कत्यूरी वंश का संस्थापक |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

कत्यूरी वंश के संस्थापक के संबंध में इतिहासकारों में विभिन्न मत पाए जाते हैं। कत्यूरी परंपरा में वासुदेव को संस्थापक मानने की जनश्रुति मिलती है, जबकि अभिलेखीय साक्ष्य इस मत का स्पष्ट समर्थन नहीं करते। बागेश्वर से प्राप्त शिलालेख तथा कार्तिकेयपुर राजवंश से संबंधित अन्य अभिलेखों के अध्ययन से वसन्तदेव/बसन्तदेव का नाम प्रमुखता से सामने आता है। दूसरी ओर, कुछ विद्वानों ने निम्बर को संस्थापक माना है। इस प्रकार कत्यूरी वंश के संस्थापक का प्रश्न अभिलेखीय साक्ष्यों और विभिन्न विद्वानों की व्याख्याओं पर आधारित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक विषय है।

कत्यूरी वंश का संस्थापक

  • जनश्रुति के अनुसार कत्यूरी वंश का संस्थापक वासुदेव था, किंतु उसका नाम किसी प्रमाणिक अभिलेख या स्पष्ट वंशावली में नहीं मिलता।
  • काबुल के कटोरमान वंश का अंतिम नरेश भी वासुदेव नाम का था। एटकिंसन ने दोनों वासुदेवों को एक ही व्यक्ति मानने का प्रयास किया है।
  • इसके विपरीत, बागेश्वर में प्राप्त त्रिभुवनराज के शिलालेख से प्रथम कत्यूरी नरेश का नाम वसन्तदेव ज्ञात होता है।
  • कार्तिकेयपुर राजवंश से संबंधित अभिलेखों के आधार पर इस राजवंश के तीन परिवारों द्वारा कार्तिकेयपुर से शासन करने की जानकारी मिलती है।
  • प्रो. कीलहॉर्न तथा डॉ. सरकार ने वसन्तदेव के वंशक्रम को अनिश्चित मानते हुए निम्बर वंश का संस्थापक माना।
  • यशवंत कठोच इस मत से सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार निम्बर को संस्थापक मानने का आधार प्रिंसेप का अधूरा लिप्यंतरण था।
  • यशवंत कठोच के अनुसार बागेश्वर शिलालेख के प्रारूप से स्पष्ट होता है कि वसन्तनदेव को ही प्रथम परिवार का वंश-संस्थापक माना गया है।
  • इसलिए यशवंत कठोच के मतानुसार कार्तिकेयपुर राजवंश के तीन परिवार थे और प्रथम परिवार का संस्थापक वसन्तदेव था।
  • एटकिंसन ने वसन्तदेव और वासुदेव को एक ही व्यक्ति मानने का प्रयास किया और इसके समर्थन में जोशीमठ स्थित वासुदेव मंदिर के लेख का उल्लेख किया।
  • जोशीमठ के वासुदेव मंदिर से संबंधित ‘श्री-वासुदेव गिरिराजचक्र चूड़ामणि’ लेख के आधार पर वासुदेव को कत्यूरी शासक मानना निश्चित नहीं है।
  • उक्त लेख से अधिक से अधिक राजधानी कार्तिकेयपुर के निकट स्थित राज-पोषित श्रीवासुदेव मंदिर की प्राचीनता एवं धार्मिक महत्त्व का संकेत मिलता है, न कि किसी वासुदेव नामक राजा का।
  • इसलिए उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों के आधार पर वसन्तदेव को कत्यूरी वंश का संस्थापक मानना अधिक उपयुक्त प्रतीत होता है, जबकि वासुदेव संबंधी मत मुख्यतः जनश्रुति एवं अनुमान पर आधारित है।

निष्कर्ष

कत्यूरी वंश के संस्थापक के संबंध में वासुदेव, निम्बर और वसन्तदेव से जुड़े विभिन्न मत मिलते हैं। जनश्रुति में वासुदेव को संस्थापक माना गया है, जबकि एटकिंसन ने काबुल के कटोरमान वंश के वासुदेव से उसका संबंध स्थापित करने का प्रयास किया। वहीं कीलहॉर्न और डॉ. सरकार ने निम्बर को संस्थापक माना। इसके विपरीत बागेश्वर शिलालेख एवं उसके पुनर्पाठ के आधार पर वसन्तदेव को प्रथम परिवार का संस्थापक मानने वाला मत अधिक प्रमाणिक प्रतीत होता है। अतः उपलब्ध अभिलेखीय साक्ष्यों की दृष्टि से वसन्तदेव को कत्यूरी/कार्तिकेयपुर राजवंश का संस्थापक मानना अधिक उचित है।

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