जॉर्ज थॉमस लुशिंगटन (1838–1848 ई.)

परिचय

जॉर्ज थॉमस लुशिंगटन ने 1838 से 1848 ई. तक कुमाऊँ के कमिश्नर के रूप में कार्य किया। उसके कार्यकाल को सामान्यतः शांतिपूर्ण प्रशासन का काल माना जाता है। इस अवधि में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, पुल, नगर प्रशासन तथा कृषि-बागवानी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य हुए। विशेष रूप से नैनीताल के नगरीकरण की शुरुआत, बद्रीनाथ-केदारनाथ मार्ग पर स्वास्थ्य सुविधा, अल्मोड़ा में औषधालय तथा विभिन्न सड़क-पुल निर्माण उसके कार्यकाल की प्रमुख विशेषताएँ थीं। इसी काल में कुमाऊँ और गढ़वाल में भूमि-बंदोबस्त की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी।

जॉर्ज थॉमस लुशिंगटन के प्रमुख कार्य एवं घटनाएँ

  • 30 नवंबर 1838 ई. को जॉर्ज थॉमस लुशिंगटन को कुमाऊँ का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया।
  • 1839 ई. में हडलस्टन ने लुशिंगटन के कार्यकाल में श्रीनगर में एक स्कूल की स्थापना की।
  • 1840 ई. में बद्रीनाथ–केदारनाथ मार्ग पर यात्रियों की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधा के लिए लुशिंगटन ने एक स्वदेशी चिकित्सक की नियुक्ति की।
  • 1842 ई. में नैनीताल नगरपालिका के गठन के लिए एक्ट पारित किया गया।
  • अप्रैल 1845 ई. में नैनीताल नगरपालिका के प्रथम बाई-लॉज का अनुमोदन किया गया।
  • लुशिंगटन के कार्यकाल में नैनीताल के नगरीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ हुई।
  • 1845 ई. में खैरना–नैनीताल मार्ग पर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया गया।
  • 1847 ई. में नैनीताल में एक असिस्टेंट सर्जन की नियुक्ति की गई।
  • 1848 ई. में अल्मोड़ा में डिस्पेंसरी कमेटी का गठन किया गया तथा वहाँ एक औषधालय स्थापित किया गया।
  • 1848 ई. में बागेश्वर में गोमती नदी पर पुल का निर्माण लुशिंगटन के समय कराया गया।
  • लुशिंगटन के कार्यकाल को सामान्यतः “शांतकाल” के रूप में जाना जाता है।
  • 1842 ई. में ऊपरी गंगा नहर के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ।
  • ऊपरी गंगा नहर का निर्माण कार्य 1854 ई. में जॉन हैलेट बैटन के कार्यकाल में पूरा हुआ। उस समय भारत के गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी थे।
  • गंगा नहर के निर्माण के दौरान दिसंबर 1851 ई. में रुड़की से पिरान कलियर के बीच रेलगाड़ी चलाए जाने का उल्लेख मिलता है।
  • गंगा नहर को अस्तित्व में लाने का प्रमुख श्रेय सर प्रोबी थॉमस कॉटले को दिया जाता है। उन्हें राजेंद्र प्रसाद बलोदी द्वारा “आधुनिक भागीरथ” कहा गया है।
  • 1983 ई. में गंगा नहर के आधुनिकीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया।
  • 1842 ई. में तराई जिले का गठन किया गया।
  • 1843 ई. में डॉ. जेमिसन कुमाऊँ के भ्रमण पर आए।
  • 1844 ई. में देहरादून के निकट कौलागढ़ में सरकारी बागान की शुरुआत डॉ. जेमिसन के नेतृत्व में की गई।
  • 1841 ई. में हवालबाग (अल्मोड़ा) में मेजर कॉर्बेट द्वारा चाय का बगीचा लगाया गया।
  • प्रसिद्ध कवि गुमानी पंत ने लुशिंगटन की प्रशंसा में कुछ छंदों की रचना की।
  • लुशिंगटन ने जॉन हैलेट बैटन को बंदोबस्ती अधिकारी नियुक्त किया।
  • बैटन ने 1840 ई. में गढ़वाल तथा 1844 ई. में कुमाऊँ में भूमि-बंदोबस्त कराया।
  • बैटन द्वारा कराया गया यह बंदोबस्त खसरा सर्वेक्षण पद्धति पर आधारित था और इसे “बीस साला बंदोबस्त” भी कहा जाता है।

निष्कर्ष

जॉर्ज थॉमस लुशिंगटन का कार्यकाल ब्रिटिश उत्तराखण्ड के प्रशासनिक इतिहास में अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण एवं विकासात्मक काल के रूप में महत्वपूर्ण है। उसके समय नैनीताल के नगरीकरण, शिक्षा, चिकित्सा, सड़क एवं पुल निर्माण तथा प्रशासनिक संस्थाओं के विकास को गति मिली। 1842 में नैनीताल नगरपालिका संबंधी एक्ट, 1845 में बाई-लॉज, 1847 में असिस्टेंट सर्जन तथा 1848 में अल्मोड़ा औषधालय जैसी व्यवस्थाएँ इसी काल की प्रमुख उपलब्धियाँ थीं। साथ ही बैटन के भूमि-बंदोबस्त ने राजस्व प्रशासन को अधिक व्यवस्थित किया। इस प्रकार लुशिंगटन का काल उत्तराखण्ड में ब्रिटिश प्रशासन के विस्तार के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और नगरीय विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *