किमनी गाँव,ल्वेथाप,फड़कानौली,पेटशाल,फलसीमा,हथ्वाल घोड़ा | Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material
परिचय
उत्तराखंड में लाखु गुफा और ग्वारख्या उड्यार के अतिरिक्त भी अनेक स्थानों से प्रागैतिहासिक शैलचित्र एवं शैलाश्रय प्राप्त हुए हैं। ये स्थल राज्य के विभिन्न नदी-घाटी क्षेत्रों में प्राचीन मानव की कलात्मक गतिविधियों और सांस्कृतिक जीवन के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। इन शैलचित्रों में मानव, पशु, शिकार, नृत्य तथा विभिन्न गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया है। कुछ स्थलों से प्राप्त आलेख शैलचित्र परंपरा के साथ प्राचीन लेखन के साक्ष्य भी प्रस्तुत करते हैं। विशेष रूप से अल्मोड़ा का सुयाल नदी क्षेत्र शैलचित्रों की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। किमनी, ल्वेथाप, फड़कानौली, पेटशाल, फलसीमा, हथ्वाल घोड़ा और हुडली जैसे स्थल उत्तराखंड की प्रागैतिहासिक कला और सांस्कृतिक विरासत को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
1. किमनी गाँव
- किमनी गाँव की खोज 1998 ई. में डॉ. एम. पी. जोशी ने की।
- यह चमोली जनपद में थराली के निकट पिंडर नदी घाटी में स्थित है।
- यहाँ से हल्के सफेद रंग से चित्रित हथियारों एवं पशुओं के शैलचित्र प्राप्त हुए हैं।
- यहाँ से काले रंग का एक लगभग विलुप्त हो चुका आलेख भी मिला है।
- डॉ. यशोधर मठपाल के अनुसार यह आलेख लगभग 2100–1400 वर्ष पुराना है तथा शंख लिपि में लिखा गया है।
- शंख लिपि का यह लेख अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
2. ल्वेथाप
- ल्वेथाप दीनापानी से लगभग 3 किमी दूर, अल्मोड़ा में स्थित है।
- यहाँ लाल रंग से चित्रित तीन शैलाश्रय प्राप्त हुए हैं।ल्वेथाप का अर्थ ‘रक्त चित्र’ माना जाता है।
- शैलचित्रों में मानव को शिकार करते तथा हाथों में हाथ डालकर नृत्य करते हुए दिखाया गया है।
- अल्मोड़ा जनपद के शैलाश्रय सामान्यतः स्थूल कोटि के माने जाते हैं।
- यहाँ से पूर्वी क्षितिज की ओर लाखु गुफा का दृश्य दिखाई देता है।
- डॉ. यशोधर मठपाल के अनुसार इससे यह संभावना व्यक्त की गई है कि ल्वेथाप और लाखु गुफा के निवासी कभी आपस में संपर्क में रहे होंगे।
3. फड़कानौली
- फड़कानौली की खोज 1985 ई. में डॉ. यशोधर मठपाल ने की।
- यह अल्मोड़ा जनपद में स्थित है।
- यहाँ से तीन शैलाश्रयों की खोज हुई है।
- यह स्थल सुयाल नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थित है।
- फड़कानौली लाखु गुफा के निकट स्थित महत्वपूर्ण शैलचित्र स्थल है।
4. पेटशाल
- पेटशाल की खोज 1989 ई. में डॉ. यशोधर मठपाल ने की।यह अल्मोड़ा जनपद में स्थित है।
- यहाँ से कत्थई रंग की मानवाकृतियाँ प्राप्त हुई हैं
- यह स्थल सुयाल नदी के प्रवाह क्षेत्र में स्थित है।
- पेटशाल भी लाखु गुफा के निकट स्थित है।
5. फलसीमा
- फलसीमा अल्मोड़ा में स्थित महत्वपूर्ण शैलचित्र स्थल है।
- यहाँ से योग एवं नृत्य मुद्रा में मानव आकृतियाँ प्राप्त हुई हैं।
- फलसीमा में दो चट्टानें हैं, जिन पर दो कपमार्क्स बने हुए हैं।
6. हथ्वाल घोड़ा
- हथ्वाल घोड़ा अल्मोड़ा जनपद का एक महत्वपूर्ण शैलचित्र स्थल है।
- यहाँ प्राप्त चित्रों में सींगों का मुखौटा पहने व्यक्ति का चित्रण उल्लेखनीय है।
7. हुडली
- हुडली उत्तरकाशी की यमुना घाटी में स्थित है।
- यहाँ से नीले रंग में चित्रित शैलचित्र प्राप्त हुए हैं।
- हुडली के शैलचित्रों में नीले रंग का प्रयोग विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
- यहाँ से काले रंग में शंख लिपि का एक लेख भी प्राप्त हुआ है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
- ठड़ूंगा शैलचित्र — उत्तरकाशी।
- मांगोली शैलचित्र — नैनीताल।
- उत्तराखंड में शैलचित्रों का प्रमुख क्षेत्र सुयाल नदी का क्षेत्र माना जाता है।
- 2020 ई. में अल्मोड़ा के पत्थरकोट गाँव में प्रागैतिहासिक शैलचित्र पाए गए।
- अल्मोड़ा के कालामाटी एवं मल्लापैनाली में भी प्रागैतिहासिक शैलचित्र मिले हैं।
- महरू गुफा रामगंगा घाटी में स्थित है; इसके शैलचित्र वर्तमान में मिट चुके हैं।
- कसार देवी, अल्मोड़ा, भी प्रागैतिहासिक शैलचित्र परंपरा से संबंधित महत्वपूर्ण स्थल है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड के विभिन्न शैलचित्र स्थल प्रागैतिहासिक मानव के जीवन और उसकी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति को समझने के लिए महत्वपूर्ण पुरातात्विक साक्ष्य प्रदान करते हैं। इन स्थलों पर मानव और पशु आकृतियों के साथ शिकार, नृत्य तथा अन्य गतिविधियों का चित्रण तत्कालीन जीवन-पद्धति और सामूहिक चेतना की झलक देता है। वहीं किमनी और हुडली जैसे स्थलों से प्राप्त शंख लिपि के आलेख शैलचित्र परंपरा के साथ प्राचीन लेखन की उपस्थिति की ओर भी संकेत करते हैं। अल्मोड़ा का सुयाल नदी क्षेत्र इन स्थलों की विशेष सघनता के कारण महत्वपूर्ण है। इस प्रकार, ये स्थल उत्तराखंड के प्रागैतिहासिक कला, संस्कृति और मानव सभ्यता के प्रारंभिक विकास को समझने के महत्वपूर्ण स्रोत हैं।
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1. यह चमोली जनपद में थराली के निकट पिंडर नदी घाटी में स्थित है।
2. यहाँ से हल्के सफेद रंग से चित्रित हथियारों एवं पशुओं के शैलचित्र मिले हैं।
सही उत्तर चुनिए—
1. किमनी का लगभग 2100–1400 वर्ष पुराना आलेख शंख लिपि में लिखा गया है।
2. यह आलेख अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
सही उत्तर है—