उत्तराखण्ड में मौखरी वंश |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

मौखरी वंश गुप्तोत्तर काल में उत्तर भारत की उभरती हुई प्रमुख राजसत्ताओं में से एक था। इसका प्रमुख राजनीतिक केंद्र कन्नौज था। गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद मौखरियों ने कन्नौज में अपनी शक्ति स्थापित की और उत्तर भारत की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उत्तराखण्ड के इतिहास में मौखरियों का महत्व विशेष रूप से नाग सत्ता के पतन तथा मैदानी क्षेत्रों पर कन्नौज की राजनीतिक शक्ति के प्रभाव के संदर्भ में देखा जाता है। मौखरियों के बाद उत्तराखण्ड के मैदानी भागों पर हर्षवर्धन का प्रभाव/शासन स्थापित हुआ।

मौखरी वंश – प्रमुख तथ्य

  • मौखरी वंश के प्रारंभिक संस्थापक के रूप में हरिवर्मा का नाम मिलता है।
  • मौखरियों का प्रमुख राजनीतिक केंद्र कन्नौज था।
  • गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद मौखरियों ने कन्नौज को अपनी शक्ति का प्रमुख केंद्र बनाया।
  • मौखरी वंश के प्रमुख शासकों में हरिवर्मा, ईशानवर्मा, सर्ववर्मा और गृहवर्मा के नाम उल्लेखनीय हैं।
  • ईशानवर्मा मौखरी वंश का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने मौखरी सत्ता के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • मौखरियों ने उत्तर भारत में अपनी शक्ति बढ़ाते हुए विभिन्न समकालीन स्थानीय राजसत्ताओं से संघर्ष किया।
  • मौखरी वंश का उत्कर्ष मुख्यतः 6वीं शताब्दी ईस्वी में हुआ।
  • मौखरी शासकों ने कन्नौज को उत्तर भारत के प्रमुख राजनीतिक केंद्रों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  • मौखरी वंश के अंतिम प्रमुख शासक गृहवर्मा थे।
  • गृहवर्मा का विवाह थानेश्वर के शासक प्रभाकरवर्धन की पुत्री राज्यश्री से हुआ था।
  • मालवा के शासक देवगुप्त ने गृहवर्मा की हत्या कर दी थी।
  • गृहवर्मा की मृत्यु के बाद मौखरी राज्य पर हर्षवर्धन का प्रभाव स्थापित हुआ।
  • हर्षवर्धन का संबंध मौखरी राजपरिवार से वैवाहिक रूप से था, क्योंकि राज्यश्री उसकी बहन थी।

उत्तराखण्ड में मौखरी — विशेष तथ्य

  • उत्तराखण्ड में मौखरी प्रभाव को मुख्यतः नाग सत्ता के पतन के संदर्भ में देखा जाता है।
  • माना जाता है कि कन्नौज के मौखरियों ने उत्तराखण्ड में नाग शासकों को परास्त किया।
  • संभवतः मौखरी शक्ति के विस्तार के कारण उत्तराखण्ड की नाग सत्ता का प्रभाव समाप्त हुआ।
  • मौखरी प्रभाव के कारण उत्तराखण्ड के मैदानी क्षेत्र कन्नौज की राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े।
  • मौखरी सत्ता के बाद उत्तराखण्ड के मैदानी भागों पर हर्षवर्धन का शासन/प्रभाव स्थापित हुआ।
  • इस प्रकार उत्तराखण्ड के मैदानी क्षेत्रों में राजनीतिक सत्ता के क्रम को नाग → मौखरी → हर्षवर्धन के रूप में समझा जा सकता है
  • हर्षवर्धन के काल में उत्तराखण्ड के मैदानी भाग कन्नौज-केंद्रित व्यापक राजनीतिक व्यवस्था का हिस्सा बने।
  • उत्तराखण्ड में मौखरी प्रभाव को स्थानीय सत्ता से व्यापक उत्तर भारतीय सत्ता की ओर राजनीतिक संक्रमण के रूप में देखा जा सकता है।

निष्कर्ष

उत्तराखण्ड के प्राचीन राजनीतिक इतिहास में मौखरी वंश नाग सत्ता और हर्षवर्धन की सत्ता के बीच एक महत्वपूर्ण संक्रमणकालीन शक्ति के रूप में दिखाई देता है। कन्नौज से मौखरी शक्ति के विस्तार ने उत्तराखण्ड के मैदानी क्षेत्रों की राजनीति को प्रभावित किया और संभवतः नाग सत्ता के पतन में भूमिका निभाई। गृहवर्मा की मृत्यु के बाद मौखरी सत्ता हर्षवर्धन के प्रभाव में आ गई। परिणामस्वरूप उत्तराखण्ड के मैदानी क्षेत्रों में हर्षवर्धन की सत्ता स्थापित हुई, जिससे यह क्षेत्र कन्नौज-केंद्रित उत्तर भारतीय राजनीतिक व्यवस्था से और अधिक जुड़ गया।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *