राजा कीर्तिशाह भाग -1 |Tehri Risayat of Garhwal|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

राजा कीर्तिशाह पंवार/परमार वंश के 58वें तथा टिहरी गढ़वाल रियासत के चौथे राजा थे। वे अल्पायु में ही राजगद्दी पर बैठे और प्रारंभ में उनकी संरक्षिका राजमाता महारानी गुलेरिया ने संरक्षण समिति के माध्यम से शासन का संचालन किया। कीर्तिशाह ने मेयो कॉलेज, अजमेर से शिक्षा प्राप्त की और बाद में टिहरी रियासत के प्रशासन, शिक्षा, न्याय, कृषि, बैंकिंग, विद्युत, नगर व्यवस्था, विज्ञान एवं संचार के क्षेत्र में अनेक महत्वपूर्ण सुधार किए। उनके समय शिक्षा का विशेष विस्तार हुआ और अनेक विद्यालय स्थापित किए गए। वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा आधुनिक संस्थाओं के विकास के लिए प्रसिद्ध रहे। ब्रिटिश सरकार ने भी उन्हें अनेक उपाधियों और सम्मानों से विभूषित किया। उनकी मृत्यु 25 अप्रैल 1913 ई. को हुई।

1. राज्यारोहण एवं राजमाता गुलेरिया का संरक्षक शासन

  • राजा कीर्तिशाह पंवार/परमार वंश के 58वें तथा टिहरी रियासत के चौथे राजा थे।
  • वे अल्पायु में ही राजगद्दी पर बैठे।
  • उनकी संरक्षिका उनकी माता राजमाता महारानी गुलेरिया थीं।
  • राजमाता गुलेरिया ने शासन संचालन के लिए संरक्षण समिति (Council of Regency) का गठन किया।
  • 1887 से 1892 ई. के बीच राजमाता गुलेरिया ने कीर्तिशाह की संरक्षिका के रूप में शासन चलाया।
  • कीर्तिशाह की यूरोप यात्रा के दौरान 1900 ई. में तथा उनके पौत्र नरेंद्र शाह की यूरोप यात्रा के दौरान 1924 ई. में भी महारानी गुलेरिया द्वारा प्रशासिका के रूप में शासन संचालन किए जाने का उल्लेख मिलता है।
  • महारानी गुलेरिया ने अपने आभूषण बेचकर राजधानी में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगामाता एवं रंगनाथ के चार मंदिर तथा एक धर्मशाला बनवाने में योगदान दिया।

2. शिक्षा एवं विवाह

  • कीर्तिशाह ने मेयो कॉलेज, अजमेर से शिक्षा प्राप्त की।
  • 1892 ई. में कीर्तिशाह का विवाह नेपाल के प्रधानमंत्री जंगबहादुर राणा की पौत्री रानी नेपोलिया से हुआ।
  • कीर्तिशाह ने शिक्षा के क्षेत्र में अपने पूर्ववर्ती प्रताप शाह द्वारा शुरू किए गए कार्यों को आगे बढ़ाया।
  • 1891 ई. में टिहरी की मिडिल पाठशाला को उच्चीकृत कर ‘प्रताप हाई स्कूल’ बनाया गया।
  • 1907 ई. में कैंपबेल बोर्डिंग हाउस की स्थापना की गई।
  • 1909 ई. में हीवेट (Hewett) संस्कृत पाठशाला स्थापित की गई।
  • उनके शासनकाल में राज्य में 25 प्राथमिक पाठशालाएँ खोली गईं।
  • उनके शासनकाल में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ और उपलब्ध विवरणों के अनुसार सबसे अधिक विद्यालय स्थापित किए गए।
  • कीर्तिशाह ने श्रीनगर के राजकीय हाई विद्यालय में छात्रावास निर्माण के लिए ₹13,000 का दान दिया।

3. प्रशासनिक एवं राजनीतिक सुधार

  • कीर्तिशाह ने प्रताप शाह द्वारा प्रारंभ किए गए प्रशासनिक सुधारों को आगे बढ़ाया तथा अपनी ओर से भी नए सुधारों का सूत्रपात किया।
  • उन्होंने टिहरी नगरपालिका की स्थापना की।
  • नगर में पेयजल व्यवस्था के लिए वाटर वर्क्स की व्यवस्था की।
  • टिहरी की जनता को पहली बार विद्युत सुविधा उपलब्ध कराने का श्रेय कीर्तिशाह को दिया जाता है।
  • राज्य की प्रशासनिक एवं संस्थागत व्यवस्था को आधुनिक रूप देने के लिए विभिन्न विभागों का विकास किया गया।

4. कृषि, भूमि एवं राजस्व व्यवस्था

  • 1903 ई. में कीर्तिशाह के समय टिहरी रियासत का चौथा भूमि बंदोबस्त किया गया।
  • किसानों के कल्याण के लिए लगभग ₹2 लाख की लागत से कृषि बैंक की स्थापना की गई।
  • इस बैंक का नाम ‘बैंक ऑफ गढ़वाल’ बताया जाता है।
  • कीर्तिशाह ने वनों के ठेके ब्रिटिश सरकार को देने के बजाय स्थानीय ठेकेदारों को प्रोत्साहित करने की नीति अपनाई।
  • गढ़वाली ठेकेदारों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से गंगाराम खंडूरी को देवदार के 1,500 वृक्ष निशुल्क दिए जाने का उल्लेख मिलता है।
  • इस नीति का उद्देश्य स्थानीय लोगों को वन-व्यवस्था एवं ठेका कार्यों में अवसर प्रदान करना था।

5. न्याय एवं विधि व्यवस्था

  • कीर्तिशाह के समय ‘मुल्की रिवाज’ और ‘ताजीरात-ए-हिंद’ पर आधारित विधि-संहिता का निर्माण किया गया।
  • इससे राज्य में प्रचलित स्थानीय रीति-रिवाजों तथा तत्कालीन भारतीय दंड-विधि के आधार पर कानूनी व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया।
  • न्याय व्यवस्था में आधुनिक संस्थागत स्वरूप विकसित करने की दिशा में उनके शासनकाल में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए।

6. विज्ञान एवं तकनीकी विकास

  • कीर्तिशाह को उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण ‘वैज्ञानिक पद्धति का राजा’ भी कहा जाता है।
  • वे किसी कार्य को बिना परीक्षण एवं प्रयोग के करने के पक्ष में नहीं थे।
  • उन्होंने टिहरी में वेधशाला (Observatory) का निर्माण कराया।
  • वेधशाला के लिए विदेशों से दूरबीन (Telescope) तथा अन्य वैज्ञानिक उपकरण मंगाए गए।
  • उनके शासनकाल में विज्ञान एवं आधुनिक तकनीक के प्रति रुचि को प्रोत्साहन मिला।

7. सैन्य एवं संचार विकास

  • कीर्तिशाह ने टिहरी की सेना का पुनर्गठन किया।
  • टिहरी में माइनर्स एवं सेपर्स फोर्स की स्थापना की गई।
  • उन्होंने यमुना नदी पर हिबेट ब्रिज (Hewett Bridge) का निर्माण कराया।
  • आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था के लिए संचार एवं परिवहन सुविधाओं के विकास पर भी ध्यान दिया गया।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *