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पृथ्वीपति शाह (1640–1664 ई.) भाग -2
निष्कर्ष पृथ्वीपति शाह का शासनकाल गढ़वाल के पंवार इतिहास का अत्यंत महत्वपूर्ण चरण था। उसके समय गढ़वाल को मुगल साम्राज्य, चंद राज्य और सिरमौर जैसी शक्तियों के साथ जटिल राजनीतिक संबंधों का सामना करना पड़ा। मुगलों के विरुद्ध संघर्ष के बाद उसकी राजनीतिक परिस्थितियों ने उसे मुगल अधीनता स्वीकार करने के लिए विवश किया, किंतु…
राजा वीणाचंद |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय राजा वीणाचंद को चंद वंश के प्रारंभिक शासकों में उल्लेखित किया जाता है। उपलब्ध परंपरागत विवरणों में उसे एक विलासी शासक के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उसके शासनकाल में राजकीय शक्ति कमजोर होने के कारण आसपास के खस शासकों को अपनी शक्ति बढ़ाने का अवसर मिला। परंपरा के अनुसार वीणाचंद की मृत्यु…
राजा सोमचंद |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय कुमाऊँ के चंद वंश के संस्थापक के रूप में राजा सोमचंद का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। चंद वंश की उत्पत्ति को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है तथा इसके प्रारंभिक इतिहास में किंवदंतियों का भी महत्वपूर्ण स्थान है। सामान्यतः माना जाता है कि कत्यूरी शासन के अवसान के आसपास कुमाऊँ में चंद शक्ति…
राजा भीष्मचंद|Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय राजा भीष्मचंद चंद वंश के इतिहास में एक महत्वपूर्ण शासक थे। उनका नाम विशेष रूप से खगमराकोट के किले के जीर्णोद्धार तथा आलमनगर की स्थापना से जुड़ा है, जिसे आगे चलकर अल्मोड़ा के नाम से प्रसिद्धि मिली। वे ऐसे समय में शासन कर रहे थे जब कुमाऊँ में चंद सत्ता को विभिन्न स्थानीय शक्तियों…
रत्न चंद |Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय रत्न चंद चंद वंश के एक योग्य, शक्तिशाली एवं विस्तारवादी शासक थे। उन्होंने अपने पिता भारती चंद की सैन्य एवं राजनीतिक नीति को आगे बढ़ाते हुए चंद राज्य की शक्ति को सुदृढ़ किया। उनके शासनकाल में डोटी के साथ पुनः संघर्ष हुआ, जिसमें उन्होंने नागमल्ल को पराजित कर डोटी के शाही वंश को पुनः…
राजा जगतपाल |Parmar/Panwar Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय पंवार/परमार राजवंश के इतिहास में राजा जगतपाल का विशेष महत्व उनके शासनकाल से संबंधित अभिलेखीय प्रमाण के कारण है। उन्हें परमार वंश का 34वाँ शासक माना जाता है। जगतपाल के संबंध में प्रमुख जानकारी देवप्रयाग स्थित रघुनाथ मंदिर के ताम्रपत्र अभिलेख से प्राप्त होती है। यह ताम्रपत्र न केवल उनके राजनीतिक प्रभुत्व पर प्रकाश…