गोरखाओं के समय एवं बाद के चंद राजवंश |Chand Dynasty|Uttarakhand History In Hindi | Uttarakhand GK | Ukpsc/Uksssc Notes/Study Material

राजा महेन्द्र चन्द व उसके छोटे भाई लाल सिंह के बीच सत्ता संघर्ष चला था। चूँकि राजा महेन्द्र बड़ा था तो उसे अल्मोड़ा की गद्दी मिली थी। बाद में चंद वंश दो हिस्सों अल्मोड़ा तथा काशीपुर में बाँट गया था। अल्मोड़ा शाखा बड़े भाई की थी एवं काशीपुर शाखा छोटे भाई की। काशीपुर शाखा वर्तमान में भी है, जबकि कुँवर आन सिंह के बाद अल्मोड़ा शाखा समाप्त हो गई।

अल्मोड़ा शाखा1. प्रताप चंद— महेन्द्र चंद का पुत्र अंग्रेजों द्वारा अल्मोड़ा एवं दो गाँव मुरादाबाद में जागीर स्वरूप दिये गये।2. राजा नन्द सिंह— प्रतापचंद के पुत्र डिप्टी कलेक्टर के पद में भी रहे।3. राजा भीम सिंह— इनकी अंग्रेजों ने पेंशन बन्द कर दी थी। पूर्व में यह सरिस्तेदार रहे तथा बाद में तहसीलदार रहे। इन्होंने राष्ट्रीय आन्दोलन में स्पष्ट भूमिका तो नहीं निभाई किन्तु सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे। इनके दो पुत्र राजेन्द्र सिंह तथा आनंद सिंह हुए। कुँवर राजेन्द्र का विवाह नेपाल से हुआ एवं आन सिंह ने विवाह नहीं किया फलतः अल्मोड़ा शाखा यहीं समाप्त हो गई।काशीपुर शाखाराजा गुमानी सिंह— लाल सिंह का पुत्र था जो 1828 में लाल सिंह के निधन के बाद गद्दी में बैठा। इसने पिंडारी नेता अमीर खाँ से युद्ध किया और हराया था। इसके दरबार में ही कवि लोकरत्न पंत थे जिन्हें इसके नाम से ही गुमानी पंत नाम मिला।1. राजा शिवराज सिंह— 1836 में गद्दी में बैठा। 1840 में काशीपुर में महल बनवाया तथा रुद्रपुर छोड़कर वहीं रहने लगा। 1857 में इसने अंग्रेजों की मदद की थी। इन्हीं की स्मृति में अल्मोड़ा में शिवराज संस्कृत पाठशाला का निर्माण किया गया था।2. राजा हरिराज सिंह— 1886 में गद्दी में बैठा। इनके सबसे बड़े पुत्र उदय राज सिंह तो राजा बने किन्तु छोटे पुत्रों में कुँवर आनंद सिंह स्वतंत्रता सेनानी तथा संसद सदस्य रहे।3. राजा उदयराज सिंह— 1898 में गद्दी में बैठा।4. राजा हरिचंद राज सिंह— वर्तमान में इनके पुत्र करन चंद सिंह बाबा इस वंश के मुखिया हैं। जिन्हें के.सी. सिंह बाबा के नाम से जाना जाता है।

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