लाखु गुफा(उड्यार) | |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
प्रागैतिहासिक मानव ने अपने दैनिक जीवन, परिवेश और अनुभवों को विभिन्न माध्यमों से अभिव्यक्त किया। शैलाश्रयों की दीवारों एवं चट्टानों पर बनाए गए चित्र इस अभिव्यक्ति के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। इन शैलचित्रों के माध्यम से उस समय के मानव की जीवन-शैली, सामाजिक व्यवहार, सामूहिक गतिविधियों, प्रकृति के प्रति दृष्टिकोण तथा कलात्मक चेतना को समझने में सहायता मिलती है। उत्तराखंड का पर्वतीय भू-भाग भी ऐसी प्रागैतिहासिक गतिविधियों के अनेक प्रमाणों को अपने भीतर समेटे हुए है। यहाँ पाए जाने वाले शैलाश्रय और उनमें अंकित चित्र तत्कालीन मानव के जीवन और उसकी सांस्कृतिक यात्रा की महत्वपूर्ण झलक प्रस्तुत करते हैं। इसी क्रम में लाखु गुफा का विशेष महत्व है। यह स्थल उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक शैलकला के अध्ययन की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और राज्य की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को समझने में उपयोगी है।
प्रमुख तथ्य एवं विशेषताएं
- लाखु गुफा की खोज 1968 ई. में डॉ. एम. पी. जोशी ने की।
- लाखु गुफा अल्मोड़ा के बाड़ेछीना के निकट दलबैंड पर सुयाल नदी के तट पर स्थित है
- लाखु गुफा में पशुओं व मानवों के रंगीन शैलचित्र प्राप्त हुए, जिनमें तीन प्रकार के रंगों सफेद, लाल एवं काले रंग का प्रयोग हुआ है।
- यहाँ एक बहुपदीय छिपकली सा प्रतीत होता चित्र भी मिला है।
- लाखु गुफा में मिले शैलचित्रों की तुलना कुछ विद्वान भीमबेटका के शैलाश्रयों से करते हैं तथा यहाँ से नागफनी के आकार का एक भव्य शिलाश्रय प्राप्त हुआ था।
- लाखु उद्यार के शैलचित्रों का मुख्य विषय सामूहिक नृत्य (समूहबद्ध नर्तन) या नृतक मंडली है।
- यशवंत सिंह कठोच के अनुसार लाखु गुफा द्विखंडीय संरचना में बनी हुई है।
- 1982 में यशवंत सिंह कठोच ने लाखु उद्यार से 7 मानव आकृतियों की खोज की थी।
- इसे उत्तराखंड में प्रागैतिहासिक गुफा चित्रों की पहली खोज मानी जाती है |
- लाखु गुफा को शैलचित्रों का संग्रहालय कहा जाता है।
- एमपी जोशी की इस महत्वपूर्ण खोज के उपरांत अल्मोड़ा जनपद में ही फड़कानौली,फलसीमा,ल्वेथाप, पेटशाल, कालामाटी एवं मल्ला पैनाली में भी शैलाश्रय मिले हैं। यह सभी शैलाश्रय कालामाटी-डीनापानी पर्वत श्रृंखलाओ की पूर्व दिशा में लगभग 15 किलोमीटर की परिधि में केंद्रित है।
निष्कर्ष
लाखु गुफा उत्तराखंड की प्रागैतिहासिक विरासत को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इसके शैलचित्रों में निहित अभिव्यक्तियाँ यह दर्शाती हैं कि प्रारंभिक मानव का जीवन केवल भोजन और सुरक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें सामूहिकता, कल्पनाशीलता, अभिव्यक्ति और सौंदर्यबोध जैसी प्रवृत्तियाँ भी विकसित हो रही थीं। ऐसे शैलाश्रय हमें उस समय के समाज को समझने का अवसर देते हैं, जिसके प्रत्यक्ष लिखित प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। इनके माध्यम से मानव की प्रारंभिक सांस्कृतिक यात्रा और उसके परिवेश के साथ संबंधों को समझने में सहायता मिलती है। इसलिए लाखु गुफा का महत्व केवल एक पुरातात्त्विक स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के प्राचीन मानव जीवन और सांस्कृतिक विकास की कहानी को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
Check Your Progress
1. यह अल्मोड़ा के बाड़ेछीना के निकट दलबैंड पर स्थित है।
2. यह सुयाल नदी के तट पर स्थित है।
सही उत्तर चुनिए—
1. इनमें मानव और पशुओं की आकृतियाँ प्राप्त हुई हैं।
2. इनमें सफेद, लाल और काले रंगों का प्रयोग हुआ है।
सही उत्तर है—