जीतू बगड़वाल
परिचय
जीतू बगड़वाल गढ़वाल की प्रसिद्ध लोकपरंपरा और वीरगाथाओं के प्रमुख पात्रों में से एक हैं। उनके जीवन से संबंधित जानकारी मुख्यतः पवाड़ों एवं लोकगाथाओं से प्राप्त होती है। परंपरा के अनुसार जीतू बगड़वाल टिहरी क्षेत्र के बगोड़ी गाँव के निवासी थे और पंवार शासक राजा मानशाह के समय उनका उल्लेख मिलता है। लोकगाथाओं में उन्हें साहसी एवं प्रभावशाली व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है तथा मानशाह द्वारा उन्हें भोट क्षेत्र का फौजदार नियुक्त किए जाने की कथा मिलती है। उनकी कथा आज भी गढ़वाल की लोक-सांस्कृतिक परंपरा में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
प्रमुख बिंदु
- जीतू बगड़वाल टिहरी क्षेत्र के बगोड़ी गाँव के निवासी बताए जाते हैं।
- जीतू बगड़वाल से संबंधित पवाड़े/लोकगाथाएँ आज भी गढ़वाल में प्रचलित हैं।
- लोकपरंपरा के अनुसार उनके पिता का नाम गरीबाराई तथा माता का नाम सुमेरू था।
- जीतू बगड़वाल राजा मानशाह के समकालीन थे।
- लोकगाथाओं के अनुसार मानशाह ने जीतू बगड़वाल को भोट क्षेत्र का फौजदार नियुक्त किया था।
- जीतू बगड़वाल के पवाड़ों में उनके साहस, वीरता और प्रभावशाली व्यक्तित्व का वर्णन मिलता है।
- लोकगाथाओं में जीतू बगड़वाल के पास अपनी तांबे की खान होने का भी वर्णन मिलता है।
- परंपरा के अनुसार बगोड़ी के सेरा में जीतू बगड़वाल को उनके बैलों सहित आंछरियों ने हर लिया था। यह प्रसंग उनकी प्रसिद्ध लोकगाथा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निष्कर्ष
जीतू बगड़वाल गढ़वाल की लोक-स्मृति, पवाड़ा परंपरा और वीरगाथात्मक साहित्य के महत्वपूर्ण पात्र हैं। उनका संबंध टिहरी क्षेत्र के बगोड़ी गाँव से माना जाता है और उन्हें राजा मानशाह के समय का व्यक्ति बताया जाता है। लोकगाथाओं के अनुसार मानशाह ने उन्हें भोट क्षेत्र का फौजदार नियुक्त किया था। उनके पिता गरीबाराई और माता सुमेरू के नाम भी लोकपरंपरा में मिलते हैं। उनकी कथा में तांबे की खान तथा बगोड़ी के सेरा में आंछरियों द्वारा उन्हें बैलों सहित हर ले जाने का प्रसंग विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यद्यपि इन विवरणों में लोकविश्वास और ऐतिहासिक तथ्य दोनों के तत्व मौजूद हैं, फिर भी जीतू बगड़वाल की गाथाएँ गढ़वाल की लोक-संस्कृति और वीर परंपरा को समझने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।