सलोणादित्य|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
भूदेव के पश्चात कार्तिकेयपुर राज्य के इतिहास में एक नए राजवंश का उल्लेख मिलता है, जिसे सलोणादित्य वंश कहा जाता है। यशवंत सिंह कठोच के अनुसार इस तृतीय परिवार का संस्थापक सलोणादित्य था, जबकि बालेेश्वर एवं पाण्डुकेश्वर ताम्रपत्रों के आधार पर इच्छटदेव को इसका संस्थापक माना गया है। सलोणादित्य के शासन से संबंधित जानकारी सीमित है, फिर भी उपलब्ध अभिलेखीय संकेत उसके राजनीतिक एवं धार्मिक व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हैं। वह शैव धर्म तथा नंदा देवी का उपासक था और युद्ध-कौशल के लिए भी प्रसिद्ध था।
सलोणादित्य प्रमुख तथ्य
- भूदेव के पश्चात सलोणादित्य कार्तिकेयपुर राज्य की राजगद्दी पर बैठा। उसके साथ कार्तिकेयपुर राज्य में एक नए राजपरिवार का उल्लेख मिलता है।
- यशवंत सिंह कठोच के अनुसार सलोणादित्य तृतीय परिवार के संस्थापक तथा सलोणादित्य वंश का प्रवर्तक था।
- इसके विपरीत बालेेश्वर एवं पाण्डुकेश्वर ताम्रपत्रों के अनुसार सलोणादित्य वंश का संस्थापक सलोणादित्य नहीं, बल्कि उसका पुत्र इच्छटदेव था।
- कत्यूरी अभिलेखों में सलोणादित्य की किसी विशिष्ट राजकीय उपाधि का उल्लेख नहीं मिलता है।
- सलोणादित्य की रानी का नाम सिंधवली देवी बताया गया है।
- सलोणादित्य को सलोणादित्य वंश की स्थापना करने वाला शासक माना जाता है, विशेषकर यशवंत सिंह कठोच के मत के अनुसार।
- सलोणादित्य शैव धर्म का अनुयायी था तथा वह नंदा देवी की भी पूजा करता था। इससे उसके धार्मिक जीवन में शैव एवं स्थानीय देवी-उपासना दोनों के प्रभाव का संकेत मिलता है।
- सलोणादित्य को शत्रु-व्यूह को नष्ट करने वाला बताया गया है, जिससे उसकी सैन्य क्षमता एवं युद्ध-कौशल का पता चलता है।
- सलोणादित्य का शासन कत्यूरी इतिहास में तृतीय राजपरिवार के उदय से जुड़ा हुआ है, जिसने आगे चलकर कार्तिकेयपुर राज्य की सत्ता को कई पीढ़ियों तक बनाए रखा।
- सलोणादित्य के पश्चात उसका पुत्र इच्छटदेव शासक बना, जिसके समय इस राजपरिवार की राजनीतिक एवं अभिलेखीय जानकारी अधिक स्पष्ट रूप से प्राप्त होती है।
निष्कर्ष
सलोणादित्य कार्तिकेयपुर राज्य के इतिहास में तृतीय राजपरिवार के उदय से जुड़ा महत्वपूर्ण शासक था। उसके संबंध में उपलब्ध जानकारी सीमित होने के बावजूद उसकी राजनीतिक एवं धार्मिक भूमिका स्पष्ट होती है। यशवंत सिंह कठोच ने उसे सलोणादित्य वंश का संस्थापक माना है, जबकि बालेेश्वर एवं पाण्डुकेश्वर ताम्रपत्रों के आधार पर इच्छटदेव को संस्थापक मानने का मत मिलता है। सलोणादित्य शैव एवं नंदा देवी का उपासक था और उसे शत्रु-व्यूह का विनाश करने वाला बताया गया है। इस प्रकार वह कत्यूरी इतिहास में वंशीय परिवर्तन और तृतीय परिवार की स्थापना की परंपरा का प्रमुख आधार माना जाता है।