अभय चंद |Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
राजा अभय चंद चंद वंश के इतिहास में विशेष महत्व रखता है, क्योंकि उसके समय से चंद वंश के संबंध में ऐतिहासिक एवं अभिलेखीय प्रमाण अधिक स्पष्ट रूप से प्राप्त होते हैं। उसे चंद वंश का पहला ऐसा शासक माना जाता है जिसने अपने नाम से अभिलेख उत्कीर्ण करवाए। 1317 ई. का अभिलेख चंद वंश के प्राचीनतम उपलब्ध अभिलेखों में प्रमुख है। चंपावत के निकट मादली स्थित मानेेश्वर नौल तथा चैकुनी बोरा क्षेत्र से प्राप्त अभिलेखों को भी अभय चंद से जोड़ा जाता है। इन अभिलेखों से उसके पारिवारिक एवं राजनीतिक संबंधों के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है।
प्रमुख बिंदु
- अभय चंद चंद वंश का पहला शासक माना जाता है, जिसके समय के अभिलेखीय प्रमाण उपलब्ध होते हैं
- अभय चंद को चंद वंश का पहला ऐसा शासक माना जाता है जिसने अपने अभिलेख उत्कीर्ण करवाए।
- चंद वंश का सबसे प्राचीन उपलब्ध अभिलेख अभय चंद से संबंधित माना जाता है।
- अभय चंद से संबंधित प्रमुख अभिलेख का समय 1317 ई. माना जाता है।
- चंपावत के निकट मादली नामक स्थान के समीप मानेेश्वर नौल में अभय चंद से संबंधित एक अभिलेख प्राप्त हुआ है।
- डॉ. राम सिंह के अनुसार मानेेश्वर नौल का यह अभिलेख अभय चंद ने पुत्र-प्राप्ति के उपलक्ष्य में खुदवाया था।
- चंपावत के निकट चैकुनी बोरा स्थित एक मंदिर से भी अभय चंद से संबंधित अभिलेख मिलने का उल्लेख किया गया है।
- डॉ. राम सिंह के अनुसार चैकुनी बोरा के अभिलेख से सोर के राजा वीर ब्रह्मदेव, उनकी पुत्री रमा देवी तथा उसके पति अभय चंद के बीच पारिवारिक संबंधों की जानकारी प्राप्त होती है।
- इस प्रकार अभिलेखीय प्रमाणों से अभय चंद के सोर क्षेत्र के राजपरिवार से संबंध होने का संकेत मिलता है।
- कुछ इतिहासकारों के अनुसार मुहम्मद बिन तुगलक के क्राजिल अभियान का संबंध अभय चंद के समय से माना जाता है।
- अभय चंद का काल चंद वंश के इतिहास में महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसके समय से वंश के इतिहास को प्रमाणित करने वाले अभिलेखीय साक्ष्य उपलब्ध होने लगते हैं।
- अभय चंद से संबंधित अभिलेख चंदकालीन राजनीतिक एवं पारिवारिक इतिहास के अध्ययन में महत्वपूर्ण स्रोत माने जाते हैं।
निष्कर्ष
अभय चंद चंद वंश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, क्योंकि उसके समय से चंद शासकों के संबंध में ठोस अभिलेखीय प्रमाण प्राप्त होने लगते हैं। 1317 ई. का अभिलेख उसके शासन से संबंधित सबसे महत्वपूर्ण प्रमाणों में माना जाता है। मादली के समीप मानेेश्वर नौल तथा चैकुनी बोरा से संबंधित अभिलेख उसके पारिवारिक एवं धार्मिक-सामाजिक संबंधों पर प्रकाश डालते हैं। डॉ. राम सिंह ने मानेेश्वर नौल के अभिलेख को पुत्र-प्राप्ति के उपलक्ष्य से तथा चैकुनी बोरा के अभिलेख को वीर ब्रह्मदेव, रमा देवी और अभय चंद के पारिवारिक संबंधों से जोड़ा है। कुछ इतिहासकार उसके समय को मुहम्मद बिन तुगलक के क्राजिल अभियान से भी जोड़ते हैं। इस प्रकार अभय चंद का शासन चंद वंश के उस चरण का प्रतिनिधित्व करता है जहाँ परंपरागत वंशावली के साथ अभिलेखीय प्रमाण भी इतिहास-निर्माण का महत्वपूर्ण आधार बनने लगते हैं।