कत्यूरी वंश के शासक|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
कत्यूरी वंश के इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखों का विशेष महत्व है। कत्यूरी शासकों के नाम मुख्यतः पाण्डुकेश्वर, बागेश्वर, बैजनाथ आदि से प्राप्त अभिलेखों से ज्ञात होते हैं। उपलब्ध अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर कत्यूरी वंश के तीन परिवारों के 14 शासकों का उल्लेख मिलता है, जबकि इतिहासकार यशवंत कठोच ने कत्यूरी वंश में कुल 15 नरेशों का उल्लेख किया है। अधिकांश शासकों ने ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ जैसी उपाधियाँ धारण कीं, जो उनकी उच्च राजकीय स्थिति और संप्रभु सत्ता को दर्शाती हैं। इनके शासनकाल में उत्तराखण्ड के मध्य हिमालयी क्षेत्र में कत्यूरी सत्ता का राजनीतिक एवं सांस्कृतिक प्रभाव व्यापक रहा।
शासकों की सूची
- वसंत देव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- अज्ञात शासक — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- खर्परदेव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- अधिधजदेव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- त्रिभुवन राजदेव
- निम्बरदेव
- इष्टगण देव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- ललित सूर देव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- भूदेव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- सलोणादित्य
- इच्छट देव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- देशट देव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- पदम देव — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
- सुभिक्षराज — परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर
निष्कर्ष
कत्यूरी शासकों की सूची मुख्यतः अभिलेखीय साक्ष्यों पर आधारित है, इसलिए इनके क्रम और संख्या को लेकर इतिहासकारों में कुछ मतभेद दिखाई देते हैं। फिर भी वसंत देव से सुभिक्षराज तक के शासकों के नाम कत्यूरी राजनीतिक परंपरा और शासन-व्यवस्था की निरंतरता को स्पष्ट करते हैं। इन शासकों ने मध्य हिमालय में एक सुदृढ़ राजनीतिक सत्ता स्थापित की, जिसने उत्तराखण्ड के राजनीतिक, धार्मिक, स्थापत्य एवं सांस्कृतिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।