देशटदेव|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

इच्छटदेव के पश्चात उसका उत्तराधिकारी देशटदेव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। वह तृतीय राजपरिवार के प्रमुख शासकों में माना जाता है। उसके शासनकाल की जानकारी मुख्यतः ताम्रपत्रों से प्राप्त होती है, जिनसे उसके प्रशासन, धार्मिक गतिविधियों तथा दानशीलता का परिचय मिलता है। देशटदेव ने उच्च राजकीय उपाधियाँ धारण कीं और मंदिरों को भूमि दान दिया। वह एक पराक्रमी एवं दानी शासक था तथा उसके द्वारा महिपाल के विरुद्ध अभियान किए जाने का उल्लेख मिलता है।

देशटदेव प्रमुख तथ्य

  • इच्छटदेव के पश्चात देशटदेव कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा।
  • देशटदेव ने ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की थी।
  • उसकी अन्य उपाधियों में ‘परम माहेश्वर’ तथा ‘परम ब्राह्मण’ का उल्लेख मिलता है, जो उसकी धार्मिक आस्था एवं प्रतिष्ठा को दर्शाती हैं।
  • देशटदेव धार्मिक एवं दानशील प्रवृत्ति का शासक था। उसने विभिन्न मंदिरों को भूमि दान प्रदान किया।
  • उसके ताम्रपत्र से ज्ञात होता है कि उसने अपने शासनकाल के पाँचवें वर्ष में विजयेश्वर मंदिर को भूमि दान किया था।
  • उसने एशाल विषय के अंतर्गत ‘यमुना’ नामक ग्राम को विजयेश्वर मंदिर के लिए अग्रहार के रूप में प्रदान किया।
  • देशटदेव केवल धार्मिक कार्यों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह सैन्य दृष्टि से भी सक्रिय एवं पराक्रमी शासक था।
  • देशटदेव ने महिपाल के विरुद्ध अभियान किया था। इससे उसकी सैन्य क्षमता तथा राज्य की राजनीतिक सक्रियता का संकेत मिलता है।
  • उसकी दानशीलता और लोकहितकारी प्रवृत्ति के कारण उसे दीन-दुखियों का रक्षक एवं मसीहा कहा गया है।
  • देशटदेव को ‘स्वर्णदाता’ भी कहा गया है। यह विशेषण उसकी अत्यधिक दानशीलता एवं उदारता को प्रदर्शित करता है।

निष्कर्ष

देशटदेव तृतीय कत्यूरी परिवार के महत्वपूर्ण, पराक्रमी और दानशील शासकों में था। उसकी ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ जैसी उपाधि उसके राजकीय प्रभुत्व को दर्शाती है, जबकि ‘परम माहेश्वर’ और ‘परम ब्राह्मण’ उसकी धार्मिक प्रतिष्ठा को स्पष्ट करते हैं। उसके ताम्रपत्र से उसके शासनकाल के पाँचवें वर्ष विजयेश्वर मंदिर को यमुना ग्राम अग्रहार के रूप में दान दिए जाने की जानकारी मिलती है। महिपाल के विरुद्ध अभियान उसकी सैन्य सक्रियता का प्रमाण है। वहीं दीन-दुखियों का रक्षक, मसीहा और स्वर्णदाता जैसे विशेषण उसकी उदार एवं लोकहितकारी छवि को दर्शाते हैं।

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