गांधी जी की उत्तराखंड यात्रा
परिचय
महात्मा गांधी की उत्तराखंड यात्राओं का संबंध यहाँ के राष्ट्रीय आंदोलन, सामाजिक जागृति और जनसंपर्क से रहा। उन्होंने पर्वतीय क्षेत्रों की प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ स्थानीय जनता की समस्याओं को भी निकट से देखा। हरिद्वार, ऋषिकेश, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, कौसानी और बागेश्वर की यात्राओं के दौरान गांधी जी ने अनेक प्रमुख व्यक्तियों से मुलाकात की तथा जनसभाओं को संबोधित किया। जून 1929 की कुमाऊँ यात्रा विशेष रूप से उल्लेखनीय है, जिसके दौरान उन्होंने कौसानी में प्रवास किया और भगवद्गीता पर आधारित अपनी प्रसिद्ध कृति अनाशक्ति योग की भूमिका लिखी।
गांधी जी की गढ़वाल यात्रा
- सन 1915 में हरिद्वार में कुंभ का मेला लगा था
- महात्मा गांधी को मुंशीराम (स्वामी श्रद्धानंद) से मिलने की काफी इच्छा थी इसलिए अप्रैल 1915 में महात्मा गांधी ने मुंशीराम से मुलाकात की।इसके बाद 1915 में ही ऋषिकेश में भी गये।
- गांधीजी को महात्मा नाम से पहली बार संबोधन मुंशीराम ने ही किया था। बाद में रविंद्र नाथ टैगोर ने महात्मा की मानद उपाधि देकर गांधी जी को सम्मानित किया।
- 1916 में महात्मा गांधी जी ने देहरादून की यात्रा की थी।
गांधी जी की कुमाऊं यात्रा
- 14 जून 1929 में गांधी जी ने पहली बार कुमाऊं का दौरा किया था। यात्रा में उनके साथ पंडित जवाहरलाल नेहरू,देवदास गांधी, प्यारेलाल आदि लोग सम्मिलित थे
- 14 जून 1929 को गांधी जी हल्द्वानी पहुंचे वह वहां से नैनीताल के लिए रवाना हुए। और वहां भी जनता को संबोधित किया
- गांधी जी के रहने का प्रबंध नैनीताल से लगभग 4 किलोमीटर दूर ताकुला नामक सुंदर पर्वतीय ग्राम में किया गया( 1931 में गांधी जी दूसरे बार नैनीताल आए और पुनः में इसी भवन में ठहरे )। गांधी जी ने ताकुला में एक भवन का शिलान्यास भी किया जिसका नाम ‘गांधी मंदिर’ रखा गया।
- 18 जून 1929 को गांधी जी अल्मोड़ा पहुंचे और यहां पर उन्होंने विशाल जन समूह को संबोधित किया। तत्कालीन म्युनिसिपल बोर्ड के अध्यक्ष ओकले ने उनके सम्मान में हिंदी में मानपत्र पढा।
- अल्मोड़ा में गांधीजी चार दिन तक रहे।इस दौरान वे यहां पर एक अंग्रेज साधु रोनाल्ड निक्सन से भी मिले।- इसके बाद गांधी जी कौसानी व बागेश्वर जाते हैं।
- गांधी जी की कुमाऊं यात्रा पर हिमांशु जोशी ने लिखा है ‘हिमालय से मिलने हिमालय आया’।
कुमाऊँ मे गांधी जी कौसानी व बागेश्वर यात्रा
- कौसानी में अपने 12 दिवसीय प्रवास के दौरान गांधी जी ने अनाशक्ति योग नाम से गीता की भूमिका लिखी।
- अनाशक्ति योग की गांधी जी ने मूल रूप से गुजराती में लिखा था।बाद में इसका हिंदी रूपांतरण सोमेश्वर पुरोहित ने किया और नवजीवन प्रकाश मंदिर अहमदाबाद से प्रकाशित किया।
- गांधी जी ने जहां पर अनाशक्ति योग की प्रस्तावना लिखी वहां पर अनाशक्ति आश्रम है।
- कौसानी की खूबसूरती से प्रभावित होकर गांधी जी ने यंग इंडिया के अपने एक लेख में कौसानी को ‘भारत का स्विट्जरलैंड’ कहां।
- बागेश्वर में विक्टर मोहन जोशी ने स्वराज मंदिर का निर्माण करवाया एवं गांधी जी के हाथों इस मंदिर का शिलान्यास किया गया (जून 1929)
- गांधी जी विक्टर मोहन जोशी से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने यंग इंडिया में विक्टर मोहन जोशी को ‘ईसाई समाज का उत्कृष्ट पुष्प’ कहकर संबोधित किया।
- 11 जुलाई 1929 को गांधी जी ने यंग इंडिया में लिखा “अल्मोड़ा के पर्वतीय क्षेत्र में तीन सप्ताह के लगभग रहने के पश्चात मुझे अत्यधिक आश्चर्य होता है कि हमारे यहां के लोग स्वास्थ्य लाभ के लिए यूरोप क्यों जाते हैं”।
- सोमेश्वर (अल्मोड़ा) के नजदीक चनौदा नामक स्थान पर 1937 में शांतिलाल त्रिवेदी के प्रयासों से गांधी आश्रम की स्थापना की गई।
निष्कर्ष
महात्मा गांधी की उत्तराखंड यात्राओं ने क्षेत्र के राष्ट्रीय आंदोलन और सामाजिक जागृति को नई प्रेरणा दी। विशेष रूप से 1929 की कुमाऊँ यात्रा के दौरान उनके जनसंपर्क, कौसानी में अनाशक्ति योग की रचना तथा विक्टर मोहन जोशी जैसे स्थानीय नेताओं से संपर्क का ऐतिहासिक महत्व है। गांधी जी के प्रवास और विचारों ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय स्वतंत्रता आंदोलन की व्यापक धारा से जोड़ने में योगदान दिया।