जॉन हैलिट बैटन (1848–1856 ई.)

परिचय

जॉन हैलिट बैटन ने 1848 से 1856 ई. तक कुमाऊँ के कमिश्नर के रूप में कार्य किया। उसके कार्यकाल को कुमाऊँ में ब्रिटिश शासन का “स्वर्णयुग” माना जाता है। बैटन ने प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ शिक्षा, चिकित्सा, परिवहन, पर्यटन, चाय की खेती तथा संचार व्यवस्था के विकास पर विशेष ध्यान दिया। उसके समय अल्मोड़ा से नैनीताल में कमिश्नर कार्यालय का स्थानांतरण, सड़क मार्गों का सर्वेक्षण, डाक बंगलों की व्यवस्था तथा चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार जैसे महत्वपूर्ण कार्य हुए। उसके प्रशासन में जॉन स्ट्रैची और हेनरी रैमजे जैसे अधिकारियों का भी सहयोग रहा।

जॉन हैलिट बैटन के प्रमुख कार्य एवं घटनाएँ

  • जॉन हैलिट बैटन का कार्यकाल 1848 से 1856 ई. तक रहा।
  • बैटन के काल को कुमाऊँ में ब्रिटिश शासन का “स्वर्णयुग” माना जाता है।
  • बैटन ने 1836 से 1848 ई. तक गोबान एवं लुशिंगटन के सहायक के रूप में कार्य किया था।
  • बैटन के समय अप्रशिक्षित पटवारियों के स्थान पर योग्य एवं प्रशिक्षित पटवारियों की नियुक्ति की गई।
  • 1849 ई. में अल्मोड़ा दवाखाने की शाखाएँ पिथौरागढ़ एवं लोहाघाट में स्थापित की गईं।
  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर बैटन ने विशेष ध्यान दिया। 1848 ई. तक गढ़वाल में केवल एक डॉक्टर था, इसलिए बैटन ने 1849 ई. में एक और डॉक्टर की नियुक्ति की।
  • बैटन के कार्यकाल में डाक बंगलों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया गया तथा अप्रैल 1849 ई. में डाक बंगले यात्रियों के लिए खोल दिए गए।
  • सितंबर 1850 ई. में कोसी नदी के रास्ते बमौरी–अल्मोड़ा मार्ग के सर्वेक्षण का कार्य प्रारंभ किया गया।
  • इसके बाद जून 1855 ई. में खैरना होते हुए नैनीताल–कोसी घाटी के स्थायी मार्ग के निर्माण के लिए 5,000 रुपये स्वीकृत किए गए।
  • बैटन ने नैनीताल को एक लोकप्रिय पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने का प्रयास किया।
  • 1850 ई. में अल्मोड़ा में लंदन मिशनरी सोसाइटी की स्थापना पादरी रेवरेंड द्वारा की गई।
  • वरिष्ठ सहायक कमिश्नर स्ट्रैची के प्रयासों से गढ़वाल में श्रीनगर में लोहे के प्रथम सस्पेंशन पुल का निर्माण कराया गया। इसका निर्माण कार्य 1853 ई. में पूर्ण हुआ।
  • बैटन के समय अक्टूबर 1855 ई. में कुमाऊँ कमिश्नर का कार्यालय अल्मोड़ा से नैनीताल स्थानांतरित कर दिया गया।
  • बैटन के कार्यकाल में 22 दिसंबर 1851 ई. को उत्तराखण्ड में पहली बार रेल रुड़की से पिरान कलियर के बीच चलाई गई।
  • 1852–53 ई. में चाय की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए बैटन ने लोगों को चाय की खेती हेतु भूमि उपलब्ध कराई।
  • बैटन को प्रशासनिक कार्यों में जॉन स्ट्रैची तथा हेनरी रैमजे जैसे वरिष्ठ सहायक कमिश्नरों का सहयोग प्राप्त हुआ।

निष्कर्ष

जॉन हैलिट बैटन का कार्यकाल कुमाऊँ के ब्रिटिश प्रशासन के विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था। उसके समय प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक योग्य एवं व्यवस्थित बनाने के साथ-साथ चिकित्सा, परिवहन, पर्यटन, चाय की खेती तथा संचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई। 1849 में चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार, डाक बंगलों को यात्रियों के लिए खोलना, सड़क मार्गों का सर्वेक्षण तथा 1855 में कमिश्नर कार्यालय को अल्मोड़ा से नैनीताल स्थानांतरित करना उसके प्रमुख कार्य थे। उसके समय रुड़की–पिरान कलियर रेल सेवा का प्रारंभ भी हुआ। इन विविध प्रशासनिक एवं विकासात्मक कार्यों के कारण बैटन के काल को कुमाऊँ में ब्रिटिश शासन का स्वर्णयुग कहा जाता है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *