खर्परदेव |Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
खर्परदेव कत्यूरी वंश के प्रारम्भिक एवं महत्वपूर्ण शासकों में माना जाता है। उसके शासनकाल का उल्लेख मुख्यतः बागेश्वर शिलालेख से प्राप्त होता है। वह ऐसे समय में कत्यूरी सत्ता का प्रतिनिधित्व कर रहा था, जब उत्तर भारत में कन्नौज के यशोवर्मन और कश्मीर के ललितादित्य मुक्तपीड़ जैसी शक्तियाँ हिमालयी क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रही थीं। इस राजनीतिक परिस्थितियों के बीच खर्परदेव ने कार्तिकेयपुर केन्द्रित कत्यूरी सत्ता को बनाए रखने और सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
खर्परदेव प्रमुख तथ्य
- बागेश्वर शिलालेख में वसन्तदेव के पुत्र (अज्ञात शासक) के बाद खर्परदेव का नाम मिलता है।
- उसने अपने पूर्ववर्ती कत्यूरी शासकों की भाँति ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ की उपाधि धारण की।
- खर्परदेव कन्नौज के शासक यशोवर्मन का समकालीन था।
- यशोवर्मन ने अपने शासनकाल में हिमालय के कुछ क्षेत्रों तक अपना प्रभाव एवं विजय स्थापित की थी।
- कश्मीर के शासक ललितादित्य मुक्तपीड़ के साम्राज्य-विस्तार का उल्लेख राजतरंगिणी में मिलता है
- राजतरंगिणी के अनुसार ललितादित्य ने अपने साम्राज्य का विस्तार गढ़वाल क्षेत्र तक किया था।
- सम्भवतः इसी व्यापक राजनीतिक उथल-पुथल के समय खर्परदेव ने कार्तिकेयपुर पर अपना अधिकार स्थापित किया।
- उसकी पत्नी का नाम कल्याण देवी था।
निष्कर्ष
खर्परदेव का शासन कत्यूरी सत्ता के प्रारम्भिक विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण था। उसकी ‘परम भट्टारक महाराजाधिराज परमेश्वर’ उपाधि कत्यूरी शासक के रूप में उसकी प्रतिष्ठित स्थिति को दर्शाती है। यशोवर्मन और ललितादित्य जैसे समकालीन शक्तिशाली शासकों के प्रभाव के बावजूद कत्यूरी सत्ता का अस्तित्व बनाए रहना इस बात का संकेत है कि इस काल तक कार्तिकेयपुर कत्यूरी शक्ति का एक महत्वपूर्ण राजनीतिक केन्द्र बन चुका था।