बाडाहाट शक्ति स्तम्भ

परिचय

बाड़ाहाट शक्ति स्तंभ उत्तराखंड के प्राचीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोत है। यह उत्तरकाशी में विश्वनाथ मंदिर के सामने स्थित एक विशाल प्राचीन त्रिशूल है। लगभग 21 फीट ऊँचे इस त्रिशूल पर विभिन्न लिपियों में अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जिनसे तत्कालीन राजवंशों, धार्मिक गतिविधियों तथा राजनीतिक घटनाओं की जानकारी मिलती है। विशेष रूप से इसके पीछे उत्कीर्ण तीन संस्कृत श्लोक राजा गणेश्वर और उनके पुत्र श्री गुह से संबंधित हैं, जबकि बाद के काल में अशोकचल्ल की विजय का भी उल्लेख मिलता है।

बाड़ाहाट शक्ति स्तंभ प्रमुख तथ्य

  • बाड़ाहाट शक्ति स्तंभ उत्तरकाशी में विश्वनाथ मंदिर के सामने स्थित है।
  • यह एक प्राचीन त्रिशूल है, जिसकी ऊँचाई लगभग 21 फीट है। इस पर ब्राह्मी एवं शंख लिपि में लेख प्राप्त हुए हैं।
  • त्रिशूल के पीछे की ओर तीन पंक्तियों का संस्कृत लेख उत्तरी ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण है।
  • बाड़ाहाट त्रिशूल पर उत्तरी ब्राह्मी में तीन श्लोक उत्कीर्ण हैं, जिनका समय लगभग 600–700 ईस्वी माना जाता है।
  • त्रिशूल के अग्रभाग पर शंख लिपि का एक लघु लेख भी मिला है, जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
  • प्रथम श्लोक में राजा गणेश्वर द्वारा शिव मंदिर के निर्माण का उल्लेख मिलता है।
  • द्वितीय श्लोक में गणेश्वर के पुत्र श्री गुह का उल्लेख मिलता है।
  • तृतीय श्लोक में राजा गुह द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने का वर्णन किया गया है।
  • अभिलेख में राजा गणेश्वर को कीर्तिवान शासक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उनके संबंध में यह भी उल्लेख मिलता है कि उन्होंने अपना राजपाट छोड़कर कैलाश की ओर प्रस्थान किया।
  • गणेश्वर के पुत्र श्री गुह का उल्लेख भी इन श्लोकों में मिलता है, जिससे उस समय की राजवंशीय परंपरा की जानकारी प्राप्त होती है।
  • गणेश्वर की पहचान के संबंध में विद्वानों द्वारा उन्हें संभावित नागवंशी शासक माना गया है।
  • एटकिंसन और राहुल सांकृत्यायन ने बाड़ाहाट से अशोकचल्ल के अभिलेख के मिलने का उल्लेख किया है।
  • अशोकचल्ल के अभिलेख में उसके द्वारा केदारभूमि की विजय का उल्लेख मिलता है।
  • इस अभिलेख के अनुसार अशोकचल्ल ने 1193 ई. में केदारभूमि पर विजय प्राप्त की थी।

निष्कर्ष

बाड़ाहाट शक्ति स्तंभ उत्तरकाशी के धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व को एक साथ प्रस्तुत करता है। इसके प्राचीन तीन श्लोक गणेश्वर, उनके पुत्र श्री गुह तथा उनके राजनीतिक कार्यों की जानकारी देते हैं, जबकि अशोकचल्ल से संबंधित उल्लेख उत्तराखंड के मध्यकालीन राजनीतिक इतिहास पर प्रकाश डालता है। ब्राह्मी, उत्तरी ब्राह्मी और शंख लिपि से जुड़े लेख इसे विशेष पुरातात्त्विक महत्व प्रदान करते हैं। इस प्रकार, बाड़ाहाट शक्ति स्तंभ उत्तराखंड में प्राचीन राजवंशों, धार्मिक गतिविधियों और मध्यकालीन राजनीतिक विस्तार के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।

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