परमार वंश की स्थापना तिथि के संबंध में मतभेद|Parmar Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

गढ़वाल में पंवार/परमार वंश की स्थापना के संबंध में राजा कनकपाल के राज्यारोहण की तिथि एक महत्वपूर्ण एवं विवादित विषय है। विभिन्न इतिहासकारों, वंशावलियों तथा साहित्यिक स्रोतों में कनकपाल के राज्यारोहण को लेकर अलग-अलग मत प्राप्त होते हैं। कुछ विद्वानों ने 888 ई. को परमार वंश की स्थापना का समय माना है, जबकि अन्य विद्वानों ने 688 ई. को अधिक स्वीकार्य माना है। वहीं कुछ इतिहासकारों ने कनकपाल के अस्तित्व और उन्हें परमार वंश का आदि पुरुष मानने पर भी प्रश्न उठाए हैं। उपलब्ध विभिन्न प्रमाणों—विशेषकर बैकेट की वंशावली, चाँदपुर के प्राचीन लेख तथा साहित्यिक स्रोतों—के आधार पर 688 ई. की तिथि को अधिक प्रामाणिक मानने का मत भी प्रस्तुत किया गया है।

प्रमुख विद्वानों के मत

  • हरिकृष्ण रतूड़ी — हरिकृष्ण रतूड़ी ने अपनी पुस्तक ‘गढ़वाल का इतिहास’ में परमार वंश की नींव 888 ई. में मानी है। किंतु अपनी दूसरी पुस्तक ‘गढ़वाल वर्णन’ में उन्होंने स्वयं पूर्व मत का खंडन करते हुए स्थापना की तिथि 688 ई. स्वीकार की है।
  • भक्त दर्शन — भक्त दर्शन ने भी अपनी रचनाओं में परमार वंश की स्थापना तिथि 888 ई. मानी है।
  • डॉ. शिव प्रसाद डबराल — डॉ. शिव प्रसाद डबराल ने कनकपाल के राज्यारोहण अथवा परमार वंश की स्थापना की कोई निश्चित तिथि निर्धारित नहीं की है।
  • राहुल सांकृत्यायन — राहुल सांकृत्यायन ने कनकपाल के ऐतिहासिक अस्तित्व पर ही संदेह व्यक्त किया है। उनके अनुसार परमार वंश का आदि पुरुष अजयपाल को माना जाना चाहिए।
  • बैकेट का मत — प्रसिद्ध विद्वान बैकेट के अनुसार कनकपाल का निधन संवत् 756 में हुआ था और उन्होंने 11 वर्ष तक शासन किया। इस आधार पर कनकपाल का राज्यारोहण संवत् 745, अर्थात् 688 ई. में माना जाता है।
  • चाँदपुर का प्राचीन लेख — चाँदपुर से प्राप्त प्राचीन लेख को भी 688 ई. की तिथि के समर्थन में महत्वपूर्ण प्रमाण माना जाता है। इससे 688 ई. को परमार वंश की स्थापना के लिए अधिक स्वीकार्य तिथि मानने में सहायता मिलती है।
  • कवि देवराज — कवि देवराज ने अपने ग्रंथ ‘गढ़वाल राज्ञा वंशावली’ में भी कनकपाल के राज्यारोहण की तिथि संवत् 745 अर्थात् 688 ई. मानी है।
  • बालकृष्ण भट्ट शास्त्री — श्री बालकृष्ण भट्ट शास्त्री ने अपनी पुस्तक ‘गढ़वाल जाति प्रकाश’ में भी संवत् 745 (688 ई.) को कनकपाल के राज्यारोहण की तिथि स्वीकार किया है।

निष्कर्ष

परमार वंश की स्थापना तिथि को लेकर इतिहासकारों में मतभेद मुख्यतः 688 ई. और 888 ई. के बीच दिखाई देता है। हरिकृष्ण रतूड़ी और भक्त दर्शन जैसे विद्वानों ने 888 ई. का समर्थन किया है, जबकि बैकेट, कवि देवराज तथा बालकृष्ण भट्ट शास्त्री के मत 688 ई. (संवत् 745) के पक्ष में जाते हैं। चाँदपुर के प्राचीन लेख को भी इस तिथि के समर्थन में महत्वपूर्ण माना जाता है। दूसरी ओर, डॉ. शिव प्रसाद डबराल ने निश्चित तिथि नहीं दी तथा राहुल सांकृत्यायन ने कनकपाल के अस्तित्व और उन्हें आदि पुरुष मानने पर ही प्रश्न उठाया। इसलिए उपलब्ध प्रमाणों के तुलनात्मक अध्ययन के आधार पर 688 ई. को परमार वंश की स्थापना/कनकपाल के राज्यारोहण की अधिक स्वीकार्य तिथि माना जा सकता है, यद्यपि विषय पूरी तरह निर्विवाद नहीं है।

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