तालेश्वर ताम्रपात्र
परिचय
तालेश्वर ताम्रपत्र उत्तराखंड के प्राचीन इतिहास के महत्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोतों में से हैं। ये अल्मोड़ा जनपद के तालेश्वर नामक स्थान से प्राप्त हुए थे और इनका संबंध पौरव वंश से है। इन अभिलेखों से पौरव शासकों की वंशावली के साथ-साथ उनकी प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। अभिलेखों में प्रयुक्त संस्कृत भाषा एवं गुप्त ब्राह्मी लिपि तथा उनसे जुड़ी अंडाकार मुद्राएँ इनकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। इनके आधार पर पौरव वंश के छठी से आठवीं शताब्दी ईस्वी के मध्य शासन करने की संभावना व्यक्त की गई है।
तालेश्वर ताम्रपात्र
- तालेश्वर नामक स्थान से ताम्र एवं अष्टधातु के अभिलेख प्राप्त हुए हैं। तालेश्वर वर्तमान अल्मोड़ा जनपद में स्थित है।
- तालेश्वर से प्राप्त ये अभिलेख 1915 ई. में प्राप्त हुए थे।
- इन अभिलेखों के संपादक वाई. आर. गुप्ते ने इन्हें छठी से आठवीं शताब्दी ईस्वी के मध्य का माना है। इसी आधार पर यह मत प्रस्तुत किया जाता है कि पौरव वंश ने छठी से आठवीं शताब्दी ईस्वी के मध्य शासन किया होगा।
- द्विजवर्मन (द्युतिवर्मन) का अभिलेख वृषताप/मिश्र धातु के लेख के रूप में तथा विष्णुवर्मन का अभिलेख ताम्रशासन के रूप में प्राप्त हुआ है।
- दोनों ताम्रपत्रों के साथ एक-एक अंडाकार मुद्रा जुड़ी हुई है।
- इन अंडाकार मुद्राओं पर पसरे हुए वृषभ, मकर तथा गरुड़ की आकृतियाँ अंकित हैं।
- तालेश्वर से प्राप्त अभिलेखों में संस्कृत भाषा तथा गुप्त ब्राह्मी लिपि का प्रयोग किया गया है।
- ये अभिलेख पौरव वंश से संबंधित हैं।
- तालेश्वर अभिलेखों में पौरव वंश के पाँच राजाओं का उल्लेख मिलता है।
- इन अभिलेखों से पौरव वंश की प्रशासनिक व्यवस्था के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
तालेश्वर ताम्रपत्र उत्तराखंड के प्राचीन राजनीतिक एवं प्रशासनिक इतिहास को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोत हैं। इनसे पौरव वंश के पाँच शासकों, उनके काल तथा प्रशासनिक व्यवस्था की जानकारी मिलती है। संस्कृत भाषा, गुप्त ब्राह्मी लिपि और वृषभ, मकर तथा गरुड़ अंकित अंडाकार मुद्राएँ इन अभिलेखों की प्रमुख विशेषताएँ हैं। वाई. आर. गुप्ते के काल-निर्धारण के आधार पर इनका संबंध छठी से आठवीं शताब्दी ईस्वी से माना जाता है। इस प्रकार, तालेश्वर ताम्रपत्र उत्तराखंड में पौरव वंश की राजनीतिक उपस्थिति और प्रशासनिक विकास के अध्ययन का महत्वपूर्ण आधार प्रदान करते हैं।