रानी कर्णावती |Parmar/Panwar Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
रानी कर्णावती गढ़वाल के पंवार वंश के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली महिला शासिकाओं में से एक थीं। वे राजा महिपति शाह की पत्नी तथा राजा पृथ्वीपति शाह की माता थीं। महिपति शाह की मृत्यु के समय पृथ्वीपति शाह अवयस्क था, इसलिए कर्णावती ने उसकी संरक्षिका के रूप में लगभग 1635 से 1640 ई. तक गढ़वाल राज्य की बागडोर संभाली। उनके शासनकाल की सबसे प्रसिद्ध घटना 1635 ई. में मुगल सेनापति नवाजत खाँ के दून घाटी पर आक्रमण से जुड़ी है। मुगल सैनिकों को पराजित कर उनके नाक-कान कटवाने की परंपरागत कथा के कारण उन्हें ‘नाक कटी रानी’ या ‘नाक काटने वाली रानी’ कहा गया। उनकी वीरता और राजनीतिक कुशलता के कारण उनकी तुलना रानी दुर्गावती और ताराबाई से भी की जाती है।
परिचय
- रानी कर्णावती के पति का नाम राजा महिपति शाह तथा पुत्र का नाम पृथ्वीपति शाह था। महिपति शाह की मृत्यु के बाद पृथ्वीपति शाह पंवार राज्य का उत्तराधिकारी बना।
- पृथ्वीपति शाह के अल्पवयस्क होने के कारण रानी कर्णावती उसकी संरक्षिका बनीं और लगभग 1635–1640 ई. तक राज्य की बागडोर संभाली।
- रानी कर्णावती को उनकी वीरता, राजनीतिक सूझबूझ और मुगलों के विरुद्ध साहस के कारण ‘नाक कटी रानी’ के नाम से प्रसिद्धि मिली।
- रानी कर्णावती की तुलना उनकी वीरता के कारण रानी दुर्गावती और ताराबाई से की जाती है। गढ़वाल के इतिहास में उनका स्थान एक साहसी एवं कुशल महिला शासिका के रूप में है।
- रानी कर्णावती ने पंवार राज्य की दूसरी राजधानी रानीहाट में स्थापित की थी।
- उन्होंने देहरादून क्षेत्र में करनपुर नगर की स्थापना की थी। यह नगर उनके नाम से जुड़ा हुआ माना जाता है।
- देहरादून के नवादा में रानी कर्णावती के महल का उल्लेख मिलता है। उनके समय दून घाटी की राजधानी नवादा थी।
- रानी कर्णावती के संबंध में जानकारी पिथौरागढ़ के हाट ताम्रपत्र से भी प्राप्त होती है। इस ताम्रपत्र में उनके प्रमुख सेनापति माधो सिंह भंडारी का उल्लेख मिलता है।
- रानी कर्णावती के शासनकाल की सबसे प्रसिद्ध घटना 1635 ई. का मुगल आक्रमण है। शाहजहाँ के सेनापति नवाजत खाँ ने दून घाटी पर आक्रमण किया था।
- उस समय गढ़वाल की शासन-व्यवस्था रानी कर्णावती के हाथों में थी। उन्होंने अपनी रणनीतिक सूझबूझ से मुगल सेना का सामना किया और मुगल अभियान को विफल कर दिया।
- परंपरागत विवरण के अनुसार, रानी कर्णावती ने पकड़े गए मुगल सैनिकों के नाक-कान कटवाकर उन्हें वापस भेज दिया। इसी घटना से उनके ‘नाक काटने वाली रानी’ नाम की प्रसिद्धि जुड़ी है।
- नवाजत खाँ के साथ सिरमौर के राजा मांधाता प्रकाश की सेना ने भी मुगल पक्ष की ओर से इस अभियान में भाग लिया था।
- शिवप्रसाद डबराल ने रानी कर्णावती के संदर्भ में ‘नाक कटनी रानी’ नाम का प्रयोग किया है।
- इटली के यात्री निकोलस मनूची ने अपनी पुस्तक ‘स्टोरिया डू मोगोर’ (Storia do Mogor) में रानी कर्णावती के व्यक्तित्व की प्रशंसा करते हुए उनकी तुलना साक्षात् दुर्गा से की है।
- रानी कर्णावती के समय दून घाटी की राजधानी नवादा थी। नवादा स्थित उनका महल इस क्षेत्र में उनके प्रशासनिक प्रभाव का महत्वपूर्ण संकेत माना जाता है।
निष्कर्ष
रानी कर्णावती गढ़वाल के इतिहास में वीरता, राजनीतिक कुशलता और प्रशासनिक नेतृत्व की प्रतीक मानी जाती हैं। उन्होंने ऐसे समय में राज्य की बागडोर संभाली जब उनका पुत्र पृथ्वीपति शाह अभी अवयस्क था और गढ़वाल को बाहरी शक्तियों से खतरा था। 1635 ई. में नवाजत खाँ के नेतृत्व में मुगल आक्रमण को विफल करना उनके जीवन की सबसे प्रसिद्ध घटना है। इसी से उनका नाम ‘नाक कटी रानी’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ। हाट ताम्रपत्र, मनूची का विवरण तथा अन्य ऐतिहासिक परंपराएँ उनके महत्व को रेखांकित करती हैं। रानीहाट, करनपुर और नवादा से जुड़े उनके निर्माण एवं प्रशासनिक कार्य भी उल्लेखनीय हैं। उनकी वीरता के कारण उन्हें दुर्गावती और ताराबाई जैसी महान महिला शासिकाओं के समकक्ष देखा जाता है।