धारशील शिलालेख

परिचय

धारशिल शिलालेख उत्तराखंड के मध्यकालीन इतिहास का एक महत्वपूर्ण अभिलेखीय स्रोत है। यह रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ क्षेत्र के परकंडी (धारशिल गाँव) में मंदाकिनी नदी घाटी के निकट स्थित है। यह अभिलेख पंवार/परमार वंश के शासनकाल से संबंधित है। इससे तत्कालीन कराधान व्यवस्था, सामाजिक जीवन, स्थानीय प्रशासन तथा राजकीय व्यवस्था के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त होती है। इस कारण धारशिल शिलालेख गढ़वाल के मध्यकालीन इतिहास के अध्ययन में विशेष महत्व रखता है।

धारशिल शिलालेख प्रमुख तथ्य

  • धारशिल शिलालेख रुद्रप्रयाग जनपद के ऊखीमठ क्षेत्र में स्थित है।
  • यह शिलालेख मंदाकिनी नदी घाटी के निकट परकंडी (धारशिल गाँव) में प्राप्त हुआ है।
  • धारशिल शिलालेख 1994 ई. में प्राप्त हुआ था।
  • यह अभिलेख पंवार/परमार वंश के शासनकाल से संबंधित है।
  • धारशिल शिलालेख का संबंध 29वें पंवार/परमार शासक अनंतपाल द्वितीय से माना जाता है।
  • यह अभिलेख संस्कृत अथवा संस्कृत से मिलती-जुलती भाषा में लिखा गया है।
  • शिलालेख से तत्कालीन कराधान (Taxation) व्यवस्था की जानकारी प्राप्त होती है।
  • इसमें तत्कालीन स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है।
  • धारशिल शिलालेख तत्कालीन सामाजिक जीवन एवं सामाजिक परिस्थितियों पर भी प्रकाश डालता है।
  • इस प्रकार धारशिल शिलालेख पंवारकालीन गढ़वाल की राजनीतिक, प्रशासनिक, आर्थिक एवं सामाजिक व्यवस्था के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है।

निष्कर्ष

धारशिल शिलालेख गढ़वाल के पंवार/परमारकालीन इतिहास को समझने का महत्वपूर्ण आधार है। यद्यपि इसका मुख्य महत्व कराधान, स्थानीय प्रशासन और सामाजिक जीवन से जुड़ी जानकारी में है, फिर भी यह तत्कालीन शासन व्यवस्था की व्यापक तस्वीर प्रस्तुत करता है। अनंतपाल द्वितीय से संबंधित यह अभिलेख मध्यकालीन गढ़वाल में विकसित राजस्व, प्रशासनिक एवं सामाजिक संरचना के अध्ययन के लिए विशेष उपयोगी है।

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