सोर शाखा|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
सोर राज्य वर्तमान पिथौरागढ़ जनपद में स्थित परवर्ती कात्यूरी सत्ता का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। यह क्षेत्र सीरा के दक्षिण में स्थित था और यहाँ के बम अथवा ब्रह्म राजा डोटी की कात्यूरी शाखा से संबंधित माने जाते हैं। सोर शाखा के इतिहास की जानकारी मुख्यतः ताम्रपत्रों और स्थानीय परंपराओं से प्राप्त होती है। इसके शासकों ने पिथौरागढ़ क्षेत्र में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाए रखी।
प्रमुख तथ्य
- सोर राज्य सीरा के दक्षिण में वर्तमान पिथौरागढ़ जनपद में स्थित था।
- सोर के बम/ब्रह्म राजा डोटी की कात्यूरी शाखा से संबंधित माने जाते हैं।
- एटकिंसन के अनुसार, ये शासक डोटी के राजपरिवार के कुँवर थे।
- इस शाखा की राजधानी पिथौरागढ़ के निकट स्थित उदयपुर थी।
- इस शाखा के राजा विजयब्रह्म का मझेड़ा ताम्रपत्र शक 1346 (1424 ई.) का है।
- शक 1342 (1420 ई.) का सिलौनी ताम्रपत्र ज्ञानचन्द और विजयब्रह्म द्वारा संयुक्त रूप से जारी किया गया था।
- डॉ. मोहन भट्ट के अनुसार विजयबम के बाद क्रमशः शक्तिबम और प्रतापबम गद्दी पर बैठे।
निष्कर्ष
सोर शाखा डोटी की कात्यूरी शाखा से संबंधित एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय सत्ता थी। इसके बम अथवा ब्रह्म शासकों ने वर्तमान पिथौरागढ़ क्षेत्र में अपना राजनीतिक प्रभाव बनाए रखा। विजयब्रह्म के मझेड़ा और सिलौनी ताम्रपत्र इस शाखा के इतिहास के महत्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोत हैं। सोर शाखा इस तथ्य को स्पष्ट करती है कि मूल कात्यूरी सत्ता के विखंडन के बाद उसकी शाखाओं ने कुमाऊँ के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान विकसित की।