वसन्तदेव/बसन्तदेव |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
वसन्तदेव को उपलब्ध अभिलेखीय प्रमाणों के आधार पर कत्यूरी वंश का संस्थापक माना जाता है। प्रारम्भ में वह स्वतंत्र शासक न होकर उत्तराखण्ड क्षेत्र में एक सामन्त अथवा रक्षक के रूप में कार्य करता था। कन्नौज के शासक यशोवर्मन की शक्ति कमजोर होने के बाद उसने स्वतंत्र सत्ता स्थापित की तथा जोशीमठ के निकट कार्तिकेयपुर को अपनी राजधानी बनाया। उसके शासन से कत्यूरी सत्ता के प्रारम्भिक स्वरूप, धार्मिक सहिष्णुता और लोककल्याणकारी दृष्टिकोण की जानकारी मिलती है।
वसन्तदेव/बसन्तदेव प्रमुख तथ्य
- कत्यूरी वंश की स्थापना का श्रेय वसन्तदेव को दिया जाता है।
- प्रारम्भ में वसन्तदेव स्वतंत्र शासक नहीं था; उसे उत्तराखण्ड क्षेत्र में सामन्त या रक्षक के रूप में नियुक्त किया गया था।
- उसकी नियुक्ति कन्नौज के शासक यशोवर्मन के उत्तराखण्ड की तलहटियों में किए गए सैन्य अभियानों की पृष्ठभूमि में मानी जाती है।
- 733–745 ई. के मध्य यशोवर्मन को कश्मीर के शासक ललितादित्य मुक्तपीड़ से पराजित होना पड़ा, जिससे उसकी राजनीतिक शक्ति कमजोर हुई।
- यशोवर्मन की कमजोर स्थिति का लाभ उठाकर वसन्तदेव ने स्वतंत्र कत्यूरी सत्ता की नींव रखी।
- उसने जोशीमठ के निकट कार्तिकेयपुर को अपनी राजधानी बनाया।
- वसन्तदेव एक शक्तिशाली शासक था।
- उसकी राजकीय उपाधि ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ थी।
- उसने जोशीमठ में नृसिंह मंदिर का निर्माण करवाया
- उसने वैष्णवों को शरणेश्वर नामक ग्राम अग्रहार के रूप में प्रदान किया।
- धार्मिक दृष्टि से वह धर्म-सहिष्णु शासक था।
- बागेश्वर से प्राप्त शिलालेख में उसकी पत्नी का नाम राजनारायणी देवी मिलता है।
- सन्तदेव की मृत्यु के बाद उसका पुत्र शासक बना
- उसके पुत्र का नाम शिलालेख के क्षतिग्रस्त/मिटे होने के कारण ज्ञात नहीं हो सका, इसलिए उसे अज्ञात कत्यूरी शासक कहा जाता है।
- अज्ञात शासक ने भी ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज’ की उपाधि धारण की।
- वह शैव मत का अनुयायी था।
- बागेश्वर शिलालेख के अनुसार उसने वसन्तदेव द्वारा वैष्णवों को दिए गए शरणेश्वर ग्राम को व्याघ्रेश्वर देवता को अर्पित कर दिया।
- उसने जनकुल भुक्ति की ओर जाने वाले कई सार्वजनिक मार्गों का निर्माण कराया।
- सार्वजनिक मार्गों के निर्माण से उसके प्रजावत्सल एवं लोककल्याणकारी शासन का परिचय मिलता है।
निष्कर्ष
वसन्तदेव कत्यूरी इतिहास का एक महत्वपूर्ण शासक था, जिसने राजनीतिक परिस्थितियों का लाभ उठाकर स्वतंत्र कत्यूरी सत्ता की स्थापना की। कार्तिकेयपुर को राजधानी बनाकर उसने इस सत्ता को संगठित आधार प्रदान किया। उसकी ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ उपाधि, मंदिर निर्माण, वैष्णवों को अग्रहार प्रदान करना और धार्मिक सहिष्णुता उसके शासन की प्रमुख विशेषताएँ थीं। इस प्रकार वसन्तदेव को कत्यूरी राज्य के संस्थापक एवं प्रारम्भिक सुदृढ़ीकरणकर्ता के रूप में देखा जा सकता है।