Similar Posts
बैजनाथ का कत्यूरी/कुमाऊँ का कातियूर राजवंश : जानकारी के स्रोत एवं संस्थापक |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय बैजनाथ के कत्यूरी अथवा कुमाऊँ के कातियूर राजवंश के इतिहास के पुनर्निर्माण में अभिलेखीय, पुरातात्विक तथा लोक-साहित्यिक स्रोतों का महत्वपूर्ण योगदान है। इस वंश के इतिहास की जानकारी मुख्यतः मूर्ति-लेखों, मंदिरों से प्राप्त अभिलेखों तथा जागर-गाथाओं से मिलती है। इन स्रोतों के आधार पर कत्यूरी शासकों के नाम, धार्मिक मान्यताओं, मंदिर निर्माण तथा वंश…
कल्याणराजदेव|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय कल्याणराजदेव कत्यूरी वंश के प्रारम्भिक शासकों में से एक था। वह खर्परदेव का पुत्र था और उसके बाद कत्यूरी राजसिंहासन पर आसीन हुआ। उसके शासनकाल की जानकारी मुख्यतः बागेश्वर शिलालेख से प्राप्त होती है। उसके द्वारा धारण की गई उच्च राजकीय उपाधि से इस काल में कत्यूरी शासकों की राजकीय प्रतिष्ठा एवं संप्रभु स्थिति…
महापाषानीय शवाधान (Megalithic Burials)|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय उत्तराखंड के आद्य ऐतिहासिक काल को समझने में महापाषाणीय शवाधान महत्वपूर्ण पुरातात्त्विक साक्ष्य हैं। इनसे तत्कालीन मानव की मृत्यु, परलोक तथा सामाजिक-सांस्कृतिक मान्यताओं के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। शवों के साथ विभिन्न प्रकार के मृद्भाण्ड, धातु उपकरण, अस्त्र-शस्त्र तथा अन्य वस्तुओं का रखा जाना इस बात का संकेत देता है कि…
सलोणादित्य|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय भूदेव के पश्चात कार्तिकेयपुर राज्य के इतिहास में एक नए राजवंश का उल्लेख मिलता है, जिसे सलोणादित्य वंश कहा जाता है। यशवंत सिंह कठोच के अनुसार इस तृतीय परिवार का संस्थापक सलोणादित्य था, जबकि बालेेश्वर एवं पाण्डुकेश्वर ताम्रपत्रों के आधार पर इच्छटदेव को इसका संस्थापक माना गया है। सलोणादित्य के शासन से संबंधित जानकारी…
सिंहपुर का यदु/यादव राजवंश|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय सिंहपुर का यदु अथवा यादव राजवंश उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास में यमुना घाटी की एक महत्वपूर्ण स्थानीय राजसत्ता थी। इस वंश की जानकारी मुख्यतः रानी ईश्वरा की लाखामण्डल-प्रशस्ति से प्राप्त होती है। प्रशस्ति में वंश की ग्यारह पीढ़ियों के बारह नृपतियों का उल्लेख मिलता है, जिससे इसकी दीर्घकालीन राजनीतिक परंपरा का संकेत मिलता है।…
पौराणिक एवं वैदिक काल मे उत्तराखंड|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय वेदिक एवं पौराणिक काल उत्तराखण्ड के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक पहचान के निर्माण का महत्वपूर्ण चरण था। इस काल में उत्तराखण्ड को केवल एक पर्वतीय भू-भाग के रूप में नहीं, बल्कि ऋषियों, तपस्वियों, देवस्थलों और पवित्र नदियों की भूमि के रूप में देखा गया। विभिन्न वेदों, ब्राह्मण ग्रंथों, महाकाव्यों तथा पुराणों में इस क्षेत्र…