कत्यूरी कालीन प्रांतीय प्रशासन |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

कत्यूरी राज्य का प्रशासन केवल केंद्रीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि विस्तृत क्षेत्र को प्रशासनिक इकाइयों में विभाजित करके संचालित किया जाता था। कत्यूरी अभिलेखों में उपरिक, आयुक्तक, विषयपति आदि अधिकाmरियों तथा भुक्ति एवं विषय जैसी प्रशासनिक इकाइयों के संकेत मिलते हैं। इससे राज्य में बहुस्तरीय प्रांतीय प्रशासन की व्यवस्था का पता चलता है। प्रांतीय प्रशासन के माध्यम से केंद्रीय सत्ता का प्रभाव विभिन्न क्षेत्रों तक पहुँचाया जाता था। इसके अतिरिक्त शक्तिशाली सामंतों एवं ठकुराइयों का भी राज्य की क्षेत्रीय व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान रहा होगा।

कत्यूरी कालीन प्रांतीय प्रशासन

प्रशासनिक इकाईअधिकारी
भुक्ति(प्रान्त)उपरिक
विषय(जिला)विषयपति
कर्मान्त(तहसील)कुलाचारी
गांवमहतम

प्रमुख बिंदु

  • कत्यूरी राज्य को प्रशासनिक सुविधा के लिए विभिन्न प्रान्तों में विभाजित किया गया था। प्रान्तीय प्रशासन के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों पर राजकीय नियंत्रण बनाए रखा जाता था।
  • सम्भवतः प्रान्त को ‘भुक्ति’ कहा जाता था। कत्यूरी अभिलेखों में ‘जयकुल भुक्ति’ का उल्लेख मिलता है।
  • प्रान्तीय प्रशासन का प्रमुख अधिकारी उपरिक था। इसकी तुलना गुप्तकालीन प्रान्तीय अधिकारी से की जाती है।
  • उपरिक के अधीन आयुक्तक जैसे अधिकारी कार्य करते थे, जो प्रान्त के विभिन्न क्षेत्रों के प्रशासन में सहयोग देते थे।
  • प्रान्तों का आगे विभाजन ‘विषय’ नामक प्रशासनिक इकाइयों में किया गया था। विषय को सामान्यतः जिले के समकक्ष समझा जाता है और इसका अधिकारी विषयपति कहलाता था।
  • उपलब्ध कत्यूरी साक्ष्यों से चार विषयों तथा लोकगाथाओं से एक अन्य विषय की जानकारी मिलती है। इस प्रकार कुल पाँच विषयों का उल्लेख किया जाता है।
  • कार्तिकेयपुर विषय — सम्भवतः जोशीमठ से गोमती नदी तक का क्षेत्र इसमें सम्मिलित था। इसे प्राचीन कत्यूर क्षेत्र से भी जोड़ा जाता है।
  • टंकणपुर विषय — अलकनन्दा-भागीरथी संगम क्षेत्र से संबंधित क्षेत्र का उल्लेख इससे जोड़ा जाता है
  • अन्तराग विषय — भागीरथी और अलकनन्दा के मध्य स्थित उपत्यका का क्षेत्र इससे संबंधित माना जाता है
  • एशाल विषय — भागीरथी एवं यमुना नदियों के मध्य के क्षेत्र से संबंधित माना जाता है।
  • मायपुरहाट — लोकपरंपराओं के आधार पर इसे हरिद्वार के निकटवर्ती तराई-भाबर क्षेत्र से संबंधित माना जाता है।
  • प्रशासन की सबसे छोटी इकाई ग्राम थी। ग्राम स्तर पर स्थानीय अधिकारियों के माध्यम से प्रशासनिक कार्यों का संचालन किया जाता था।
  • ग्राम प्रशासन से संबंधित अधिकारियों में महामनुष्य एवं मुकद्दम जैसे पदों का उल्लेख मिलता है।
  • कत्यूरी राज्य के अंतर्गत कुछ शक्तिशाली ठकुराइयाँ एवं सामंती क्षेत्र भी थे, जिनका शासन स्थानीय सामंतों द्वारा किया जाता था।
  • इस प्रकार कत्यूरी प्रांतीय प्रशासन में केन्द्रीय सत्ता से लेकर प्रान्त, विषय एवं ग्राम तक प्रशासनिक नियंत्रण की बहुस्तरीय व्यवस्था दिखाई देती है।

निष्कर्ष

कत्यूरी कालीन प्रांतीय प्रशासन से एक ऐसी बहुस्तरीय शासन व्यवस्था का पता चलता है, जिसके माध्यम से विस्तृत पर्वतीय राज्य के विभिन्न क्षेत्रों पर प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखा जाता था। भुक्ति, विषय एवं ग्राम जैसी प्रशासनिक इकाइयों तथा उपरिक, आयुक्तक एवं विषयपति जैसे अधिकारियों का उल्लेख इस व्यवस्था को समझने में महत्वपूर्ण है। विभिन्न विषयों का क्षेत्रीय विस्तार यह दर्शाता है कि कत्यूरी राज्य में प्रशासनिक विभाजन केवल नाममात्र का नहीं था, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों को व्यवस्थित रूप से नियंत्रित करने का प्रयास किया गया था। साथ ही, शक्तिशाली ठकुराइयों एवं सामंतों की उपस्थिति से स्थानीय सत्ता की भूमिका भी स्पष्ट होती है। इस प्रकार कत्यूरी प्रांतीय प्रशासन में केंद्रीय नियंत्रण, क्षेत्रीय प्रशासन एवं स्थानीय व्यवस्था के बीच समन्वय दिखाई देता है।

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