राजा कीर्तिचंद |Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

राजा कीर्तिचंद चंद वंश के प्रमुख विजेता, पराक्रमी एवं साम्राज्य-विस्तारक शासकों में से एक थे। वे राजा रत्नचंद के पुत्र और उनके उत्तराधिकारी थे। उनके शासनकाल में चंद सत्ता ने सैन्य अभियानों के माध्यम से कुमाऊँ के विभिन्न क्षेत्रों पर अपना प्रभाव स्थापित किया। डोटी के विद्रोह को दबाने से लेकर बारामंडल, विसौद, खगमराकोट, स्यूनरा, पाली-पछाऊँ और फल्दाकोट आदि क्षेत्रों की विजय तक, उनकी नीतियों ने चंद राज्य को काफी विस्तृत बनाया। वे गढ़वाल पर आक्रमण करने वाले प्रथम चंद राजा माने जाते हैं। साथ ही, धार्मिक दृष्टि से वे नाथ संप्रदाय के अनुयायी थे और उनके गुरु नागनाथ थे।

मुख्य तथ्य

  • कीर्तिचंद, रत्नचंद के पुत्र थे और रत्नचंद के बाद चंद राज्य के राजा बने।
  • वे अपने पूर्वजों की तरह वीर एवं पराक्रमी थे तथा उन्होंने चंद राज्य के क्षेत्र का विस्तार किया।
  • कीर्तिचंद के शासनकाल में डोटी ने पुनः स्वतंत्र होने का प्रयास किया।
  • डोटी ने भारी सेना के साथ चंद राज्य पर आक्रमण करने के लिए काली नदी के किनारे घेरा डाल दिया।
  • कीर्तिचंद ने डोटी के विद्रोह को दबाने के लिए एक शक्तिशाली सेना भेजी और डोटी को पुनः चंदों के अधीन कर लिया।
  • कीर्तिचंद ने बारामंडल और विसौद पर विजय प्राप्त की। इन क्षेत्रों में कत्यूरी वंशीय राजाओं का शासन था।
  • उन्होंने खगमराकोट और स्यूनरा को भी अपने राज्य में सम्मिलित कर लिया।
  • बारामंडल, विसौद, खगमराकोट और स्यूनरा पर अधिकार के बाद कीर्तिचंद की सेना ने कैंडोरा-बौरारो की ओर अभियान किया।
  • चंद सेना ने कैंडोरा-बौरारो में भयंकर युद्ध किया और क्षेत्र को उजाड़कर वहाँ काली कुमाऊँ के अपने समर्थकों को बसाया।
  • इसके बाद कीर्तिचंद ने पाली-पछाऊँ पर आक्रमण किया, जहाँ कत्यूरी वंश का वंशज शासन कर रहा था।
  • पाली-पछाऊँ के शासक ने कीर्तिचंद से संधि कर चंदों की अधीनता स्वीकार कर ली।
  • पाली-पछाऊँ की सफलता के बाद कीर्तिचंद ने फल्दाकोट पर आक्रमण किया, जहाँ खाती जाति के राजा का शासन था।
  • फल्दाकोट की सेना ने बहादुरी से युद्ध किया, लेकिन चंद सेना के सामने पराजित हुई और खाती राजा युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुआ।
  • फल्दाकोट पर विजय के बाद वहाँ चंदों का अधिपत्य स्थापित हो गया।
  • कीर्तिचंद ने इसके बाद कोटा और कोटाली पर भी अधिकार स्थापित किया।
  • उनकी विजयों के परिणामस्वरूप चंद राज्य में कुमाऊँ का अधिकांश भाग सम्मिलित हो चुका था।
  • कीर्तिचंद ने तराई में जसपुर के निकट ‘कीर्तिपुर’ नामक नगर की स्थापना की।
  • कीर्तिचंद को गढ़वाल पर आक्रमण करने वाला प्रथम चंद राजा माना जाता है।
  • उन्होंने गढ़वाल के शासक अजयपाल को पराजित किया।
  • कीर्तिचंद को ‘कुँवर’ के उपनाम से भी जाना जाता है।
  • उन्होंने पौराणिक वृद्ध केदार का निर्माण कार्य पूर्ण कराया।
  • उन्होंने सोमनाथेश्वर महादेव का पुनर्निर्माण भी करवाया।
  • कीर्तिचंद के गुरु नागनाथ थे।
  • वे नाथ संप्रदाय के अनुयायी थे।
  • कीर्तिचंद के बाद उनके पुत्र प्रताप चंद चंद राज्य की गद्दी पर बैठे।
  • प्रताप चंद के शासनकाल में कोई विशेष महत्वपूर्ण घटना नहीं हुई। उनका अधिकांश समय अपने पिता द्वारा विस्तारित साम्राज्य को व्यवस्थित एवं सुदृढ़ करने में व्यतीत हुआ।
  • प्रताप चंद के बाद क्रमशः ताराचंद, माणिक चंद, कल्याण चंद (तृतीय), पुनि चंद/पूर्ण चंद तथा भीष्म चंद चंद वंश की गद्दी पर बैठे।
  • इन शासकों के काल में चंद राज्य ने कोई विशेष महत्वपूर्ण राजनीतिक उन्नति नहीं की।

निष्कर्ष

कीर्तिचंद का शासन चंद वंश के इतिहास में सैन्य विस्तार और राजनीतिक प्रभुत्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण चरण माना जाता है। उन्होंने डोटी के विद्रोह को दबाकर चंदों की सत्ता को पुनः मजबूत किया और बारामंडल, विसौद, खगमराकोट, स्यूनरा, कैंडोरा-बौरारो, पाली-पछाऊँ तथा फल्दाकोट आदि क्षेत्रों में चंद प्रभाव का विस्तार किया। उनकी विजयों से कुमाऊँ का अधिकांश भाग चंद राज्य के अधीन आ गया। इसके अतिरिक्त उन्होंने तराई में कीर्तिपुर नगर बसाया तथा गढ़वाल पर आक्रमण कर अजयपाल को पराजित किया। धार्मिक दृष्टि से भी उनका शासन महत्वपूर्ण था; वे नाथ संप्रदाय के अनुयायी थे और उनके गुरु नागनाथ थे। वृद्ध केदार के निर्माण तथा सोमनाथेश्वर महादेव के पुनर्निर्माण से उनकी धार्मिक गतिविधियों का पता चलता है। इस प्रकार कीर्तिचंद को चंद वंश के महत्वपूर्ण विस्तारवादी एवं पराक्रमी शासकों में स्थान दिया जाता है।

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