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उत्तराखंड का प्राचीन इतिहास 1. प्रागैतिहासिक इतिहास – पाषाणयुगीन उपकरण (Palaeoliths)- गुहा – चित्र (Cave Painting)2.आद्य इतिहास- महापाषाणीय ऊखल -सदृश गड़ढे(Cup Marks)- ताम्र-निखात संस्कृति(Copper Hoard Culture)- महापाषाणीय शवाधान (Megalithic Burials)- चित्रित धुसर मृदभाड(PGW)3. वैदिक व पौराणिक काल मे उत्तराखंड 4. कुणिंद शासन काल 5. उत्तराखंड मे शक शासन 6. उत्तराखंड मे कुषाण शासन 7. कुषाणोंत्तर…
कप मार्क्स| Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय उत्तराखंड का प्राचीन इतिहास केवल साहित्यिक एवं ऐतिहासिक स्रोतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहाँ उपलब्ध विभिन्न पुरातात्विक अवशेष भी इस क्षेत्र में मानव की प्राचीन गतिविधियों, सांस्कृतिक विकास तथा धार्मिक-सामाजिक मान्यताओं को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हीं पुरातात्विक साक्ष्यों में कप मार्क्स (Cup Marks) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। विशाल शिलाखंडों…
पाली-द्वाराहाट-लखनपुर शाखा|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय परवर्ती कात्यूरी काल में पाली-द्वाराहाट-लखनपुर शाखा कुमाऊँ की महत्वपूर्ण क्षेत्रीय शाखाओं में से एक थी। इस शाखा का प्रभाव मुख्यतः रामगंगा नदी के तटवर्ती क्षेत्रों में रहा। द्वाराहाट और लखनपुर इसके प्रमुख राजनीतिक केंद्र माने जाते हैं। इस शाखा के शासकों की जानकारी मुख्यतः अभिलेखीय स्रोतों से प्राप्त होती है। अभिलेखों में प्राप्त शासकों…
वसन्तदेव/बसन्तदेव |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय वसन्तदेव को उपलब्ध अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर कत्यूरी वंश का संस्थापक माना जाता है। प्रारम्भ में वह स्वतंत्र शासक न होकर उत्तराखण्ड क्षेत्र में एक सामन्त अथवा रक्षक के रूप में कार्य करता था। कन्नौज के शासक यशोवर्मन की शक्ति कमजोर होने के बाद उसने स्वतंत्र सत्ता स्थापित की तथा जोशीमठ के निकट…
बैजनाथ के परवर्ती कात्यूरी राजा ब्रह्मदेव / वीरदेव |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय ब्रह्मदेव, जिसे लोकगाथाओं में वीरदेव, वीरसिंह या बिरमदेव के नाम से भी जाना जाता है, बैजनाथ की परवर्ती कात्यूरी शाखा के अंतिम चरण का महत्वपूर्ण शासक माना जाता है। राजावलियों में धामदेव के बाद ब्रह्मदेव का उल्लेख मिलता है, जबकि पाली-पछाऊँ वंशावली में उसके संबंध में अलग वंशक्रम प्रस्तुत किया गया है। उसे सामान्यतः…
बैजनाथ के परवर्ती कात्यूरी राजा धामदेव / दुलाशाही / धामदेव दुलाशाही / धामशाही |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय धामदेव बैजनाथ की परवर्ती कात्यूरी शाखा का एक महत्वपूर्ण शासक माना जाता है। विभिन्न वंशावलियों और लोकगाथाओं में उसका उल्लेख अलग-अलग नामों से मिलता है। पाली-पछाऊँ की वंशावली के अनुसार वह जियारानी (मौला देवी) से उत्पन्न प्रीतमदेव का उत्तराधिकारी था। उसके शासनकाल की प्रमुख उपलब्धि डोटी विजय मानी जाती है, जिसके बाद डोटी को…