोट से मध्यपाषाण काल के कुछ सूक्ष्माश्म उपकरण मिलने की सूचना है।
Q7. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा उत्तराखण्ड में उच्च पुरापाषाण काल के उपकरणों के संबंध में सही है?
Explanation: उच्च पुरापाषाण काल के प्रमुख उपकरण चमकदार फलक (Blades) और तक्षणियाँ (Burins) थे। दिए गए तथ्यों के अनुसार इनसे संबंधित उपकरण उत्तराखण्ड में अभी तक नहीं मिले हैं। इसलिए उत्तराखण्ड के संदर्भ में इस काल के उपकरणों की अनुपलब्धता महत्वपूर्ण तथ्य है।
Q8. निम्नलिखित में से किस स्थान के पास मुष्टि कुठार के साक्ष्य अलकनंदा नदी तट से संबंधित हैं?
Explanation: उत्तराखण्ड में निम्न पुरापाषाण कालीन मुष्टि कुठार के साक्ष्य विभिन्न नदी घाटी क्षेत्रों से मिले हैं। इनमें श्रीनगर के पास अलकनंदा तट प्रमुख है। अन्य उल्लेखित स्थानों में कालसी के पास यमुना तट, खुटानी नाला और अल्मोड़ा की रामगंगा घाटी शामिल हैं।
Q9. उत्तराखण्ड में अण्डाकार तथा चपटे प्रस्तर-उपकरणों की सूचना क्रमशः किन स्थानों से मिली है, जिनकी प्रामाणिकता अभी सिद्ध नहीं हुई है?
Explanation: चमोली जनपद के भेत एवं ह्यूँण गाँवों से क्रमशः अण्डाकार तथा चपटे प्रस्तर-उपकरण मिलने की सूचना दी गई है। महत्वपूर्ण बात यह है कि इन उपकरणों की प्रामाणिकता अभी सिद्ध नहीं हो पायी है। इसलिए इन्हें प्रमाणित पुरातात्त्विक साक्ष्य के रूप में सावधानी से देखा जाता है।
Q10. पाषाणयुगीन मानव के निवास-स्थलों तथा उत्तराखण्ड में ऐसी गुफाओं के वितरण के संबंध में सही विकल्प चुनिए।
Explanation: पाषाणयुगीन मानव प्राकृतिक परिस्थितियों से बचने और निवास के लिए गुफाओं तथा शैलाश्रयों का उपयोग करता था। उत्तराखण्ड में ऐसी गुफाएँ अधिकांशतः चमोली और अल्मोड़ा जिलों में मिलती हैं। इन स्थलों से पाषाणयुगीन मानव के निवास और जीवन-शैली के अध्ययन में सहायता मिलती है।
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