राजा प्रताप शाह भाग -1 |Tihari Risayat of Garhwal|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
राजा प्रताप शाह पंवार/परमार वंश के 57वें तथा टिहरी गढ़वाल रियासत के तीसरे राजा थे। वे राजा भवानी शाह और मंडीयाली रानी के पुत्र थे। उनका शासनकाल लगभग 15 वर्षों तक रहा। प्रताप शाह ने टिहरी राज्य के प्रशासन, राजस्व, न्याय, पुलिस, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क एवं वन व्यवस्था में अनेक सुधार किए। उन्हें टिहरी में अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था की शुरुआत करने वाला प्रथम राजा माना जाता है। उनके समय टिहरी में अंग्रेजी स्कूल, अस्पताल, प्रिंटिंग प्रेस तथा पुलिस विभाग जैसी संस्थाओं का विकास हुआ। उन्होंने 1877 ई. में प्रतापनगर की स्थापना कर उसे ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया। उनकी पत्नी महारानी गुलेरिया ने भी राज्य के प्रशासन और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1. परिचय एवं शासनकाल
- राजा प्रताप शाह पंवार/परमार वंश के 57वें तथा टिहरी रियासत के तीसरे राजा थे।
- वे राजा भवानी शाह एवं मंडीयाली रानी के पुत्र थे।
- उन्होंने टिहरी रियासत पर लगभग 15 वर्षों तक शासन किया।
- प्रताप शाह ने अपने शासनकाल में अनेक प्रशासनिक एवं सामाजिक सुधार किए।
- उनके प्रयासों से टिहरी को एक व्यवस्थित एवं आदर्श नगर के रूप में विकसित करने का प्रयास किया गया।
2. शिक्षा एवं संस्थागत विकास
- प्रताप शाह को टिहरी रियासत में अंग्रेजी शिक्षा व्यवस्था प्रारंभ करने वाला प्रथम राजा माना जाता है।
- 1883 ई. में टिहरी में एंग्लो-वर्नाक्युलर मिडिल स्कूल की स्थापना की गई।
- बाद में 1891 ई. में कीर्तिशाह ने इसे हाई स्कूल के स्तर तक उन्नत किया और इसका नाम प्रताप हाई स्कूल रखा।
- 1940 ई. में नरेंद्र शाह के समय इसका नाम प्रताप इंटर कॉलेज किया गया।
- प्रताप शाह ने टिहरी में कैंपबेल बोर्डिंग स्कूल की स्थापना भी की।
- उनके द्वारा मोहम्मडन मदरसे की स्थापना का भी उल्लेख मिलता है।
- 1873 ई. में टिहरी में प्रथम अस्पताल की स्थापना प्रताप शाह द्वारा की गई।
- 1876 ई. में प्रथम खैराती दवाखाना स्थापित किया गया।
- प्रताप शाह ने टिहरी में डाकघर भी स्थापित कराया।
3. प्रशासन एवं राजस्व व्यवस्था
- प्रताप शाह का शासन-प्रबंध अपने पिता भवानी शाह की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित माना जाता है।
- 1873 ई. में भूमि व्यवस्था कराई गई, जिसे ‘ज्यूला पैमाइश’ के नाम से जाना गया।
- राजस्व व्यवस्था को व्यवस्थित करने के लिए राज्य को 22 पट्टियों में विभाजित किया गया।
- प्रत्येक पट्टी के लिए एक कारदार नियुक्त किया गया।
- ब्रिटिश गढ़वाल में कारदार लगभग पटवारी के समान कार्य करते थे, किंतु टिहरी में उनकी नियुक्ति एक वर्ष के लिए की जाती थी।
- राज्य में शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्य को रवाई, टकनौर, चिल्ला और देवप्रयाग—चार भागों में विभाजित किया गया।
- प्रत्येक भाग में एक थानेदार नियुक्त किया गया।
- प्रताप शाह ने टिहरी में पुलिस विभाग की स्थापना की।
4. सामाजिक सुधार
- 1885 ई. में महारानी गुलेरिया की सलाह से राज्य में प्रचलित कुछ पुरानी प्रथाओं को समाप्त करने का प्रयास किया गया।
- खेण — इसे बेगार के रूप में जाना जाता था।
- बिशाह — इस प्रथा में अन्न के रूप में कर राज्य के भंडार तक पहुंचाया जाता था।
- पाला — इस प्रथा में बारी-बारी से दरबार में दाल, दही, घी आदि पहुंचाए जाते थे।
- प्रताप शाह ने दासों की बिक्री पर रोक लगाई।
- दास एवं दलित वर्ग के लोगों को भूमि प्रदान किए जाने का भी उल्लेख मिलता है।
- प्रताप शाह ने प्रजा के सुख-दुःख और प्रशासनिक स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने के लिए राज्य-भ्रमण की व्यवस्था अपनाई।
- वे वर्ष में लगभग दो-तीन महीने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का भ्रमण करते थे।
5. न्याय व्यवस्था
- प्रताप शाह के समय सुदर्शन शाह के काल से चली आ रही चार अदालतें—दीवानी, फौजदारी, सरसरी एवं कलेक्टरी विद्यमान थीं।
- उन्होंने न्यायिक मामलों का शीघ्र निपटारा करने के आदेश दिए।
- महत्वपूर्ण विवादों का निर्णय राजा स्वयं किया करते थे।
- प्रताप शाह ऐसे प्रथम टिहरी नरेश माने जाते हैं जिन्होंने विवादों के निपटारे के लिए तिथि निश्चित करने तथा कोर्ट फीस के टिकट लगाने की व्यवस्था शुरू की।
- उन्होंने टिहरी में एक न्यायालय भवन का निर्माण कराया।
- बाद में कीर्तिशाह के समय इसी न्यायालय को चीफ कोर्ट तथा नरेंद्र शाह के समय हजूर कोर्ट के नाम से जाना गया।
6. सड़क एवं परिवहन व्यवस्था
- प्रताप शाह ने टिहरी-मसूरी तथा टिहरी-श्रीनगर राजमार्गों का निर्माण कराया।
- राज्य में हरिद्वार-गंगोत्री आदि अनेक मार्गों की मरम्मत भी कराई गई।
- मसूरी-श्रीनगर मार्ग पर धनोल्टी, कौड़िया आदि स्थानों पर चार विश्रामगृह बनवाए गए।
- कंडक/कण्डल पुल का निर्माण प्रताप शाह के समय हुआ।