उत्तराखंड प्राग ऐतिहासिक काल | Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

प्रागैतिहासिक काल मानव इतिहास का वह प्रारंभिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है, जिसके बारे में समकालीन लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं हैं। इस काल में मनुष्य ने अभी लेखन-कला का विकास नहीं किया था, इसलिए उसके जीवन और गतिविधियों की जानकारी पत्थर के औजारों, हड्डियों, गुफा एवं शैलचित्रों, मिट्टी के बर्तनों तथा अन्य पुरातात्त्विक अवशेषों के अध्ययन से प्राप्त होती है। मानव सभ्यता के शिकार एवं भोजन-संग्रह से लेकर कृषि और स्थायी जीवन की ओर संक्रमण को समझने में इस काल का विशेष महत्व है।

प्रागैतिहासिक काल प्रमुख विशेषताये

  • प्रागैतिहासिक काल की सबसे प्रमुख विशेषता लेखन-कला और व्यवस्थित लिखित स्रोतों का अभाव है।
  • इस काल के इतिहास का पुनर्निर्माण मुख्यतः पत्थर के औजार, हड्डियाँ, पशु-अवशेष, गुफा-चित्र और आवासीय अवशेषों के आधार पर किया जाता है।
  • प्रारंभिक मानव का जीवन मुख्यतः शिकार, मछली पकड़ने और भोजन-संग्रह पर निर्भर था।
  • प्रारंभिक मानव ने दैनिक आवश्यकताओं और शिकार के लिए पत्थर से विभिन्न प्रकार के औजार बनाए।
  • मानव ने रहने और प्राकृतिक परिस्थितियों से बचने के लिए गुफाओं एवं शैलाश्रयों का उपयोग किया।
  • गुफाओं और शैलाश्रयों में मिले शैलचित्र तत्कालीन मानव की कला एवं जीवन-शैली के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
  • भारतीय संदर्भ में प्रागैतिहासिक काल को सामान्यतः पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण चरणों में समझा जाता है।
  • पुरापाषाण काल में मानव मुख्यतः शिकार एवं भोजन-संग्रह पर निर्भर था और प्रारंभिक पत्थर के औजारों का प्रयोग करता था।
  • मध्यपाषाण काल में छोटे पत्थर के औजारों, जिन्हें माइक्रोलिथ कहा जाता है, का व्यापक प्रयोग हुआ
  • नवपाषाण काल में कृषि और पशुपालन के विकास के साथ मानव भोजन-संग्रह से भोजन-उत्पादन की ओर बढ़ा।
  • कृषि और पशुपालन के विकास ने मानव को स्थायी एवं अर्द्ध-स्थायी बस्तियाँ बसाने की दिशा में आगे बढ़ाया।
  • नवपाषाण काल में घिसे और चमकाए गए पत्थर के औजारों का प्रयोग विकसित हुआ।
  • प्रागैतिहासिक काल के साक्ष्यों से प्रारंभिक मानव के आहार, आवास, तकनीक, कला और जीवन-शैली की जानकारी प्राप्त होती है।
  • इस काल में मानव जीवन धीरे-धीरे शिकार एवं भोजन-संग्रह से कृषि, पशुपालन और स्थायी जीवन की ओर परिवर्तित हुआ।

निष्कर्ष

प्रागैतिहासिक काल मानव सभ्यता के विकास की प्रारंभिक आधारशिला है। यद्यपि इस काल के लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी पत्थर के औजार, शैलचित्र, हड्डियाँ और अन्य पुरातात्त्विक अवशेष प्रारंभिक मानव के जीवन की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं। शिकार एवं भोजन-संग्रह से कृषि, पशुपालन और स्थायी जीवन की ओर बढ़ता मानव इस काल की सबसे महत्वपूर्ण विकास-यात्रा को दर्शाता है।

उत्तराखंड प्राग ऐतिहासिक काल

उत्तराखंड के गढ़वाल एवं कुमाऊँ की पहाड़ियों तथा उनके पाद-प्रदेशों में प्रागैतिहासिक अनुसंधान की दिशा में अभी तक अपेक्षाकृत कम कार्य हुआ है। इसका प्रमुख कारण इस क्षेत्र की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियाँ, ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र तथा सीमित पुरातात्त्विक अन्वेषण रहे हैं। फिर भी, विगत दशकों में किए गए विभिन्न पुरातात्त्विक सर्वेक्षणों एवं अध्ययनों से उत्तराखंड के मध्य हिमालयी क्षेत्र में प्रागैतिहासिक मानव की उपस्थिति और उसकी गतिविधियों के महत्वपूर्ण प्रमाण प्राप्त हुए हैं। ये प्रमाण इस बात की ओर संकेत करते हैं कि प्राचीन मानव ने हिमालय के इन क्षेत्रों में निवास करने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग किया तथा अपनी जीवन-शैली और कलात्मक अभिव्यक्ति के चिह्न छोड़े। उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक मानव की गतिविधियों के प्रमुख पुरातात्त्विक प्रमाण निम्नलिखित रूपों में प्राप्त हुए हैं—

  • पाषाणयुगीन उपकरण (Palaeoliths) — विभिन्न क्षेत्रों से प्राप्त पत्थर के उपकरण प्रागैतिहासिक मानव की तकनीकी दक्षता, शिकार एवं जीवन-निर्वाह की गतिविधियों तथा उसके पर्यावरण के साथ संबंध को समझने में महत्वपूर्ण प्रमाण प्रदान करते हैं।
  • गुहा-चित्र (Cave Paintings) — गुफाओं एवं शैलाश्रयों में प्राप्त चित्र प्रागैतिहासिक मानव की कलात्मक अभिव्यक्ति, सामाजिक जीवन, शिकार की गतिविधियों तथा तत्कालीन प्राकृतिक परिवेश की जानकारी के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

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Q1. प्रागैतिहासिक काल की पहचान के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

1. इस काल के समकालीन व्यवस्थित लिखित स्रोत सामान्यतः उपलब्ध नहीं हैं।
2. इस काल के अध्ययन में पुरातात्त्विक अवशेषों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

उपरोक्त में से कौन-सा/से कथन सही है?
Explanation: प्रागैतिहासिक काल की प्रमुख विशेषता समकालीन व्यवस्थित लिखित स्रोतों का अभाव है। इसलिए इस काल का पुनर्निर्माण मुख्यतः पत्थर के औजार, हड्डियाँ, पशु-अवशेष, गुफा-चित्र, शैलाश्रय और आवासीय अवशेष जैसे पुरातात्त्विक प्रमाणों के आधार पर किया जाता है।
Q2. प्रारंभिक मानव के जीवन-निर्वाह का प्रमुख आधार क्या था?
Explanation: प्रागैतिहासिक काल के प्रारंभिक चरणों में मानव का जीवन मुख्यतः प्रकृति पर निर्भर था। वह शिकार करता, मछली पकड़ता और विभिन्न प्राकृतिक स्रोतों से भोजन एकत्र करता था। कृषि और पशुपालन के विकसित होने से पहले भोजन-संग्रह उसकी जीवन-निर्वाह व्यवस्था का प्रमुख आधार था।
Q3. प्रागैतिहासिक मानव द्वारा पत्थर के औजार बनाए जाने का प्रमुख उद्देश्य क्या था?
Explanation: प्रारंभिक मानव ने अपनी आवश्यकताओं के अनुसार पत्थर से विभिन्न प्रकार के औजार विकसित किए। इनका प्रयोग शिकार, काटने, छीलने, तोड़ने और अन्य दैनिक कार्यों में किया जाता था। इसलिए पत्थर के औजार प्रागैतिहासिक मानव की तकनीकी क्षमता और जीवन-निर्वाह का महत्वपूर्ण प्रमाण हैं।
Q4. गुफाओं और शैलाश्रयों में प्राप्त शैलचित्रों का प्रागैतिहासिक अध्ययन में क्या महत्व है?
Explanation: शैलचित्र प्रागैतिहासिक मानव की रचनात्मक अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। इनमें तत्कालीन मानव की गतिविधियों, प्रकृति से संबंध और जीवन-शैली की झलक मिलती है। चूँकि व्यवस्थित लिखित स्रोत उपलब्ध नहीं थे, इसलिए ऐसे चित्र उस समय के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को समझने में विशेष महत्व रखते हैं।
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Q5. भारतीय संदर्भ में प्रागैतिहासिक काल को सामान्यतः किन चरणों में समझा जाता है?
Explanation: भारतीय प्रागैतिहासिक अध्ययन में पुरापाषाण, मध्यपाषाण और नवपाषाण प्रमुख चरण माने जाते हैं। इन चरणों में औजारों की तकनीक, भोजन प्राप्त करने के तरीके और जीवन-शैली में क्रमिक परिवर्तन दिखाई देता है। विशेष रूप से नवपाषाण में कृषि और पशुपालन के विकास ने मानव जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाया।
Q6. मध्यपाषाण काल की प्रमुख तकनीकी विशेषता निम्नलिखित में से कौन-सी थी?
Explanation: मध्यपाषाण काल में छोटे आकार के पत्थर के औजारों का व्यापक उपयोग हुआ, जिन्हें माइक्रोलिथ कहा जाता है। ये औजार पहले के अपेक्षाकृत बड़े पत्थर के उपकरणों की तुलना में छोटे और अधिक विशिष्ट थे। माइक्रोलिथ का प्रयोग शिकार सहित विभिन्न दैनिक गतिविधियों में किया जाता था।
Q7. निम्नलिखित में से कौन-सा परिवर्तन नवपाषाण काल की विशेषताओं से सबसे अधिक संबंधित है?
Explanation: नवपाषाण काल में कृषि और पशुपालन के विकास ने मानव को प्राकृतिक रूप से उपलब्ध भोजन एकत्र करने के साथ-साथ स्वयं भोजन उत्पन्न करने की दिशा में आगे बढ़ाया। इस परिवर्तन ने मानव की अर्थव्यवस्था और जीवन-शैली को प्रभावित किया तथा स्थायी एवं अर्द्ध-स्थायी बस्तियों के विकास का आधार तैयार किया।
Q8. नवपाषाण काल के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए—

1. कृषि और पशुपालन के विकास से मानव स्थायी एवं अर्द्ध-स्थायी बस्तियों की ओर बढ़ा।
2. इस काल में घिसे और चमकाए गए पत्थर के औजारों का प्रयोग विकसित हुआ।

सही उत्तर चुनिए—
Explanation: नवपाषाण काल में कृषि और पशुपालन के विकास ने मानव को एक स्थान पर अपेक्षाकृत स्थिर जीवन अपनाने में सहायता की। इसी काल में पत्थर के औजारों को घिसकर और चमकाकर अधिक उपयोगी बनाया जाने लगा। इसलिए यह काल आर्थिक और तकनीकी दोनों परिवर्तनों से जुड़ा है।
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Q9. प्रागैतिहासिक काल के पुरातात्त्विक साक्ष्यों से निम्नलिखित में से किन पहलुओं की जानकारी प्राप्त की जा सकती है?
Explanation: प्रागैतिहासिक काल में व्यवस्थित लिखित अभिलेखों की कमी के कारण पुरातात्त्विक साक्ष्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। औजार, हड्डियाँ, पशु-अवशेष, शैलचित्र और आवासीय अवशेषों का अध्ययन करके मानव के आहार, आवास, तकनीकी विकास, कला तथा दैनिक जीवन-शैली के बारे में जानकारी प्राप्त की जाती है।
Q10. प्रागैतिहासिक काल में मानव जीवन में हुए व्यापक परिवर्तन का सही क्रम कौन-सा है?
Explanation: प्रागैतिहासिक मानव के जीवन में धीरे-धीरे महत्वपूर्ण आर्थिक परिवर्तन आया। प्रारंभ में वह शिकार, मछली पकड़ने और भोजन-संग्रह पर निर्भर था। बाद में कृषि और पशुपालन विकसित हुए, जिससे भोजन-उत्पादन बढ़ा और मानव स्थायी तथा अर्द्ध-स्थायी बस्तियाँ बसाने की दिशा में आगे बढ़ा।
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