कत्यूरी कालीन आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

कत्यूरी राज्य में बाहरी सुरक्षा एवं सैन्य शक्ति के साथ-साथ आंतरिक शांति, कानून-व्यवस्था तथा प्रजा की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाता था। कत्यूरी ताम्रपत्रों एवं शिलालेखों में अनेक ऐसे पदाधिकारियों का उल्लेख मिलता है, जिनके कार्य अपराध नियंत्रण, पुलिस व्यवस्था, गुप्तचर व्यवस्था तथा राज्य एवं प्रजा की सुरक्षा से संबंधित थे। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य के भीतर शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए एक संगठित सुरक्षा तंत्र विकसित था। जागेश्वर एवं गोपेश्वर के अभिलेख भी प्रजा के जीवन, संपत्ति एवं सम्मान की सुरक्षा के प्रति राजकीय दायित्व की ओर संकेत करते हैं।

प्रमुख तथ्य

  • कत्यूरी राज्य में आंतरिक शांति, कानून-व्यवस्था तथा प्रजा के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा के लिए उचित व्यवस्था थी।
  • कत्यूरी ताम्रपत्रों एवं अभिलेखों में विभिन्न पुलिस एवं सुरक्षा अधिकारियों के पदनाम प्राप्त होते हैं, जो तत्कालीन आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी देते हैं।
  • दाण्डिक सम्भवतः दण्ड एवं शस्त्रों से सुसज्जित सैनिक/कर्मचारी थे, जो राज्य एवं जनता की संपत्ति की सुरक्षा से संबंधित कार्य करते थे।
  • दोषापराधिक अपराधियों को पकड़ने वाले विभाग का प्रमुख अधिकारी माना जाता है। इसका कार्य अपराधियों की धर-पकड़ एवं अपराध नियंत्रण से संबंधित था।
  • दुःसाध्यसाधनिक गुप्तचर विभाग का प्रमुख अधिकारी था। इसका कार्य राज्य के भीतर होने वाली संदिग्ध गतिविधियों एवं संभावित आंतरिक षड्यंत्रों पर निगरानी रखना माना जाता है।
  • दण्डपाशिक, दण्डनायक एवं महादण्डनायक जैसे पदाधिकारी पुलिस एवं दण्ड व्यवस्था से संबंधित थे। इनके माध्यम से अपराध नियंत्रण एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य किया जाता था।
  • चोरोद्धरिणिक चोरों एवं डाकुओं की धर-पकड़ तथा उनसे समाज एवं राज्य की सुरक्षा से संबंधित अधिकारी था।
  • कत्यूरी ताम्रलेखों से संकेत मिलता है कि प्रजा का उत्पीड़न करने वालों तथा अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाती थी।
  • जागेश्वर एवं गोपेश्वर शिलालेख कत्यूरी शासकों द्वारा प्रजा के जीवन, संपत्ति एवं सम्मान की सुरक्षा को महत्वपूर्ण राजकीय दायित्व मानने की ओर संकेत करते हैं।
  • आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में पुलिस, दण्ड एवं गुप्तचर तंत्र के साथ-साथ विभिन्न स्तरों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों की भूमिका थी। इससे राज्य में सुरक्षा एवं प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखने का प्रयास स्पष्ट होता है।
  • राज्य की सुदृढ़ आंतरिक व्यवस्था का एक संकेत यह भी माना जाता है कि समकालीन तीर्थयात्री उत्तराखंड की यात्राएँ अपेक्षाकृत सुरक्षित एवं निर्विघ्न रूप से कर सके।
  • इस प्रकार कत्यूरी कालीन आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि प्रजा के जीवन, संपत्ति, सम्मान तथा राज्य की आंतरिक शांति की रक्षा करना भी था।

निष्कर्ष

कत्यूरी कालीन आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था राज्य की प्रशासनिक संरचना का महत्वपूर्ण अंग थी। उपलब्ध ताम्रपत्रों एवं शिलालेखों में दाण्डिक, दोषापराधिक, दुःसाध्यसाधनिक, दण्डपाशिक, दण्डनायक, महादण्डनायक तथा चोरोद्धरिणिक जैसे पदों का उल्लेख एक विकसित सुरक्षा एवं दण्ड व्यवस्था की ओर संकेत करता है। पुलिस व्यवस्था के साथ गुप्तचर तंत्र की उपस्थिति से राज्य के भीतर अपराधों तथा संभावित षड्यंत्रों पर नियंत्रण रखने का प्रयास दिखाई देता है। जागेश्वर एवं गोपेश्वर अभिलेख भी प्रजा की सुरक्षा को राजकीय दायित्व से जोड़ते हैं। इस प्रकार कत्यूरी शासकों ने आंतरिक शांति, अपराध नियंत्रण, गुप्तचर व्यवस्था तथा प्रजा के जीवन एवं संपत्ति की सुरक्षा को शासन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया था।

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