श्याम शाह भाग -2

  • सिलसारी दानपत्र से श्याम शाह द्वारा किए गए भूमि-दान की जानकारी मिलती है। इसके अनुसार उसने सिलसारी ग्राम में भूमि का एक भाग शिवनाथ जोशी को दान किया था।
  • श्याम शाह के शासनकाल में महिपति शाह ने 1625 ई. में श्रीनगर में केशोराय मठ का निर्माण करवाया। महिपति शाह स्वयं राजा नहीं थे, बल्कि उच्च राजपद पर कार्यरत व्यक्ति थे।
  • श्याम शाह के शासनकाल में गढ़वाल की जनता को प्लेग महामारी का सामना करना पड़ा। उपलब्ध विवरण के अनुसार यह महामारी लगभग 1616 से 1624 ई. तक आठ वर्षों तक चली।
  • 1631 ई. में पादरी अजवेदो द्वारा श्रीनगर में गढ़नरेश के दाह-संस्कार को देखने का उल्लेख मिलता है। समय और परिस्थितियों को देखते हुए इसे सामान्यतः श्याम शाह के अंतिम संस्कार से संबंधित माना जाता है।

निष्कर्ष

श्याम शाह का शासनकाल गढ़वाल के पंवार इतिहास में अनेक दृष्टियों से महत्वपूर्ण था। उसके समय तिब्बत के साथ सैन्य संघर्ष, मुगल दरबार से संपर्क, जेसुइट पादरियों का श्रीनगर आगमन, धार्मिक निर्माण तथा दान जैसी घटनाएँ हुईं। विशेष रूप से 1621 ई. में जहाँगीर से भेंट और 1631 ई. में जेसुइट पादरियों द्वारा उसके अंतिम संस्कार का विवरण उसके शासनकाल को ऐतिहासिक स्रोतों की दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाते हैं। दूसरी ओर, उसके व्यक्तित्व के संबंध में स्वेच्छाचारिता और विलासिता के आरोप भी मिलते हैं। अलकनंदा में डूबने से मृत्यु और लगभग 60 रानियों के सती होने का विवरण सामाजिक इतिहास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस प्रकार श्याम शाह का काल राजनीतिक संघर्ष, बाहरी संपर्क, धार्मिक गतिविधियों और सामाजिक परंपराओं के अध्ययन के लिए विशेष महत्व रखता है।

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