पर्वताकार या पौरव वंश के इतिहास के स्रोत |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

पर्वताकार अथवा पौरव वंश उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास की एक महत्वपूर्ण राजवंशीय परंपरा थी, जिसका प्रमुख केंद्र ब्रह्मपुर माना जाता है। इस वंश के इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखीय, साहित्यिक एवं लोक-साहित्यिक स्रोतों का विशेष महत्व है। इनमें तालेश्वर ताम्रपत्र सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यक्ष स्रोत हैं, जबकि चीनी यात्री ह्वेनसांग का विवरण, मार्कण्डेय पुराण, बृहत्संहिता तथा कत्यूरी जागर सहायक स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण हैं। इन स्रोतों से पौरव वंश के शासकों, राजधानी, राज्य-क्षेत्र तथा प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी प्राप्त होती है।

प्रमुख स्रोत

1. तालेश्वर ताम्रपत्र

  • अल्मोड़ा जनपद के तालेश्वर नामक स्थान से ताम्र एवं अष्टधातु के अभिलेख प्राप्त हुए हैं, जिन्हें पौरव वंश से संबंधित माना जाता है।
  • इन अभिलेखों में पौरव वंश के शासकों के नाम तथा उनकी प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
  • ये अभिलेख 1915 ई. में प्राप्त हुए थे तथा इनका संपादन वाई. आर. गुप्ते ने किया।
  • अभिलेखों में विष्णुवर्मन प्रथम, वृषवर्मन, श्री अग्निवर्मन, धुतिवर्मन (द्विजवर्मन) तथा विष्णुवर्मन द्वितीय के नाम प्राप्त होते हैं।
  • विष्णुवर्मन प्रथम को पौरव वंश का संस्थापक माना जाता है।
  • तालेश्वर ताम्रपत्रों में पौरव शासकों के राज्य को ‘पर्वताकार राज्य’ तथा इसकी राजधानी को ब्रह्मपुर बताया गया है।
  • इन अभिलेखों में ब्राह्मी लिपि का प्रयोग हुआ है।
  • तालेश्वर ताम्रपत्र पौरव वंश की राजकीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था के अध्ययन का प्रमुख स्रोत हैं

2. यात्रा वृतांत(ह्वेनसांग का विवरण)

  • चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपने यात्रा-विवरण में ब्रह्मपुर का उल्लेख किया है।
  • उसने ब्रह्मपुर को ‘पो-लि-हि-मो-पु-लो’ नाम से वर्णित किया है।
  • उसके अनुसार यह राज्य 667 मील से अधिक परिधि में विस्तृत तथा चारों ओर से पर्वतों से घिरा हुआ था
  • इसी पर्वतीय भौगोलिक स्थिति के कारण इसे पर्वताकार राज्य कहे जाने की संभावना व्यक्त की जाती है।
  • ब्रह्मपुर के संबंध में ह्वेनसांग का विवरण पौरव राज्य के भौगोलिक विस्तार को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत है।

3. अन्य साहित्यिक स्रोत

  • ब्रह्मपुर जनपद का उल्लेख मार्कण्डेय पुराण एवं बृहत्संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी मिलता है। इसके अतिरिक्त यूनानी इतिहासकार हेरोडोटस के विवरण में भी इस क्षेत्र से संबंधित संकेत प्राप्त होते हैं। हालांकि, ब्रह्मपुर के संबंध में ह्वेनसांग का वृत्तांत सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं विस्तृत स्रोत माना जाता है।

4. कत्यूरी जागर

  • कत्यूरी जागर पौरव वंश के इतिहास का एक महत्वपूर्ण लोक-साहित्यिक स्रोत माना जाता है।
  • जागर परंपरा के माध्यम से उत्तराखण्ड की प्राचीन राजवंशीय परंपराओं और राजनीतिक स्मृतियों की जानकारी प्राप्त होती है।
  • यद्यपि लोक-साहित्यिक स्रोतों का उपयोग अन्य अभिलेखीय एवं साहित्यिक साक्ष्यों के साथ सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

पर्वताकार या पौरव वंश के इतिहास के पुनर्निर्माण में तालेश्वर ताम्रपत्र सर्वाधिक महत्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोत हैं। इनके साथ ह्वेनसांग का विवरण, मार्कण्डेय पुराण, बृहत्संहिता तथा कत्यूरी जागर जैसे स्रोत इस वंश की राजनीतिक एवं भौगोलिक पृष्ठभूमि को समझने में सहायता करते हैं। विशेष रूप से ब्रह्मपुर को राजधानी तथा पर्वताकार राज्य के उल्लेख से पौरव सत्ता की पहचान मजबूत होती है। इस प्रकार अभिलेखीय, साहित्यिक और लोक-साहित्यिक स्रोतों के संयुक्त अध्ययन से उत्तराखण्ड के इस महत्वपूर्ण प्राचीन राजवंश के इतिहास का पुनर्निर्माण संभव होता है।

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