टिहरी रियासत में शिक्षा व्यवस्था
परिचय
टिहरी रियासत में शिक्षा व्यवस्था का विकास धीरे-धीरे राजपरिवार तक सीमित शिक्षा से सार्वजनिक एवं संस्थागत शिक्षा की ओर हुआ। प्रारंभिक काल में प्रजा के बच्चों के लिए विद्यालय खोलना राज्य के आवश्यक कर्तव्यों में शामिल नहीं था। राजकुमारों की शिक्षा के लिए राजा आवश्यकता के अनुसार पंडितों की नियुक्ति करता था। कीर्तिशाह के शासनकाल से आधुनिक ढंग के विद्यालयों की स्थापना शुरू हुई और विभिन्न वर्गों के लिए अलग-अलग शिक्षण संस्थाएँ स्थापित की गईं। आगे चलकर नरेन्द्रशाह के समय राज्य तथा जनता दोनों के प्रयासों से अनेक विद्यालय स्थापित हुए।
टिहरी रियासत की शिक्षा व्यवस्था
1. प्रारंभिक शिक्षा व्यवस्था
- सुदर्शनशाह एवं भवानीशाह के शासनकाल तक प्रजा के बच्चों के लिए विद्यालय खोलना राज्य के आवश्यक कर्तव्यों में शामिल नहीं माना जाता था।
- इस काल में शिक्षा की व्यवस्था मुख्यतः पारंपरिक रूप में थी तथा राजकुमारों की शिक्षा के लिए राजा कुछ समय के लिए पंडितों की नियुक्ति करता था।
- इस प्रकार प्रारंभिक काल में राज्य की शिक्षा व्यवस्था का प्रमुख ध्यान राजपरिवार की शिक्षा पर था, जबकि सामान्य जनता के लिए संगठित विद्यालयी व्यवस्था विकसित नहीं हुई थी।
2. कीर्तिशाह के समय शिक्षा का विकास
- कीर्तिशाह के शासनकाल से नए ढंग के विद्यालयों की स्थापना प्रारंभ हुई। उनके समय टिहरी रियासत में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था के विकास को गति मिली।
- कीर्तिशाह ने प्रताप पाठशाला को हाईस्कूल में विकसित किया।
- राजा ने टिहरी में विभिन्न वर्गों एवं आवश्यकताओं के लिए निम्न शिक्षण संस्थाओं की स्थापना की—
- बोर्डिंग हाउस
- हिबेट संस्कृत पाठशाला
- मुहम्मद मदरसा
- कन्या पाठशाला
- इन संस्थाओं की स्थापना से टिहरी राज्य में आधुनिक, संस्कृत, मुस्लिम एवं बालिका शिक्षा के लिए अलग-अलग अवसर विकसित हुए।
3. नरेन्द्रशाह के समय
- नरेन्द्रशाह के शासनकाल में शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक विस्तार हुआ।
- इस काल में राज्य तथा जनता दोनों के प्रयासों से अनेक विद्यालयों की स्थापना की गई।
- इससे शिक्षा का प्रसार केवल राजधानी या राजपरिवार तक सीमित न रहकर सामान्य जनता तक भी बढ़ने लगा।
निष्कर्ष
टिहरी रियासत में शिक्षा व्यवस्था का विकास क्रमिक एवं संस्थागत रूप से हुआ। सुदर्शनशाह और भवानीशाह के समय तक सामान्य जनता के लिए विद्यालय खोलना राज्य का आवश्यक दायित्व नहीं माना जाता था और राजकुमारों की शिक्षा के लिए पंडित नियुक्त किए जाते थे। कीर्तिशाह के शासनकाल में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए तथा प्रताप पाठशाला को हाईस्कूल बनाने के साथ बोर्डिंग हाउस, हिबर्ट संस्कृत पाठशाला, मुहम्मद मदरसा और कन्या पाठशाला जैसी संस्थाएँ स्थापित की गईं। नरेन्द्रशाह के समय राज्य और जनता के संयुक्त प्रयासों से विद्यालयों की संख्या बढ़ी। इस प्रकार टिहरी रियासत में शिक्षा धीरे-धीरे राजपरिवार की सीमित शिक्षा से व्यापक जनशिक्षा की दिशा में विकसित हुई।