भारती चंद भाग 2
- भारती चंद को डोटी पर विजय लगभग 1451–52 ई. में प्राप्त हुई।
- ‘रौत’ उस जागीर अथवा भूमि को कहा जाता था जो किसी व्यक्ति को असाधारण वीरता या बहादुरी के कार्य के लिए प्रदान की जाती थी।
निष्कर्ष
भारती चंद का शासन चंद राज्य के इतिहास में स्वतंत्रता, सैन्य शक्ति और राजनीतिक विस्तार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। डोटी के मल्ल शासकों के विरुद्ध दीर्घकालीन संघर्ष में विजय प्राप्त कर उन्होंने चंद राज्य को बाहरी अधीनता से मुक्त कराया और एक स्वतंत्र चंद सत्ता को मजबूत आधार प्रदान किया। उनकी सेना में विभिन्न जातियों की भागीदारी उनकी व्यापक सैन्य संगठन क्षमता को दर्शाती है। उनके पुत्र रत्न चंद ने भी अनेक अभियानों में उनका साथ दिया और आगे चलकर उत्तराधिकारी बने। 1451 ई. का हुड़ेती ताम्रपत्र तथा कोटमारा-सुई-बिसुंग ताम्रपत्र उनके शासन, भूमिदान और रत्न चंद से संबंधित महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। इस प्रकार भारती चंद को चंद वंश के स्वतंत्रता-सुदृढ़ीकरण और क्षेत्रीय विस्तार के प्रमुख शासक के रूप में देखा जाता है।