UTTARAKHAND MARATHON MCQ IN ENGLISH MEDIUM
part1
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परिचय निम्बर के पश्चात उसका पुत्र इष्टगणदेव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। वह कार्तिकेयपुर राजवंश के प्रमुख एवं प्रभावशाली शासकों में माना जाता है। उसके शासनकाल में राज्य के राजनीतिक विस्तार और एकीकरण की प्रक्रिया को गति मिली। उसने स्वयं को ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि से विभूषित किया, जो उसकी राजनीतिक प्रतिष्ठा…
परिचय पदमदेव के पश्चात उसका पुत्र सुभिक्षराज देव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। वह तृतीय परिवार अर्थात् सलोणादित्य वंश का अंतिम शासक तथा कार्तिकेयपुर राजवंश का भी अंतिम शासक माना जाता है। सुभिक्षराज एक दानी एवं धार्मिक शासक था। उसने राज्य की राजधानी कार्तिकेयपुर से हटाकर सुभिक्षपुर में स्थापित की। धार्मिक दृष्टि से वह…
परिचय त्रिभुवनराज के पश्चात कार्तिकेयपुर राज्य की सत्ता निम्बर के हाथों में आई। उसे कार्तिकेयपुर राज्य के द्वितीय राजपरिवार का संस्थापक माना जाता है। निम्बर के संबंध में बागेश्वर शिलालेख तथा पाण्डुकेश्वर ताम्राभिलेख से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। वह एक शक्तिशाली एवं युद्ध-कुशल शासक था। उसके शासनकाल में राज्य के राजनीतिक संबंधों में महत्वपूर्ण…
परिचय पर्वताकार अथवा पौरव वंश उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास की एक महत्वपूर्ण राजवंशीय परंपरा थी, जिसका प्रमुख केंद्र ब्रह्मपुर माना जाता है। इस वंश के इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखीय, साहित्यिक एवं लोक-साहित्यिक स्रोतों का विशेष महत्व है। इनमें तालेश्वर ताम्रपत्र सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष स्रोत हैं, जबकि चीनी यात्री ह्वेनसांग का विवरण, मार्कण्डेय पुराण, बृहत्संहिता…
परिचय सुई शाखा काली-कुमाऊँ क्षेत्र में स्थापित परवर्ती कात्यूरी शाखाओं में से एक थी। इसका केंद्र वर्तमान लोहाघाट के निकट स्थित सुई क्षेत्र में माना जाता है। यद्यपि इस शाखा के इतिहास के संबंध में अन्य कात्यूरी शाखाओं की तुलना में सीमित जानकारी उपलब्ध है, फिर भी स्थानीय परंपरा इसे कात्यूरी वंश की राजनीतिक शाखा…
परिचय इच्छटदेव के पश्चात उसका उत्तराधिकारी देशटदेव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। वह तृतीय राजपरिवार के प्रमुख शासकों में माना जाता है। उसके शासनकाल की जानकारी मुख्यतः ताम्रपत्रों से प्राप्त होती है, जिनसे उसके प्रशासन, धार्मिक गतिविधियों तथा दानशीलता का परिचय मिलता है। देशटदेव ने उच्च राजकीय उपाधियाँ धारण कीं और मंदिरों को भूमि…