कत्यूरी स्थापत्य कला — शिखरयुक्त मंदिर |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

परिचय

कत्यूरी कालीन स्थापत्य कला में शिखरयुक्त मंदिरों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। छत्रयुक्त मंदिरों के विपरीत इन मंदिरों की प्रमुख पहचान इनके ऊपर निर्मित शिखर से होती है। ये सामान्यतः वर्गाकार योजना पर आधारित तथा पाषाण से निर्मित होते हैं। इनके निर्माण में पाषाण के साथ लोहे की कीलों एवं पट्टियों का भी प्रयोग किया गया। उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में स्थित बैजनाथ, बागेश्वर, जागेश्वर, कटारमल और द्वाराहाट आदि के मंदिर इस स्थापत्य परंपरा के महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

प्रमुख बिंदु

  • शिखरयुक्त मंदिर उत्तराखंड के विभिन्न क्षेत्रों में पाए जाते हैं और कत्यूरी कालीन स्थापत्य की महत्वपूर्ण श्रेणी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • ये मंदिर सामान्यतः वर्गाकार योजना पर निर्मित होते हैं तथा इनके शीर्ष पर छत्र के स्थान पर शिखर का निर्माण किया जाता है।
  • शिखरयुक्त मंदिर मुख्यतः पाषाण निर्मित होते हैं। इनके निर्माण में स्थानीय पाषाणों का प्रयोग किए जाने की परंपरा दिखाई देती है।
  • पाषाण के अतिरिक्त इन मंदिरों के निर्माण में लोहे की कीलों एवं पट्टियों का भी प्रयोग किया गया था, जो निर्माण को मजबूती प्रदान करने में सहायक थे।
  • इस प्रकार के मंदिर बैजनाथ, बागेश्वर, जागेश्वर, कटारमल, द्वाराहाट, जोशीमठ तथा आदिबद्री आदि स्थानों में पाए जाते हैं।
  • शिखरयुक्त मंदिरों की एक प्रमुख विशेषता परिवार या सहायक मंदिरों के समूह का होना है। इनमें मुख्य मंदिर के आसपास छोटे-छोटे सहायक मंदिर निर्मित किए जाते थे।
  • द्वाराहाट के मंदिर-समूह को परिवार मंदिरों की परंपरा का प्रमुख उदाहरण माना जाता है, जहाँ मंदिरों का समूह कत्यूरीकालीन स्थापत्य की विशिष्ट योजना को प्रदर्शित करता है।
  • इन मंदिरों की स्थापत्य संरचना में नागर शैली का प्रभाव दिखाई देता है, साथ ही स्थानीय पर्वतीय स्थापत्य परंपरा के कारण इनमें विशिष्ट क्षेत्रीय विशेषताएँ भी विकसित हुईं

निष्कर्ष

शिखरयुक्त मंदिर कत्यूरी कालीन स्थापत्य कला की एक महत्वपूर्ण एवं विशिष्ट शैली का प्रतिनिधित्व करते हैं। वर्गाकार योजना, पाषाण निर्माण, शिखर की उपस्थिति, लोहे की कीलों एवं पट्टियों का प्रयोग तथा परिवार मंदिरों के समूह इनकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। बैजनाथ, बागेश्वर, जागेश्वर, कटारमल, द्वाराहाट, जोशीमठ और आदिबद्री जैसे मंदिर इस स्थापत्य परंपरा की समृद्धि को प्रदर्शित करते हैं। विशेष रूप से द्वाराहाट के मंदिर-समूह से कत्यूरी काल में विकसित परिवार मंदिरों की परंपरा का पता चलता है। इस प्रकार शिखरयुक्त मंदिर उत्तराखंड की प्राचीन नागर-प्रभावित पर्वतीय स्थापत्य परंपरा की महत्वपूर्ण कड़ी हैं।

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