राजा महेंद्र चंद |Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
राजा महेंद्र चंद चंद वंश के अंतिम शासक माने जाते हैं। उनके समय तक कुमाऊँ की चंद सत्ता आंतरिक संघर्षों, कमजोर राजसत्ता और बाहरी शक्तियों के दबाव से अत्यंत कमजोर हो चुकी थी। मोहन चंद के भाई लाल सिंह ने रामपुर के नवाब की सहायता से सत्ता पर प्रभाव स्थापित किया और महेंद्र चंद को गद्दी पर बैठाकर स्वयं प्रधानमंत्री बना। इसी काल में हर्षदेव जोशी ने गोरखा नायक रण बहादुर शाह को कुमाऊँ पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया। अंततः 1790 ई. में अल्मोड़ा पर गोरखों का अधिकार हो गया और चंद राजवंश की स्वतंत्र सत्ता समाप्त हो गई। इस प्रकार महेंद्र चंद के शासन के साथ कुमाऊँ के चंद राजाओं की दीर्घ राजनीतिक परंपरा का अंत हुआ।
प्रमुख तथ्य
1. मोहन चंद के बाद उसके भाई लाल सिंह ने रामपुर के नवाब की सहायता से कुमाऊँ की गद्दी पर प्रभाव स्थापित किया।2. लाल सिंह ने मोहन चंद के पुत्र महेन्द्र चंद को राजा बनाया और स्वयं उसका प्रधानमंत्री बन गया।3. महेन्द्र चंद को चंद वंश का अंतिम शासक माना जाता है।4. महेंद्र चंद को परंपरा में 62वाँ चंद शासक माना जाता है। यदि मोहन चंद को केवल एक बार गिना जाए, तो महेंद्र चंद को 61वाँ शासक माना जाता है।5. हर्षदेव जोशी ने गोरखा नायक रण बहादुर शाह को कुमाऊँ पर आक्रमण के लिए आमंत्रित किया।6. गोरखा आक्रमण के दौरान हवालबाग के युद्ध में चंद पक्ष को पराजय का सामना करना पड़ा।7. 1790 ई. में गोरखों ने अल्मोड़ा पर अधिकार कर लिया। इसके साथ ही कुमाऊँ में चंद राजसत्ता का अंत हो गया।8. कुमाऊँ विजय के समय नेपाल का शासक रण बहादुर शाह था।9. कुमाऊँ पर गोरखा अभियान में हस्तिदल चौतरिया, जगजीत पांडे, अमर सिंह थापा और शूरवीर थापा जैसे गोरखा सेनानायकों की भूमिका बताई जाती है।10. ब्रिटिश काल में चंद राज्य की परंपरा अल्मोड़ा शाखा और काशीपुर शाखा में विभाजित हुई।11. महेंद्र चंद के पुत्र प्रताप चंद को अंग्रेजों ने कुछ गाँव जागीर के रूप में प्रदान किए।12. काशीपुर शाखा में लाल सिंह के पुत्र गुमान सिंह ने शासन किया। उनके दरबार में प्रसिद्ध कवि गुमानी पंत रहते थे।13. केशी सिंह बाबा, जो उत्तराखंड के सांसद रहे, को काशीपुर की चंद शाखा से संबंधित बताया जाता है।
निष्कर्ष
राजा महेंद्र चंद का शासन चंद वंश के स्वतंत्र राजसत्ता के अंतिम चरण का प्रतिनिधित्व करता है। उनके समय तक चंद राज्य आंतरिक राजनीतिक संघर्षों और कमजोर प्रशासन के कारण बाहरी शक्तियों का सामना करने की स्थिति में नहीं रह गया था। लाल सिंह द्वारा महेंद्र चंद को गद्दी पर बैठाना और स्वयं प्रधानमंत्री बनना इस बात का संकेत था कि वास्तविक सत्ता का स्वरूप बदल चुका था। इसी बीच हर्षदेव जोशी द्वारा गोरखा नायक रण बहादुर शाह को आमंत्रित करना कुमाऊँ के इतिहास की निर्णायक घटना साबित हुआ। 1790 ई. में अल्मोड़ा पर गोरखा अधिकार के साथ चंदों की स्वतंत्र सत्ता समाप्त हो गई। बाद में ब्रिटिश काल में चंद राजपरंपरा अल्मोड़ा और काशीपुर शाखाओं में दिखाई दी। इसलिए महेंद्र चंद को केवल अंतिम राजा ही नहीं, बल्कि चंद राजवंश की लगभग छह-सात शताब्दियों लंबी राजनीतिक परंपरा के अंतिम स्वतंत्र शासक के रूप में विशेष महत्व दिया जाता है।