गोरखा प्रशासन व्यवस्था
परिचय
उत्तराखंड में गोरखों का शासन 1815 ई. तक रहा। गोरखों ने कुमाऊँ और गढ़वाल के बड़े हिस्से पर अपनी सैन्य शक्ति के बल पर अधिकार स्थापित किया था, इसलिए उनकी प्रशासनिक व्यवस्था में भी सैन्य तत्व प्रमुख रहा। गोरखा प्रशासन मूलतः सैन्य एवं केंद्रीकृत शासन पर आधारित था, जिसमें शासन की बागडोर नेपाल के राजा द्वारा नियुक्त अधिकारियों के हाथों में रहती थी। हालांकि, उन्होंने केवल नेपाली प्रशासनिक व्यवस्था को लागू नहीं किया, बल्कि नेपाल तथा उत्तराखंड में प्रचलित प्रशासनिक परंपराओं का मिश्रित रूप अपनाया। स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक और सैन्य अधिकारियों को व्यापक अधिकार दिए गए थे।
गोरखा प्रशासन व्यवस्था प्रमुख तथ्य
- उत्तराखंड में गोरखों का शासन 1815 ई. तक रहा। उन्होंने उत्तराखंड को मुख्यतः सैन्य शक्ति के माध्यम से विजित किया, इसलिए उनकी शासन व्यवस्था भी सैन्य नियंत्रण पर आधारित थी।
- गोरखा प्रशासन में नेपाल की शासन व्यवस्था तथा उत्तराखंड में पहले से प्रचलित प्रशासनिक परंपराओं का मिश्रित रूप दिखाई देता है।
- गोरखा सेना जिस क्षेत्र पर विजय प्राप्त करती जाती थी, नेपाल का राजा उस क्षेत्र में अपना प्रतिनिधि नियुक्त करता जाता था।
- गोरखा प्रशासन में प्रमुख अधिकारियों के रूप में सुब्बा, नायब सुब्बा तथा सेनापति नियुक्त किए जाते थे।
- सुब्बा या सूबेदार गवर्नर के समान उच्च प्रशासनिक अधिकारी होता था। वह अपने क्षेत्र में शासन का प्रमुख प्रतिनिधि था।
- सुब्बा की सहायता के लिए नायब सुब्बा तथा सेनापति नियुक्त किए जाते थे।
- इन उच्च अधिकारियों का प्रतिवर्ष स्थानांतरण किया जाता था, जिससे प्रशासन पर केंद्रीय नियंत्रण बनाए रखा जा सके।
- सुब्बा तथा अन्य प्रमुख अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक, आर्थिक, सैनिक तथा न्यायिक अधिकार प्राप्त थे।
- इन अधिकारियों के पास अत्यधिक अधिकार होने के कारण गोरखा प्रशासन का स्वरूप काफी हद तक स्वेच्छाचारी था।
- गोरखों द्वारा प्रशासित उत्तराखंड के क्षेत्रों को अनेक फौजदारियों तथा परगनों में विभाजित किया गया था।
- विभिन्न फौजदारियों और परगनों में सैनिक अधिकारियों की नियुक्ति की जाती थी, जिससे प्रशासन और सैन्य नियंत्रण दोनों को मजबूत रखा जा सके।
- युद्ध के समय जब प्रमुख सैनिक अधिकारी सैन्य कार्यों में व्यस्त रहते थे, तब उनके सहायक अधिकारी प्रशासनिक कार्यों का संचालन करते थे।
निष्कर्ष
गोरखा प्रशासन का प्रमुख आधार सैन्य शक्ति और केंद्रीय नियंत्रण था। उत्तराखंड को सैन्य विजय के माध्यम से प्राप्त करने के कारण गोरखों ने यहाँ ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की जिसमें सैनिक अधिकारियों को राजनीतिक, आर्थिक, न्यायिक और सैन्य अधिकार प्रदान किए गए। सुब्बा, नायब सुब्बा और सेनापति प्रशासन के प्रमुख स्तंभ थे तथा उनका समय-समय पर स्थानांतरण केंद्रीय सत्ता के नियंत्रण को बनाए रखने का माध्यम था। फौजदारियों और परगनों में सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति ने इस व्यवस्था को और अधिक सैन्य स्वरूप प्रदान किया। इस प्रकार गोरखा प्रशासन में नेपाली शासन-पद्धति, स्थानीय परंपराओं और सैन्य प्रशासन का मिश्रण दिखाई देता है।